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भारत की क्रेडिट रेटिंग में मूडीज द्वारा सुधार

डॉ. हनुमंत यादव

सवाल उठता है कि क्या क्रेडिट रेटिंग में सुधार से शेयर बाजार में आई तेजी अधिक समय तक कायम रहेगी? इस संबंध में मेरा विचार है कि इसका प्रभाव अल्पकालिक रहने वाला है| शेयर बाजार में तेजी कम्पनियों के कामकाज के परिणामों पर निर्भर करेगी| सबसे महत्वपूर्ण बात है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत पर शेयर बाजार में जोरदार तेजी आना निश्चित है| भाजपा की जीत पर बम्बई शेयर बाजार का सेंसेक्स पहले 34 हजार तथा बाद में 35 हजार का बिन्दु भी पार कर ले तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए| किन्तु इस क्रेडिट रेटिंग में सुधार का गुजरात विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को प्रत्यक्ष रूप से लाभ शायद ही मिल पाए  क्योंकि विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे अधिक हावी रहने वाले हैं| वैश्विक क्रेडिट रेटिंग संस्था मूडीज द्वारा 16 नवंबर को जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार भारत के सावरेन बांडों अर्थात सरकारी बांडों एवं करेंसी की क्रेडिट रेटिंग बीएए3 को बढ़ाकर बीएए2 कर दी गई है| मूडी ने 20 दिसंबर 2011 को भारत की क्रेडिट रेटिंग बीएए3 करके इसको स्थिर वर्ग में रखा था| बीएए3 रेटिंग निवेश वर्ग में निचले स्तर की रेटिंग मानी जाती है, इसका मतलब होता है कि देश में निवेश में मध्यम जोखिम है| बीएए3 से नीचे सी ग्रेड रेटिंग का मतलब होता है कि उस देश में निवेश बहुत जोखिम पूर्ण है अर्थात उस देश को  दिया गया कर्ज और  निवेश में पैसा डूबने की संभावना अधिक है| 2015 में मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों के प्रयासों को देखते हुए मूडीज ने 9 अप्रैल 2015 को बीएए3 ग्रेड को स्थिर से हटाकर सकारात्मक वर्ग में रख दिया था जिसका मतलब होता है कि आगे आनेवाले दिनों में क्रेडिट ग्रेड में धनात्मक सुधार की संभावनाएं हैं| 16 नवंबर 2016 की रेटिंग में भी बीएए3 को सकारात्मक रखा गया था| पिछले एक साल में सरकार द्वारा किए गए संस्थागत आर्थिक प्रयासों से अर्थव्यवस्था की मजबूती में होनेवाले संभावित सुधार को देखते हुए मूडीज ने भारत की क्रेडिट रेटिंग बीएए3 को बढ़ाकर बीएए2 कर  दिया जिसका मतलब यह हुआ कि भारत में निवेश में जोखिम कम के साथ पूंजी सुरक्षित है| मूडीज ने बीएए2 रेटिंग को स्थिर श्रेणी में रखा है जिसका मतलब यह हुआ कि निकट भविष्य में बीएए2 रेटिंग में परिवर्तन की संभावनाएं कम हैं|  मूडीज ने भारत की क्रेडिट रेटिंग में सुधार के पक्ष में जो तर्क दिए हैं वे इस प्रकार हैंरू सरकारी कर्ज में कमी हेतु प्रयास, चालू लेखा घाटा में कमी, राजकोषीय घाटा में कमी, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा, मुद्रा स्फीति पर नियंत्रण, वस्तु एवं सेवा कर लागू कर अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में सुधार, दिवालियापन कानून, बैंकों को पूंजी उपलब्ध करवाकर उनके फंसे हुए कर्जों  में कमी लाने के प्रयास, आधार कार्ड से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजनाओं को जोड़ने, काला धन निकालने के लिए किए गए विमुद्रीकरण| मूडीज के अनुसार कई महत्वपूर्ण सुधार अभी डिजाइन स्तर पर ही हैं, किन्तु जैसे ही उन सुधारों को लागू किया जायेगा, उससे कारोबारी माहौल सुगम होगा| वस्तु एवं सेवाकर के कारण राज्यों के बीच होनेवाले व्यापार में बाधाएं खत्म होंगी तथा उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा| सरकार के द्वारा आर्थिक संस्थागत सुधारों में निरंतरता बनाए रखने से उच्च विकास दर की संभावनाएं बलवती हैं| मूडीज का अनुमान है कि भारत की जीडीपी वृद्धि दर चालू साल में 6|7 प्रतिशत रहने के बाद 2018-19 में 7|5 प्रतिशत पहुंचकर 2020 के बाद इसमें और अधिक तेजी की संभावना है| मूडीज ने मौजूदा भारी कर्ज के स्तर को लेकर आगाह भी किया है| विश्व की दो बड़ी क्रेडिट एजेंसियों में से पहली मूडीज ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसी की स्थापना 1909 में जॉन मूडी ने न्यूयार्क में की थी| दूसरी बड़ी क्रेडिट एजेंसी स्टैंडर्ड एण्ड पुअर्स ग्लोबल की स्थापना मैकग्रॉ हिल्स फायनेंसियल सर्विसेज नाम से 1915 में जेम्स मैकग्रॉ हिल ने न्यूयार्क में की थी| इन एजेंसियों की रेटिंग का असर पूरे दुनिया भर के निवेशकों पर पड़ता है| ये दोनों अमेरिकी क्रेडिट एजेंसियां दुनिया के 80 प्रतिशत क्रेडिट रेटिंग व्यवसाय पर नियंत्रण रखती हैं| तीसरे स्थान पर अमेरिकी एजेंसी फिच है, जिसका 15 प्रतिशत व्यवसाय पर नियंत्रण है| अन्य ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में डीबीआरएस, जेसीआए, डागोंग व चेंगझिन उल्लेखनीय हैं| इनके अलावा हर एक बड़े देश में कम से कम एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है|  क्रिसिल, इकरा, केयर आदि भारत की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां हैं| ये क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां न केवल देशों की बल्कि उन देशों की कम्पनियों की भी वित्तीय व्यवस्था तथा साख का आकलन करके रेटिंग देती हैं| स्टैंडर्ड एण्ड पुअर्स ने भारत की क्रेडिट रेटिंग 26 सितंबर 2014 से बी|बी|बी| दे रखा है, यह अभी भी स्थिर वर्ग में है| यह रेटिंग निवेश ग्रेड की मानी जाती है| फिच द्वारा भारत की रेटिंग जून 2013 में  बी|बी|बी|- दी गई थी, यह रेटिंग स्थिर वर्ग में यथावत है| यह रेटिंग निवेश वर्ग की निचले स्तर की मानी जाती है, इससे नीची ग्रेडिंग जोखिमपूर्ण निवेश की रहती है| वित्त सचिव हसमुख अढिया और प्रधान आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने मूडीज की रेटिंग का स्वागत करते हुए अपेक्षा व्यक्त की है  स्टैंडर्ड एण्ड पुअर्स तथा फिच भी भारत की सावरेन रेटिंग में शीघ्र सुधार करेंगी| अरविंद सुब्रमण्यम का कहना है कि इन क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भारत की क्रेडिट रेटिंग सुधार में बहुत विलम्ब कर दिया है| यद्यपि दक्षिण एशिया के देशों में मूडीज द्वारा केवल भारत की क्रेडिट रेटिंग बीबीबी2 दी गई है| किन्तु भारत चीन की ए-1 ग्रेडिंग से बहुत पीछे है| संभवतरू नीति आयोग के विजन 2032 के लक्ष्यों के पूरा होने पर भारत चीन के स्तर तक पहुंचने में सफल हो सकता है अर्थात भारत को चीन के स्तर तक पहुंचने में 15 साल लग सकते हैं| लेकिन संतोष की बात यह है कि उभरती अर्थव्यवस्था वाले ब्राजाल, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया आदि देशों की मूडीज ग्रेडिंग भारत से नीची है, जिसका मतलब यह हुआ कि उक्त देशों की तुलना में भारत के सरकारी बांडों में निवेश सुरक्षित है| यह इसलिए भी कि ब्राजाल व दक्षिण अफ्रीका का भावी परिदृश्य नकारात्मक बताया गया है| इसमें दो राय नहीं है कि मूडीज की भारत की क्रेडिट रेटिंग में सुधार से सरकार को पहले की तुलना में कम ब्याज पर अपेक्षित मात्रा में पूंजी जुटाने में आसानी होगी| कुछ अर्थशास्त्रियों का बयान है कि भारतीय कम्पनियों को पूंजी जुटाने में आसानी होगी, यह उनका भ्रम है| क्योंकि कम्पनियों की स्वयं की क्रेडिट रेटिंग क्या दी गई है उनकी पंूजी जुटाने में सहूलियत उस पर निर्भर करेगी| मैक्रो लेवल पर देखें तो मूडीज रेटिंग इस बात को अवश्य इंगित करता है कि भारतीय कारपोरेट सेक्टर की प्रतिभूतियों में निवेश में जोखिम कम है तथा पूंजी सुरक्षित है|

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बम्बई शेयर बाजार बीएसई तथा एन|एस|ई| में आया जोरदार उछाल इसी बात को दर्शाता है| सवाल उठता है कि क्या क्रेडिट रेटिंग में सुधार से शेयर बाजार में आई तेजी अधिक समय तक कायम रहेगी? इस संबंध में मेरा विचार है कि इसका प्रभाव अल्पकालिक रहने वाला है| शेयर बाजार में तेजी कम्पनियों के कामकाज के परिणामों पर निर्भर करेगी|  सबसे महत्वपूर्ण बात है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत पर शेयर बाजार में जोरदार तेजी आना निश्चित है| भाजपा की जीत पर बम्बई शेयर बाजार का सेंसेक्स पहले 34 हजार तथा बाद में 35 हजार का बिन्दु भी पार कर ले तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए| किन्तु इस क्रेडिट रेटिंग में सुधार का गुजरात विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को प्रत्यक्ष रूप से लाभ शायद ही मिल पाए  क्योंकि विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे अधिक हावी रहने वाले हैं| आम गुजराती मतदाता को क्रेडिट रेटिंग में सुधार से गुजरात एवं आम नागरिक को क्या फायदा होगा, यह समझाना कठिन होगा| आम गुजराती तो गुजराती प्रधानमंत्री के हाथ मजबूत करने के लिए भाजपा को समर्थन देगा|

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