Wednesday , August 22 2018
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जानिए क्यों सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गरीबों के साथ हँसी कर रही केंद्र सरकार

नई दिल्ली: हिंदुस्तान में बढ़ रहे गरीबों के शोषण को लेकर शीर्ष न्यायालय ने केंद्र को आड़े हाथों लिया है, जस्टिस मदन बी लोकूर  जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने नाराजगी के साथ गवर्नमेंट के एडवोकेटसे जानना चाहा, ‘क्या गरीब जनता के प्रति हिंदुस्तान गवर्नमेंट का यही रवैया है ‘ दरअसल, केंद्र गवर्नमेंट ने सुप्रीम न्यायालय को बताया था कि उसने मजदूरों के कल्याण कार्यों की समयसीमा निर्धारित करने एक लिए एक समिति गठित की हैImage result for सुप्रीम कोर्ट

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इस पर न्यायालय ने सवाल किया कि आपने समयसीमा निर्धारित करने के लिए समिति का गठन किया है ? जबकि आप इस काम के लिए 20 से 25 हज़ार करोड़ रु निकाल चुके हैं न्यायालय ने बोला कि क्या हिंदुस्तान गवर्नमेंट गरीबों के प्रति इसी तरह का रवैया रखती है दरअसल, न्यायालय यह जानना चाहती थी कि इतने पैसों का केंद्र गवर्नमेंट ने क्या उपयोग किया न्यायालय ने इसी मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र गवर्नमेंट को जमकर लताड़ा, शीर्ष न्यायालय ने बोला कि “अब बहुत हो चुका, यह गरीबों का शोषण है ”

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अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर शीर्ष न्यायालय ने मजदूरों के कल्याण कार्यों के बारे में जानना चाहा था, लेकिन कोई ठोस जवाब न मिलने के कारण न्यायालय को गहरी निराशा हुई  वो निराशा गवर्नमेंट की दलीलें सुनकर क्रोध में बदल गई जिसके बाद ‘यह दंग करने वाला है क्या यह मजाक है? ये निर्माण मेहनतकश लोग वे लोग हैं जिनके पास कोई एजुकेशन नहीं है, धन नहीं है  भवन निर्माता उनका शोषण करते हैं  हिंदुस्तान गवर्नमेंट कह रही है कि वह कुछ नहीं करेगी ‘ न्यायालय ने श्रम मंत्रालय के सचिव को आदेश दिया कि वह सात मई को सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रह कर बताएं कि उसके आदेशों  इस विषय पर संसद द्वारा बनाए गए दो कानूनों पर अमल के बारे में क्या हो रहा है ?

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