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राष्ट्र को गोल्ड मेडल दिलाने वाली मनिका बत्रा ने खोले राज, कहा…

मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रमंडल खेलों में मेरी सफलता के बाद राष्ट्र में बैडमिंटन की तरह टेबल टेनिस के एरिया में भी परिवर्तन आएगा.  इस खेल के बारे में लोग गंभीरता से सोचेंगे. वैसे दूसरे खेलों की तरह यह खेल भी सरल नहीं है. करीब उन्नीस वर्ष पहले, जब मैं चार वर्ष की थी, घरवालों ने मेरे बारे में एक फैसला लिया था. अपनी बड़ी बहन की देखा-देखी मैं भी घर में एक मेज पर ही टेबल टेनिस खेलने की प्रयास करने लगी थी.Image result for राष्ट्र को गोल्ड मेडल दिलाने वाली मनिका बत्रा ने खोले राज,

घरवालों ने मेरी बहन के कोच को मेरे बारे में बताया.  फिर कोच की सलाह पर मेरा दाखिला भी उसी स्कूल में करा दिया गया, जहां मेरी बहन पढ़ती थी. इसकी वजह यही थी कि उस स्कूल में टेबल टेनिस प्रशिक्षण की बेहतर सुविधा मौजूद थी. कुछ इस तरह से खिलाड़ी बनने का मेरा सफर प्रारम्भहुआ था. मेरे पिता पिछले कई बरसों से दिल के मरीज हैं. पहले वह पुरानी दिल्ली में एक दुकान चलाते थे. परिवार को बेहतर तरीके से चलाने में मेरी मां का बड़ा सहयोग है.

जब पढ़ाई  खेल में से एक को चुनना था
जब मैंने खेलना प्रारम्भ किया था, तब मेरी पढ़ाई भी समानांतर तरीके से चल रही थी. मैंने कभी किसी कार्य को चलताऊ तरीके से करना नहीं चाहा. एक वक्त ऐसा आया कि सुबह-शाम प्रैक्टिस के बाद पढ़ाई पर ध्यान दे पाना मेरे लिए कठिन हो गया. मुझे निर्णय लेना था कि मैं किसी एक को ज्यादा तवज्जो दूं. वह निर्णय इतना सरल नहीं था. अंततः मैंने खेल को ही करियर के लिए चुना पूरी तरह से इसी लक्ष्य पर जुट गई, पर साथ में पढ़ाई भी जारी रखी.

मेरे लिए परिवार ने किया है त्याग
जब मैं अपनी कई सहेलियों को मन लगाकर पढ़ते हुए देखती, तब यही लगता कि मैंने खेल के लिए एक बहुत बड़ी वस्तु से समझौता किया है. वैसे तो आज भी टेबल टेनिस हिंदुस्तान में बहुत लोकप्रिय नहीं है, मगर उस वक्त इस खेल को करियर के रूप में चुनना मेरे लिए  बड़ी चुनौती था. आगे मेरे दोनों बड़े भाई-बहन ने खेलना छोड़ दिया, लेकिन उन्होंने मां के साथ मिलकर मेरे खेल की बेहतरी के लिए जो हो सका, वह किया. साथ ही अपने कोच संदीप गुप्ता की मेहनत को मैं कभी नहीं भूल सकती.

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ठुकरा दिया मॉडलिंग का प्रस्ताव
कुछ लोगों ने मेरे सामने मॉडलिंग में हाथ आजमाने का प्रस्ताव रखा. लेकिन मैं तो बहुत पहले से सिर्फ टेबल टेनिस के लिए पसीना बहा रही थी, सो ऐसे किसी प्रस्ताव पर मैंने कभी ध्यान नहीं दिया.मैं जूनियर स्तर से दिल्ली समेत कई प्रतियोगिताओं की सभी कैटेगरी में अच्छा कर रही थी. सैफ खेलों से लेकर अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी मैंने सफलता का स्वाद चख लिया था  मुझे विश्वास था कि आने वाला समय मेरा है.

एकल  युगल, दोनों पसंद हैं
सचिन तेंदुलकर मेरे सर्वकालिक खेल आदर्श हैं, जिन्होंने पूरी संसार में हिंदुस्तान का नाम रोशन किया है. क्रिकेट के अतिरिक्त मुझे लॉन टेनिस भी पसंद है, लेकिन वक्त न मिल पाने की वजह से मैंने बहुत ज्यादा समय से टीवी नहीं देखा है. मैं फिल्हाल पूरी तरह विश्व चैंपियनशिप के साथ एशियाड की तैयारी कर रही हूं, जहां मुझे राष्ट्रमंडल खेलों से कहीं बड़ी चुनौती का सामना करना है.वैसे तो मैं एकल  युगल, दोनों स्पर्धाओं को एकसमान चाव से खेलती हूं, लेकिन मुझे लगता है एकल खेलना ज्यादा मजेदार है.

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