सैन्य बलों की भर्ती को हो जाएं युवा तैयार, जल्द करें आवेदन

Image result for जॉबराज्य के युवाओं को सैन्य बलों की भर्ती के लिए तैयार किए जाने का गवर्नमेंट कोशिश कर रही है. इसके पहले युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण देने की तैयारी है.

परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए राज्य गवर्नमेंट कुमाऊं व गढ़वाल में दो केंद्र स्थापित करेगी. यह फैसला सोमवार को CM त्रिवेंद्र सिंह रावत व सेना के बंगलूरू सिलेक्शन सेंटर के कमांडेंट मेजर जनरल वीपीएस भाकुनी की मुलाकात के दौरान लिया गया.

मे। ज। भाकुनी ने CM के समक्ष एक प्रस्तुतीकरण दिया, जिसमें बताया कि वर्तमान में एनडीए व सीडीएस परीक्षाओं की सफलता दर आईएएस इम्तिहान से भी कम है. सिविल सेवाओं के मुकाबले लगभग डेढ़ गुना अधिक अभ्यर्थी एनडीए व सीडीएस जैसी परीक्षाओं में आवेदन करते हैं, लेकिन सेना में भर्ती के लिए समग्र व्यक्तित्व परीक्षण (कॉम्प्रेहेन्सिव पर्सनेल्टी टेस्ट) के कड़े मानकों के कारण सफलता दर कम होती है.

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CM त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बोला कि उत्तराखंड एक सैनिक बाहुल्य राज्य है व यहां के युवाओं में सेना में भर्ती होकर राष्ट्र की सेवा करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है. युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप आवश्यक जानकारी व प्रशिक्षण प्रदान कर एनडीए व सीडीएस परीक्षाओं में उनकी सफलता का फीसदी बढ़ाया जा सकता है.

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि व्यक्तित्व विकास की कार्यशालाएं सिर्फ सैन्य सेवाएं ही नहीं वरन अन्य सरकारी सेवाओं व ज़िंदगी के विभिन्न क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए लाभप्रद होंगी.

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मीटिंग में तय हुआ कि प्रथम चरण में कुमाऊं व गढ़वाल में प्रशिक्षण कार्यशालाएं (ट्रेनिंग वर्कशॉप) ऐसे स्कूल-कॉलेज के भवनों में संचालित होंगी, जहां पर्याप्त अवस्थापना सुविधाएं हों. ये कार्यशालाएं दो से तीन हफ्ते की होंगी,

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जहां युवाओं को एनडीए व सीडीएस की चयन प्रक्रिया के अनुरूप व्यक्तित्व विकास, इंटरव्यू एवं अन्य शारीरिक परीक्षणों के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा. सैनिक कल्याण विभाग, एजुकेशन विभाग से समन्वय कर प्रशिक्षण कार्यशालाओं के लिए स्थाई केन्द्र के रूप में स्कूल या कॉलेज के भवन चयनित करेंगे जहां नियमित पठन-पाठन के साथ-साथ कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जा सके.

मे। ज। भाकुनी के मुताबिक पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने पर प्रति साल दस हजार युवाओं को प्रशिक्षित किया जा सकता है. द्वितीय चरण में 11वीं-12वीं के छात्र-छात्राओं के लिए राज्य गवर्नमेंट द्वारा स्थायी मिलिट्री/सैनिक स्कूल खोलने पर भी विचार किया जा सकता है.

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