जीएसटी उच्च दरों के विरोध में व्यापारी, उपभोक्ता तटस्थ

डॉ. हनुमंत यादव

सच पूछा जाय तो व्यापारियों को जितनी तकलीफ रिटर्न फाइल करने संबंधी नियमों से थी उतनी तकलीफ  वस्तुओं पर 28 प्रतिशत जीएसटी को लेकर नहीं थी| जीएसटी कौंसिल ने अपनी 23वीं बैठक में व्यापारियों की  इस तकलीफ  का निराकरण करने का प्रयास किया है| जीएसटी कौंसिल ने जीएसटीएन पोर्टल में तकनीकी खामियों के चलते रिटर्न भरने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए कंपोजिशन स्कीम को आकर्षक बनाने 6 अक्टूबर की 22वीं बैठक में असम के वित्तमंत्री हेमन्त विस्वाशर्मा की अध्यक्षता में एक मंत्री समूह का गठन किया था, उसकी सिफारिश पर कंपोजिशन स्कीम संबंधी निर्णय लिया गया| इस सिफारिश के अनुसार 1 करोड़ सालाना टर्नओवर वाले व्यवसायी इस कंपोजिशन स्कीम को ले सकते हैं, इसके अंतर्गत उन्हें तिमाही रिटर्न भरना पड़ेगा तथा 1|5 प्रतिशत जीएसटी देना होगा| 9 एवं 10 नवंबर को केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में आयोजित जीएसटी काउंसिल की 23वीं बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए| काउंसिल ने पहला महत्वपूर्ण निर्णय 215  वस्तुओं पर जीएसटी की वर्तमान दरें घटाने तथा दूसरा निर्णय व्यापारियों की तकलीफों को देखते हुए रिटर्न  फाइल करने के नियमों में आमूलचूल परिवर्तन करने से संबंधित था| सबसे अधिक महत्वपूर्ण निर्णय 28 प्रतिशत जीएसटी दरों वाली 228 वस्तुओं में से 178 वस्तुओं पर कर की दरें घटाकर 18 प्रतिशत करने से संबंधित था| ग्राइंडर की तरह स्टोन के बने वेट ग्राइंडर तथा टैंक तथा अन्य बख्तरबंद वाहनों पर जीएसटी की दर 28 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत करने का भी निर्णय लिया गया| अब एअर कंडीशनर, वाशिंग मशीन, सीमेंट और सिगरेट व पान मसाला सरीखीं अवगुणी वस्तुएं ही 28 प्रतिशत की स्लैब में बची हुई हैं| अनेक वस्तुओं पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत तथा कुछ वस्तुओं पर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया| जहां तक  जीएसटी-सेवाकर की दरों में कमी का सवाल है एसी व नॉन-एसी रेस्तरां में खाना खाने पर जीएसटी-सेवाकर की दर 18 प्रतिशत से घटाकर मात्र 5 प्रतिशत की गई| नई दरों को 15 नवंबर से लागू करने का निर्णय लिया गया| जीएसटी दरें घटाने से सरकार को हर साल 20 हजार करोड़ रुपए राजस्व हानि होने का अनुमान है| वस्तु एवं सेवाकर एक अप्रत्यक्ष कर है| अप्रत्यक्ष करों को व्यापारी उपभोक्ता से वसूल करके  सरकारी खजाने में जमा कराता है| इस प्रकार अप्रत्यक्ष करों का पूरा भार उपभोक्ता को ही वहन करना होता है| करों की दरें उच्च होने पर उपभोक्ता की जेब से अधिक पैसा सरकारी खजाने में जाता है| इससे सीमित आमदनी वाले उपभोक्ता का घरेलू बजट असंतुलित हो जाता है| आश्चर्य की बात यह है कि उपभोक्ता संगठनों, कर्मचारी व मजदूर संगठनों ने जीएसटी की दरें कम करने के लिए आन्दोलन करना तो दूर वित्तमंत्री को ज्ञापन देकर जोरदार मांग तक नहीं की| जीएसटी कौंसिल द्वारा 178  वस्तुओं पर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत और 37 वस्तुओं पर जीएसटी कम करने के निर्णय का व्यापारी संगठनों ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया है तथा अनेक व्यापारी संगठनों ने समाचारपत्रों में विज्ञापन देकर वित्तमंत्री अरुण जेटली का आभार जताया है किन्तु उपभोक्ता जिनको जीएसटी की दरें कम होने से लाभ होना है वे मौनव्रत धारण किये हुए तटस्थ हैं| सच पूछा जाय तो व्यापारियों को जितनी तकलीफ रिटर्न फाइल करने संबंधी नियमों से थी उतनी तकलीफ  वस्तुओं पर 28 प्रतिशत जीएसटी को लेकर नहीं थी| जीएसटी कौंसिल ने अपनी 23वीं बैठक में व्यापारियों की इस तकलीफ का निराकरण करने का प्रयास किया है| जीएसटी कौंसिल ने जीएसटीएन पोर्टल में तकनीकी खामियों के चलते रिटर्न भरने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए कंपोजिशन स्कीम को आकर्षक बनाने 6 अक्टूबर की 22वीं बैठक में असम के वित्तमंत्री हेमन्त विस्वाशर्मा की अध्यक्षता में एक मंत्री समूह का गठन किया था, उसकी सिफारिश पर कंपोजिशन स्कीम संबंधी निर्णय लिया गया| इस सिफारिश के अनुसार 1 करोड़ सालाना टर्नओवर वाले व्यवसायी इस कंपोजिशन स्कीम को ले सकते हैं, इसके अंतर्गत उन्हें तिमाही रिटर्न भरना पड़ेगा तथा 1|5 प्रतिशत जीएसटी देना होगा| जीएसटी के अनुपालन आसान करने के लिए जो महत्वपूर्ण फैसले लिए गए वे इस प्रकार हैं: जिन कारोबारियों का सालाना टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपये से कम है, उन्हें अब जीएसटी आर-2 और जीएसटी आर-3 रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं होगी| ऐसे कारोबारियों को  मार्च 2018 तक हर तिमाही में सिर्फ एक बार जीएसटीआर-1 रिटर्न ही फाइल करना होगा|  जुलाई-सितम्बर तिमाही रिटर्न को 31 दिसम्बर 2017 तक तथा अक्टूबर-दिसम्बर का तिमाही रिटर्न 15 फरवरी तक फाइल करने की सीमा तय की गई| ऐसे कारोबारी जिनका सालाना टर्नओवर डेढ़ करोड़ से अधिक है, उन्हें  जुलाई-अक्टूबर का रिटर्न 31 दिसम्बर तक फाइल करना होगा| उसके बाद नवंबर व आगे आने वाले महीनों के रिटर्न दो माह की 10वीं तारीख तक दाखिल करना होगा| जीएसटी कौंसिल ने व्यापारियों की परेशानियों को देखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय जीएसटी आर-3-बी रिटर्न फाइल करने में विलम्ब पर लेटफीस के रूप में लगने वाले अर्थदंड में रियायत देने के संबंध में लिया| जो व्यापारी किंचित कारणों से जुलाई-सितंबर 2017 तक का जीएसटी आर-3-बी रिटर्न फाइल नहीं कर पाए थे, उन पर 200 रुपए प्रतिदिन लगने वाले विलम्ब शुल्क माफ कर दिया जाएगा तथा अक्टूबर माह से  रिटर्न फाइल करने में देरी पर लगने वाले 200 रुपए रोजाना विलम्ब शुल्क को घटाकर 20 रुपए प्रतिदिन करने का निर्णय लिया गया| सभी कारोबारियों को जीएसटी आर-3-बी रिटर्न फाइल करने की सुविधा मार्च तक मिलती रहेगी| कारोबारियों को सहूलियत देने वाले इन निर्णयों से उनकी परेशानियां एक बड़े हद तक कम हो जाएंगी| सवाल उठता है कि जीएसटी कौंसिल ने वस्तुओं पर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत या 12 प्रतिशत करने का निर्णय क्यों नहीं लिया| वैसे तो समाचार पत्रों में यही कहा जा रहा है कि गुजरात विधानसभा चुनाव की तिथियां ऐलान कर दिए जाने के बाद मतदाताओं को लुभाने के लिए सरकार ने यह निर्णय लिया| यह तर्क अपनी जगह बिल्कुल सही है| सवाल उठता है कि यह निर्णय हिमाचल प्रदेश में मतदान के पहले जीएसटी कौंसिल 6 अक्टूबर की 22वीं बैठक में क्यों नहीं लिया गया| मेरे समझ में 10 नवंबर की बैठक में यह निर्णय लेने का प्रमुख कारण यह था कि अवगुणी वस्तुओं को छोड़कर 28 प्रतिशत जीएसटी स्लैब वाली अधिकांश वस्तुओं की सालाना बिक्री की 30 प्रतिशत बिक्री दशहरा-दिवाली-कार्तिक पूर्णमासी के दो महीनों में ही होती है| हर साल की भांति चालू साल में भी इस त्योहारी सीजन में जोरदार  बिक्री हुई है| केन्द्र व राज्य सरकारें इस भारी जीएसटी कर राजस्व से वंचित नहीं रहना चाहती थी, इसीलिए सरकारों ने मंशा कर लेने के बावजूद 215 वस्तुओं की जीएसटी में कमी पर 23वीं बैठक के पूर्व तक विचार नहीं किया था| कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों ने भी दिवाली त्योहार बीत जाने के बाद स्लैब में कमी करने संबंधी पत्र कौंसिल के अध्यक्ष केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को लिखा| मंत्री समूह की सिफारिश के आधार पर रिटर्न भरने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया| वैसे भी 23वीं बैठक का मुख्य एजेंडा जीएसटी की 3 माह की प्रगति की समीक्षा करने के बाद करो की स्लैब में बदलाव संबंधी निर्णय लिया जाना था, इसलिए एजेंडे के अनुसार निर्णय लिए गए| गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान में 178 वस्तुओं को 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत के स्लैब में लाने का श्रेय कांग्रेस एवं भाजपा दोनों ही दल मतदाताओं के समक्ष कर रहे हैं, मतदाता इसका हकदार किस दल को मानता है, यह चुनाव परिणाम ही बताएगा|

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