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औपचारिक क्षेत्र में रोजगार की कमजोर स्थिति

डॉ. हनुमंत यादव

भारत सरीखे विकासशील अर्थव्यवस्था वाले देशों में आर्थिक विकास के मापन के दो प्रमुख मानदंड अपनाए जाते हैं| पहला पूंजी निवेश से उत्पादन में कितनी वृद्धि हुई तथा दूसरा पूंजी निवेश से रोजगार सृजन में कितनी वृद्धि हुई| अर्थव्यवस्था, परियोजना, औद्योगिक उपक्रम में विकास की वर्तमान स्थिति के मापन के लिए दो गणीतीय अनुपातों का प्रयोग किया जाता है| पहला पूंजी-उत्पाद अनुपात तथा दूसरा, पूंजी-रोजगार अनुपात| लेकिन योजना व परियोजना बनाते समय स्थिर पूंजी उत्पाद अनुपात की बजाय वृद्धिशील पूंजी-उत्पाद अनुपात जिसका अंगे्रजी में संक्षिप्त नाम आइकॉर है उसका प्रयोग किया जाता है| वृद्धिशील पूंजी-उत्पाद अनुपात आशय किसी भी अर्थव्यवस्था या परियोजना में वर्तमान स्तर के उत्पादन में एक इकाई उत्पादन वृद्धि के लिए कितनी अतिरिक्त पूंजी  इकाई के निवेश की जरूरत होगी| उसी प्रकार वृद्धिशील पूंजी-रोजगार अनुपात दर्शाता है कि एक व्यक्ति को रोजगार देने के लिए वर्तमान में पूंजी में कितनी अतिरिक्त पूंजी राशि की वृद्धि की जरूरत होगी|

भारत में सत्तर के दशक तक मानक वृद्धिशील पूंजी-रोजगार अनुपात से रोजगार सृजन की योजना बनाने का कार्य आसानी से हो जाता था| किंतु अर्थव्यवस्था में विविधता तथा परियोजनाओं की प्रकृति में विविधता के कारण अलग-अलग कौशल योग्यता की जनशक्ति एवं उनके वेतन या पारिश्रमिक में विविधता के कारण व्यवसाय की प्रकृति के आधार पर पूंजी रोजगार अनुपात में विविधता आने लगी| पिछले दो दशकों से अर्थव्यवस्था को दो प्रमुख क्षेत्रों में वर्गीकरण किया जाने लगा है| पहला औपचारिक क्षेत्र तथा दूसरा अनौपचारिक क्षेत्र| औपचारिक क्षेत्र के व्यवसायों के लिए ही पूंजी-उत्पाद तथा पूंजी-रोजगार अनुपात की आवश्यकता होती है| रोजगार के संबंध में औपचारिक क्षेत्र उसे कहा जाता है  जिसके संबंध में सरकारी प्रलेखों के माध्यम से सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध हो सकती है जबकि अनौपचारिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं कार्यरत व्यक्तियों के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाने के कारण केवल श्रमशक्ति  के बारे में अनुमान लगाए जाते हैं| पिछले 18 सालों से भारत सरकार के राष्ट्रीय नेशनल सेम्पल सर्वे संगठन द्वारा अनौपचारिक क्षेत्र के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है| दरअसल पहले अर्थव्यवस्था का संगठित क्षेत्र एवं असंगठित क्षेत्र में वर्गीकरण किया जाता था| यह वर्गीकरण श्रमशक्ति के संगठत के आधार पर  किया जाता था| जिस क्षेत्र में श्रमिक व कर्मचारी अपने संगठन जैसे कि श्रमिक संघ, या  ट्रेड यूनियन बनाकर संगठित होकर अपनी मांग रख सकते थे तथा सौदेबाजी की शक्ति के माध्यम से मजदूरी व वेतन का निर्धारण करने की क्षमता रखते थे उसको संगठित क्षेत्र में शामिल किया जाता था| सरकारी विभाग, सार्वजनिक उपक्रम, निजी क्षेत्र में कम्पनी या कारपोरेट क्षेत्र के कर्मचारी व श्रमिक संगठित  क्षेत्र के कर्मी कहलाते थे|कृषि, लघु एवं घरेलू उद्योग, कुटीर उद्योग, छोटे व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मी असंठित क्षेत्र में शामिल किए जाते थे| सरकार उनके वेतन, पारिश्रमिक निर्धारण और मजदूरी निर्धारण के लिए समय-समय पर न्यूनतम वेतन या मजदूरी दर का ऐलान करती है| अनेक अर्थशास्त्री  औपचारिक क्षेत्र को संगठित क्षेत्र का पर्यायवाची मानते हैं, क्योंकि संगठित क्षेत्र की भांति औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों को भी प्राविडेंट फंड, बोनस, सामाजिक सुरक्षा, नियमित कार्य के घंटे तथा समय-समय पर वेतन निर्धारण के कारण उच्च वेतन प्राप्त होता है|औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र में कितना कार्यबल है इनकी वास्तविक संख्या में उनके परिभाषा के आधार पर अंतर आ जाता है| एक अनुमान के अनुसार वर्तमान में भारत में लगभग 47 करोड़ कर्मचारी बल है उसमें से मात्र 10 फीसदी अर्थात 470 लाख कर्मी औपचारिक क्षेत्र में हैं| दूसरे जानकार अर्थविदों के अनुसार भारत में 7|5 करोड़ कर्मी औपचारिक क्षेत्र में हैं जिनमें 1|5 करोड़ कार्यबल सरकारी क्षेत्र में हैं| सरकारी कर्मचारियों में सेना के कर्मचारी शामिल नहीं है| अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों की संख्या में भले ही अंतर हो, किंतु इस बात पर सभी एकमत हैं कि अनौपचारिक क्षेत्र के कर्मियों को उनकी योग्यता और अनुभव को देखते हुए उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा, श्रम कल्याण व सामाजिक प्रतिष्ठा आदि नहीं मिल पाती है| अनौपचारिक क्षेत्र में कृषि मजदूर, लघु एवं घरेलू उद्योग, कुटीर उद्योग, छोटे व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत मजदूर, फुटपाथ के व्यवसायी, फेरीवाले, रिक्शाचालक, घरेलू कर्मचारी सभी शामिल हैं| ये केन्द्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा घोषित सामाजिक कल्याण योजनाओं पर आश्रित रहते हैं| इतनी बड़ी संख्या में कार्यबल का अनौपचारिक क्षेत्र में होना देश के आर्थिक-सामाजिक पिछड़ेपन को दर्शाता है| देश को सही मायनों में विकासशील तब तक नहीं माना जाना चाहिए जब तक औपचारिक क्षेत्र में कम से कम दो तिहाई कार्यबल नहीं हो जाता है| उच्च शिक्षा खासकर व्यवसायिक एवं तकनीकी शिक्षा के प्रसार के कारण उच्च व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त युवाओं की संख्या में वृद्धि के कारण औपचारिक क्षेत्र में रोजगार करने के इच्छुक युवाओं की संख्या भी बढ़ रही है| उच्च शिक्षित और हुनरमंद लोग मजबूरी में अनौपचारिक क्षेत्र में रहते हैं| युवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए वर्तमान सरकार की रोजगार नीति भी औपचारिक क्षेत्र में रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की है| केन्द्रीय राज्य वित्तमंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि उसके नोटबंदी और वस्तु एवं सेवाकर जीएसटी लागू करने के प्रयासों से औपचारिक क्षेत्र को बढ़ावा मिला है| सरकार द्वारा हुनरमंद जनशक्ति को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर कौशल विकास तथा कौशल उन्नयन कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं| सवाल उठता है कि इनमें से कितने प्रशिक्षित हुनरमंद युवाओं को औपचारिक क्षेत्र में रोजगार मिल पाएगा| अगस्त 2017 में घोषित विजन 2002 की पहली 3 वर्षीय कार्य योजना 2017-2020 में उच्च शिक्षित युवाओं को उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में औपचारिक उच्चवेतन रोजगार सृजन की बात कही गई है| आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 में भी शिक्षित युवाओं के लिए औपचारिक क्षेत्र में उच्चवेतन रोजगार दिलाने पर जोर दिया गया है| 1 फरवरी को संसद में पेश किए गए केन्द्रीय बजट में 2018-19 में औपचारिक क्षेत्र में युवाओं के लिए 70 लाख रोजगार सृजित करने का ऐलान किया गया है| सरकार की यह घोषणा स्वागत योग्य है| लेकिन अभी तक का अनुभव यह रहा है कि सरकार के द्वारा बजट आबंटन और परियोजनाओं में पूंजी निवेश करने से वृद्धिशील पूंजी-उत्पाद अनुपात को देखते हुए जीडीपी में वृद्धि के लक्ष्य तो प्राप्त हो जाते हैं किंतु उच्च शिक्षित युवाओं को उनकी योग्यता कौशल की अपेक्षानुसार रोजगार दिलाने में वृद्धिशील पूंजी-रोजगार अनुपात का लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाता है| इसका एक मतलब यह भी हुआ कि सरकार का जनशक्ति नियोजन और क्रियान्वयन कमजोर है, जिसके कारण सरकार रोजगार सृजन में पिछड़ती रही है| वर्तमान केन्द्र सरकार का यह अंतिम बजट है, अपेक्षा की जाती है कि अगले लोकसभा चुनावों में अपने संकल्पपत्र का रिपोर्ट कार्ड मतदाताओं को दिखाने एवं अपील करने के लिए सरकार 70 लाख युवाओं को निश्चय ही औपचारिक क्षेत्र में उच्चवेतन रोजगार दिलाने में सफल होगी|

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