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गुजरात चुनावः इस नारे के सहारे कांग्रेस पार्टी ने…

Image result for गुजरात चुनावः इस नारे के सहारे कांग्रेस पार्टी नेप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय गुजरात के CM थे  तब विधानसभा चुनाव में विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की हिम्मत जुटा लेते थे. सांप्रदायिक मुद्दे पर चुनाव का ध्रुवीकरण  2012 के चुनाव के केंद्र गवर्नमेंट की आर्थिक नीति तथा कालाधन  करप्शन भी मुद्दा था, लेकिन अब बीजेपी के यही मुद्दे उसे डराने लगे हैं.

कांग्रेस आईटी सेल गुजरात के प्रभारी रोहन गुप्ता कहते हैं कि पार्टी के एक तंज ने बीजेपी को जमीनी स्थिति का एहसास करा दिया था. यह तंज था विकास पागल हो गया है. रोहन कहते हैं कि हम इस समय एक नारा दे रहे हैं – भ्रष्ट शासन, अहंकारी वर्तन. समय की मांग है सत्ता परिवर्तन, यह नारा बीजेपी के लिए मुसीबत बनता जा रहा है.

करप्शन से लेकर विकास के मुद्दे पर सत्ता पक्ष घिरता चला जा रहा है. इसके अतिरिक्त ‘नवसर्जन आवे छै, कांग्रेस पार्टी लावे छै’ भी गुजरात विधानसभा के चुनाव में जमकर धूम मचा रहा है. डॉअनिल जोशियारा कहते हैं कि बीजेपी विकास के नाम पर राष्ट्र की जनता को बेवकूफ बना रही थी.पिछले दो दशक से यही चल रहा था. बीजेपी को सबसे ज्यादा पाटीदार सीटें जितवाता था.

पिछले चुनाव में बीजेपी ने 52 पाटीदार बाहुल क्षेत्रों की सीट जीती थी. जबकि कांग्रेस पार्टी के खाते में महज चार आई थी. अब उन्हीं पाटीदारों की स्थिति यह है कि उन्हें अपने लिए आरक्षण की मांग करनी पड़ रही है. जोशियारा कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को भी उठाया है कि आखिर प्रदेश का विकास हुआ है तो पाटीदार समाज को आरक्षण की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?

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पार्टी के एक अन्य सूत्र का कहना है कि पहले विकास का मुद्दा बीजेपी का था, केन्द्र गवर्नमेंट पर हमले बीजेपी करती थी, केंद्र गवर्नमेंट के करप्शन  आर्थिक नीतियों को बीजेपी घेरती थी  अब आज इसके अच्छा उल्टा हो रहा है. सत्ता पक्ष रोजगार, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, सामाजिक क्षेत्र, पॉलिटिक्ससमेत किसी भी एरिया में उल्लेखनीय सहयोग न दे पाने के कारण खुद घिरा हुआ है.

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कांग्रेस के रणनीतिकार राज्य में बड़ौदा को पॉलिटिक्स का लिटमस टेस्ट मान रहे हैं. बड़ौदा में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं. पांचों पर बीजेपी का कब्जा है. यहां मराठी, सिंधी समेत कई समाज के लोग हैं. बड़ौदा का चरित्र कॉस्मोपॉलिटन सिटी जैसा है.

यहां बीजेपी के पक्ष में माहौल रहा है. ऐसे में पार्टी के रणनीतिकार मान रहे हैं कि यदि पांच में एक भी सीट कांग्रेस पार्टी जीत गई तो गुजरात में गवर्नमेंट बननी तय है. हरेश मलानी भी कहते हैं कि बड़ौदा में बीजेपी के अनुकूल चुनावी गणित रहता है.

इसलिए पिछले कुछ चुनावों से वह सभी सीटों पर विजय दर्ज करा लेती है, लेकिन इस बार दो सीटों पर मुकाबला कड़ा है. कांग्रेस पार्टी के पक्ष में हवा भी है. मलानी कहते हैं कि ऐसे में यदि खाता खुल गया तो  समझिए पूरे गुजरात में कांग्रेस पार्टी बीजेपी पर हावी है.

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