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CM योगी ने कहा की संस्कृत मां है, इसकी तुलना बहु या बेटे से नहीं हो सकती

Image result for योगीसंस्कृत संस्थान की ओर से बुधवार को लोक भवन में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया.प्रोग्राम में मुख्य मेहमान गवर्नर रामनाईक  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संस्कृत संस्थान के साधकों को सम्मानित किया. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने संस्कृत को मां का दर्जा देते हुए बोला कि इसे विश्वभाषा की माता का गौरव दिलाने के लिए सभी आगे आएं.
इस मौके पर गवर्नर रामनाईक ने बोला कि संस्कृत को राज भवन से लोक भवन लाने की आवश्यकता है. हम संस्कृत की ओर नहीं देखेंगे तो कौन देखेगा. विदेश से कोई उत्थान के लिए नहीं आएगा. गवर्नर ने बोला कि जब यूनेस्को ने बोला तब कुछ लोगों को कुम्भ खास लगने लगा. उत्तर प्रदेश में कुछ होता है तो राष्ट्र में होता है. उत्तर प्रदेश में कुछ नहीं हुआ तो राष्ट्र में कुछ नहीं हुआ.

उन्होंने बोला कि संस्कृत में सूत्र में कहने की अद्भुत क्षमता है. सुप्रीम न्यायालय का ध्येय वाक्य है ‘यतो धर्मो ततो जय:’. यहां लोगों को धर्म की परिभाषा ही नहीं पता है. अब कुछ लोग कह सकते हैं कि सुप्रीम न्यायालय भी अब सेक्युलर नहीं रहा जबकि धर्म का अर्थ ‘रूल ऑफ लॉ’ होता है. उन्होंने बताया कि जल्द ही राष्ट्रपति मेरी पुस्तक ‘चरैवेति चरैवेति’ के संस्कृत अनुवाद का लोकार्पण काशी में करेंगे.

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संस्कृत के विद्वान  विद्यार्थी आगे आएं, हम करेंगे सहयोग

सीएम योगी ने बोला कि दो सालों के संस्कृत संस्थान के पुरस्कार एक साथ साधकों को दिए जा रहे हैं.मुझे आश्चर्य होता है कि संस्कृत की तुलना कुछ बोली या भाषा से करने लगते हैं. आज की भौतिकता के युग मे संस्कृत की पहचान बनी है तो संस्कृत के विद्वानों  श्रुति परंपरा के कारण. लेकिन, संस्कृत की दुर्गति के लिए भी संस्कृत से जुड़े लोग ही जिमेददार हैं.

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मुख्यमंत्री ने बोला कि संस्कृत विद्यालय की मान्यता लोग ले लेते हैं लेकिन न वहां शिक्षक पढ़ाने जाते हैं  न ही विद्यार्थी पढ़ने जाते हैं. इसीलिए प्रतिस्पर्धा में बहुत पीछे छूट जाते हैं. उन्होंने बोलाकि माध्यमिक संस्कृत एजुकेशन परिषद के गठन में 17 साल लग गए. वह भी तब जब मैंने हर महीने मॉनिटरिंग की. हालांकि, अभी भी यह अच्छा से कार्य करेंगे इसमें संशय है.

योगी ने बोला कि मैंने संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष से बोला कि क्या अवकाश के दिनों में हम विद्यालयों में संस्कृत संभाषण के कैम्प नहीं लगा सकते. जब अर्वाचीन  प्राचीन मिलेगा तब ही विकास होगा.

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यह सम्बोधन  नारेबाजी से नहीं होगा. इसके लिए समाज के समक्ष योग्यता कि कसौटी प्रस्तुत करनी होगी. योग्य विद्वानों को आगे लाना होगा. संस्कृत के विद्वानों  विद्यार्थियों को यह नेतृत्व करना होगा. योगी ने भरोसा दिलाया कि गवर्नमेंट इसमें योगदान करेगी.

आदित्यनाथ ने बोला कि बाकी भाषा इस लोक की है  संस्कृत परलोक की भाषा है. वहां का संवाद संस्कृत में ही होगा. जहां विज्ञान की सीमा खत्म होती है वहां आध्यात्म शुरू होता है.

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संस्कृत के विद्वान अपने बच्चों को कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाते हैं. जब आप भी अपने बच्चे को संस्कृत नहीं पढ़ाएंगे तो दूसरे से कैसे अपेक्षा करेंगे. अपने अंदर की हीन भावना को छोड़ना होगा. हमने पिछले 150-200 सालों से कुछ नया सोचना  करना बंद कर दिया है.

योगी ने बोला कि जो यूरोप करता है, हम उसे अपने माथे पर बांध लेते हैं. आखिर वह बासी ज्ञान ही तो बांट रहे हैं. हम बृहस्पति का विमानन शास्त्र क्यों भूल गए? आधुनिक वैज्ञानिकों के साथ बैठ कर क्यों नहीं इस पर चर्चा करते हैं. हम शुश्रुत को क्यों भूल गए.

उन्होंने बोला कि गणेश  दक्ष की कथा बताती है कि हमारी शल्य चिकित्सा कितनी आगे थी. आज भी हम ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए ब्लड ग्रुप मिलाते हैं जबकि तब जानवरों के सिर जोड़ दिए गए थे.चाइना आज इस पर शोध कर रहा है.

मुख्यमंत्री ने बोला कि हमारी योजना है कि प्रदेश के सभी विद्यालयों में चाहे वह किसी बोर्ड या माध्यम का हो वहां सामान्य संस्कृत संभाषण हो सके, ऐसा माहौल बनाइए. उन्होंने बोला कि संस्कृत मां है, इसकी तुलना बहु या बेटे से नहीं हो सकती. इसलिए इसे विश्वभाषा की माता का गौरव दिलाइए. आप संवर्धन के लिए आगे आइये, हम सरंक्षण में पूरा योगदान देंगे.

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