जाम से मुक्ति चाहिए,तो थोड़ा कष्ट सहना होगा

अनुज कुमार सिन्हा

पूरा शहर, पूरी राजधानी (रांची) तबाह है| जाम से| रांची के बाहर की बात करें तो जमशेदपुर, धनबाद में हालात (जाम के मामले में) बेहतर नहीं हैं| छोटे-छोटे शहरों में भी अब यह परेशानी दिखने लगी है| समय रहते नहीं सुधरे, तैयारी नहीं की, सड़कें चैड़ी नहीं हुई, तो उन छोटे शहरों के भी हालात रांची जैसे होंगे| झारखंड बनने के बाद तेजी से रांची की आबादी बढ़ी, गाड़ियां कई गुनी बढ़ी|  अपवाद को छोड़ दें तो सड़कें उस अनुपात में चैड़ी नहीं हुईं| नतीजा सामने है| शहर में आप फ्री होकर चल नहीं सकते, गाड़ियां नहीं चला सकते| चारो ओर जाम| बीस मिनट का रास्ता दो-दो घंटे में तय होता है| लोग परेशान, पर करें तो क्या करें| रातू रोड और कांटा टोली से जो लोग रोज गुजरते हैं, वे इस पीड़ा को ज्यादा महसूस कर सकते हैं| शहर में कई बार फ्लाइओवर बनाने की घोषणा की गयी, लेकिन होने लगा विरोध| 17 साल में कोई भी सरकार कड़े फैसले नहीं ले सकी| विधायक-पार्षद अपना दांव खेलते रहे, रोड़ा अटकाते रहे| अब फिर शिलान्यास होना है, विरोध भी हो रहा है| जो प्रभावित होगा, जिसके घर या दुकान का कुछ हिस्सा टूटेगा, वह नाराज होगा ही| उसकी नाराजगी कैसे कम हो, इस पर बात हो| उसे पूरा पैसा मिले, पूरी सुविधा मिले, कहीं बसाना हो, जरूर बसाइए लेकिन फ्लाइओवर जरूर बनाइए, सड़कें जरूर चैड़ी कीजिए, वरना नरक की जिंदगी जीने के लिए तैयार हो जाइए| ऐसे कड़े फैसले (फ्लाइओवर बनाने या सड़कें चैड़ी करने) से हजार लोग प्रभावित हो सकते हैं लेकिन 20 लाख लोगों को राहत मिलेगी| याद रखिए, आज नहीं तो कल यह काम करना ही होगा| ऐसा न हो कि चार साल बाद जब यह फैसला हो तो स्थिति संभालने लायक भी न रहे| चाहे हरमू रोड का फ्लाइओवर हो या फिर कांटाटोली का, जो तिथि निर्धारित है, उस पर शिलान्यास हो, समय पर काम शुरू हो और निर्धारित समय के पहले ही फ्लाइओवर बन जाये|

दो साल इसे बनने में लगेंगे, तब तक शहर में जो ट्रैफिक व्यवस्था होगी, उसमें लोगों को कष्ट तो होगा ही| एक दिन के जाम में यह हालत है तो दो साल में क्या हाल होगा| अगर समय पर नहीं बना और तीन-चार साल लगा दिया तो समझ लीजिए क्या होगा? इसलिए समय पर जमीन अधिग्रहण, समय पर काम आरंभ करना, समय पर खत्म करना बड़ी चुनौती होगी| सरकार-अफसर इस चुनौती को स्वीकार करें, जनता सहयोग करे, कुछ भी असंभव नहीं| हां, लोगों को धैर्य रखना होगा, कई जगहों पर लोगों को घूम कर जाना होगा, दूरी बढ़ेगी, जाम बढ़ेगा, समय लगेगा, पर भविष्य के आराम के लिए इस कष्ट को सहना होगा| चिल्लाना नहीं होगा| हां, राजनेता इस पर राजनीति न करें| न तो परदे के सामने  और न  ही परदे के पीछे| लोगों को उकसायें नहीं| यह सत्ता पक्ष या विपक्ष का मामला नहीं है| सत्ता पक्ष बनाम सत्ता पक्ष (निर्णय सरकार का होगा लेकिन अधिकांश विधायक भी भाजपा के ही हैं) इसे न बनायें| हां, सरकार इतना ध्यान रखे कि किसी के साथ सौतेला व्यवहार न हो| अगर किसी गरीब दुकानदार का घर तोड़ा जाता है तो ताकतवर और पैसेवाले बड़े दुकानदार भी नहीं बचें| दोनों के साथ समान व्यवहार हो| होता यह है कि ताकत और पैरवी के सामने नियम बदल दिये जाते हैं| अगर ऐसा होगा तो आक्रोश बढ़ेगा| सबसे बड़ी चुनौती ट्रैफिक पुलिस के सामने होगी| इसे स्वीकारना होगा| यह भी सच है कि सिर्फ दो फ्लाइओवर से रांची का कल्याण नहीं होनेवाला| रातू रोड में भी आज नहीं तो कल यह काम करना होगा| शहर पर लोड कम करना होगा| आठ-दस साल से रिंग रोड बन ही रहा है (पता नहीं कैसे काम हो रहा है)|  अगर समय पर यह काम पूरा हो गया होता तो शहर पर कुछ तो लोड कम होता| बेहतर होगा कि जितना जल्द हो सके, रिंग रोड पूरा बन जाये| फ्लाइओवर का काम शुरू होने के पहले शहर की सड़कें चैड़ी कर दी जायें| नाली को ढंग से बना कर भी यह काम पूरा हो सकता है| जहां सड़कें चैड़ी हो चुकी हैं लेकिन बिजली के खंभे बीच में हैं| ऐसे अधूरे काम को पूरा करना होगा| यह काम आसान नहीं है| रांची का हर नागरिक (जिसकी जमीन जा रही है), वह भी जाम से परेशान है| वह भी निदान चाहता है| मोमेंटम झारखंड के दौरान कांटाटोली से बूटी मोड़ तक की सड़क चैड़ी हो गयी| आज इस रास्ते पर लोग राहत महसूस कर रहे हैं| सोचिए, अगर नामकुम, डिबडीह और कडरू फ्लाइओवर नहीं बना होता तो आज रांची की हालत क्या होती| आज इन तीनों फ्लाइओेवर से गुजरनेवालों को आराम होता है| कांटाटोली, हरमू या रातू रोड (जिसका मामला लटका दिया गया है) के फ्लाइओवर जब बन कर तैयार हो जायें तो इन क्षेत्रों को जाम से मुक्ति मिल जायेगी|  सारा सवाल इच्छाशक्ति का है| सरकार इन्हें बनाना चाहती है|

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पीछे हटने से भविष्य के लिए और गंभीर संकट पैदा होगा| जो करना है, अभी कीजिए| कड़ी मानिटरिंग हो, अफसर और पूरी टीम इस मिशन को पूरा करने में लग जाये तो यह काम जरूर समय से पहले पूरा होगा| आज दिल्ली, कोलकाता, बेंगलूर,यहां तक की पटना में भी फ्लाइओवर का जाल बिछा है| रांची में भी यह काम हो सकता है| अगर जाम नहीं चाहिए तो कष्ट करना होगा, स्वार्थ से ऊपर उठना होगा| जिसने भी अतिक्रमण किया है, नियम के विरुद्ध काम किया है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह कितना भी पैरवी वाला क्यों न हो| कुछ और मुद्दे हैं| आज नहीं तो कल नयी रांची बसानी होगी (नाम चाहे जो भी दें)| सारे मॉल रांची शहर में क्यो बनेंगे| जहां जाम की इतनी बड़ी समस्या है, वहां बीच शहर में बड़े-बड़े मॉल, होटल, अस्पताल बनाने की अनुमति कैसे मिल जा रही है| जाम हो,तो मरीज अस्पताल जाते-जाते लुढ़क जायेगा| भविष्य में इन बिंदुओं पर भी ध्यान देना होगा| होटल, अस्पताल, मॉल आदि शहर से थोड़ी दूरी पर बने, कुछ बड़े दफ्तर भी बाहर बने तो रांची शहर पर धीरे-धीरे लोड कम होगा| अगर ऐसा न हुआ तो सड़कें कितनी चैड़ी कर लें, कितने ही फ्लाइओवर क्यों न बना लें, समस्या ज्यों की त्यों रहेंगी| इसलिए सरकार कड़े फैसले लेते हुए काम को आगे बढ़ाये, उसे जनता का सहयोग मिलेगा ही| यह हर आदमी से जुड़ा मामला है, ताकि वह भी जाम से राहत की सांस ले सके|

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