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केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने खुद को बताया ये…

Image result for केंद्रीय मंत्री उमा भारतीउज्जैन: केंद्रीय स्वच्छता एवं जल संरक्षण मंत्री उमा भारती ने यहां रविवार (7 जनवरी) को बोला कि वह वर्तमान दौर की पॉलिटिक्स में ‘मोगली’ हैं यहां आयोजित तीन दिवसीय शैव महोत्सव के समापन मौका पर मंच संचालक ने जब साध्वी उमा भारती का परिचय ‘प्रखर वक्ता’ के रूप में दिया, तो उमा ने मोगली का किस्सा सुना डाला उन्होंने कहा, “मोगली नाम का बच्चा जंगल में पैदा हुआ था, जिसे भेड़िए उठा ले गए, बाद में वह मिल गया मैं सोचती हूं कि अगर मोगली पॉलिटिक्स में आ जाए तो वह क्या-क्या करेगा, वही कुछ मैं भी करती हूं ” उमा भारती ने कहा, “किसी के बारे में ऐसी चर्चा हो जाती है कि वह ऐसा है  यह बात आगे चलती रहती है, इसी तरह मेरे साथ हुआ कहीं प्रवचन दिए तो लोगों ने प्रखर वक्ता कह दिया  आज भी वह बोला जा रहा है वास्तव में मैं प्रखर वक्ता हूं नहीं “

उन्होंने आगे कहा, “मैं तीन-चार दिन पहले अपने बारे में सोच रही थी, तभी मुझे मोगली की कहानी याद आ गई यह मनगढ़ंत कहानी नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की ही घटना है मोगली भेड़ियों के पास से वापस आ जाता है मैं सोचती हूं कि अगर मोगली पॉलिटिक्स में आ जाए तो वह क्या क्या करेगा, वही मैं भी करती हूं कभी कुछ कह दिया, बाद में लगता है कि अरे यह क्या कह दिया ”

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शैव महोत्सव में इंडियन डाक विभाग द्वारा बारह ज्योतिर्लिगों  शैव महोत्सव के कवर पेज पर आधारित पोस्टकार्ड  डाक टिकट भी जारी किए गए प्राचीन सनातन संस्कृति, ईश्वर शिव के स्वरूप, उनकी पूजन पद्धति  देवस्थानों के संरक्षण  प्रबंधन पर चार विशिष्ट सत्रों में वैचारिक संगोष्ठियों का भी आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न प्रांतों से आए विद्वानों ने अपने विचार जाहीर किए

समापन प्रोग्राम के मुख्य मेहमान आरएसएस के सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा, “हम सभी बड़े भाग्यशाली हैं कि पवित्र भारतभूमि में हम सबका जन्म हुआ यह भूमि देवताओं, पुण्य  मोक्ष की भूमि है यहां हर कंकड़ में भी शंकर विद्यमान हैं नमस्कार करने की परम्परा हिंदुस्तान के अतिरिक्त  किसी अन्य राष्ट्र में नहीं है, क्योंकि हमारे यहां प्रत्येक जीव में परमात्मा का निवास माना जाता है, इसलि, हम सभी को आदरपूर्वक नमस्कार करते हैं ”

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उन्होंने आगे कहा, “यही बात हिंदुस्तानियों को औरों से अलग करती है यह संस्कृति हमें विरासत में प्राप्त हुई है संपूर्ण मानव जाति को हम अपना मानते हैं पिछले कुछ समय से हमारी सनातन संस्कृति की विस्मृति हो रही है, अत: इसे बचाने की  अनंतकाल तक बनाए रखने का कोशिश हम सभी को करना है ” माखनसिंह चौहान ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में बोला कि शैव महोत्सव का आयोजन अद्भुत  अकल्पनीय है ईश्वर महाकालेश्वर की कृपा से यह आयोजन सफलतापूर्वक संभव हो सका है

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