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राहुल गांधी गुजरात के मंदिरों में जा रहे हैं, तो कपिल सिब्बल अयोध्या केस में क्यों देरी करा रहे हैं: अमित शाह

Image result for अमित शाहनई दिल्ली: अयोध्या टकराव मामले में सुनवाई के दौरान वक्फ बोर्ड के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम न्यायालय में आग्रह किया कि अपीलों पर अगले लोकसभा चुनाव के बाद जुलाई, 2019 में सुनवाई करायी जाए, क्योंकि मौजूदा माहौल अनुकूल नहीं है। कांग्रेस पार्टी नेता कपिल सिब्बल की इस दलील पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पलटवार किया है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक अमित शाह ने कहा, ‘राहुल गांधी एक तरफ गुजरात के मंदिरों में जा रहे हैं, दूसरी तरफ कपिल सिब्बल राम जन्मभूमि केस में निर्णय आने में अड़ंगा लगा रहे हैं। पूरे मसल पर मैं राहुल गांधी की राय चाहता हूं। ‘

भाजपा ने मंगलवार को कांग्रेस से यह स्पष्ट करने को बोला कि वह बताये कि अयोध्या मामले में सुप्रीम न्यायालय में उसके नेता कपिल सिब्बल द्वारा जाहीर विचार उनका अपना था या सुन्नी वक्फ बोर्ड का ? राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद टकराव मामले में पीठ से एक पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से न्यायलय में उपस्थित होने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बोला कि इस मामले की सुनवाई को अगले लोक सभा चुनाव के बाद जुलाई, 2019 में कराई जाए क्योंकि मौजूदा माहौल अनुकूल नहीं है।

बीजेपी प्रवक्ता जी वी एल नरसिम्ह राव ने यहां अपने बयान में बोला कि अयोध्या मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाकर 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद करने का आग्रह करके सिब्बल ने इस कानूनी टकराव का राजनीतिकरण करने का कोशिश किया है। उन्होंने बोला कि कांग्रेस पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कपिल सिब्बल द्वारा जाहीर विचार उनका अपना था या सुन्नी वक्फ बोर्ड का ? उन्होंने बोला कि इस उलझे मामले का जल्द निवारण निकालने का कोशिश करने की बजाए कांग्रेस पार्टी इसे अनिश्चितता की ओर ढ़केलने का कोशिश कर रही है।

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राहुल गांधी पर चुटकी लेते हुए भाजपा प्रवक्ता ने बोला कि क्या स्वयं घोषित शिव भक्त की ईश्वर राम में आस्था नहीं है। उन्होंने बोला कि हमें इस बात की खुशी है कि बड़े अंतर में पराजय के डर के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने अब तक 2019 का चुनाव टालने की मांग नहीं की है।

सुप्रीम न्यायालय ने सुनवाई 8 फरवरी तक टाला
सुप्रीम न्यायालय ने अयोध्या में रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद मालिकाना हक प्रकरण में हाई न्यायालय के निर्णय के विरूद्ध दायर दीवानी अपीलों पर अगले वर्ष आठ फरवरी को सुनवाई करने का निश्चय किया। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण व न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की तीन सदस्यीय विशेष खंडपीठ ने इस प्रकरण के सभी एडवोकेट्स ऑन रिकार्ड से बोला कि वे एक साथ बैठकर यह सुनिश्चित करें कि शीर्ष न्यायालय की रजिस्ट्री में दाखिल करने से पहले सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों का अनुवाद हो गया हो व उनपर संख्या लिखी जा चुकी हो।

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इस मामले में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर वकीलों को रजिस्ट्री से संपर्क करने का आदेश दिया गया है।

पीठ ने एक पक्षकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के इस आग्रह को बहुत गंभीरता से लिया कि इन अपीलों पर अगले लोक सभा चुनाव के बाद जुलाई, 2019 में सुनवाई करायी जाए क्योकि मौजूदा माहौल अनुकूल नहीं है।

उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट की ओर से अलावा सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस दलील का पुरजोर विरोध किया कि दस्तावेजों से संबंधित कार्य पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि हर वस्तु का अनुपालन किया जा चुका है व ये मामले सुनवाई के लिये तैयार हैं।

इलाहाबाद उच्च कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने 30 सितंबर 2010 को 2:1 के बहुमत से अपनी व्यवस्था में विवादित भूमि को तीनों पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाडा व ईश्वर राम लला के बीच बांटने का आदेश दिया था।

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