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दाढ़ी मूंछ नहीं आई तो शर्म न करें, तुरंत करें ये उपाय

दाढ़ी मूंछ नहीं आई है तो बिल्कुल भी शर्म न करें  तुरंत ये उपाय अपनाए. नजरअंदाज कर दिया तो जिंदगी बर्बाद हो जाएगी आपकी.Related image

पीजीआई चंडीगढ़ में एंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट की ओर से दो दिवसीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें ओवरी  टेस्टिस से जुड़ी बीमारियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. इस दौरान डॉ रमा वालिया ने बोला कि यदि आठ वर्ष की आयु से पहले किसी लड़की के पीरियड आ जाए या नौ वर्ष के लड़के के दाढ़ी मूंछ आ जाए तो तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए. अनदेखी की तो हाइट छोटी रह जाएगी.

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डॉ अनिल भंसाली कहते हैं कि कुछ मरीजों में हार्मोन की कमी से दाढ़ी नहीं आती है  उनके बच्चे भी नहीं होते हैं. ऐसे करीब 300 मरीज रजिस्टर्ड हैं. इन मरीजों का उपचार किया जा रहा है. लोग सोचते हैं कि इनका उपचार नहीं है, जबकि इन सबका उपचार उपलब्ध है  एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट इनका उपचार करता है. दवाओं  सर्जरी की मदद से इस बीमारी का उपचार संभव है.

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प्लास्टिक से हार्मोन बिगड़ जाते हैं एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के ही डॉ आशु रस्तोगी कहते हैं कि प्लास्टिक की वजह से भी हार्मोन बैलेंस बिगड़ रहा है. प्लास्टिक की प्लेट में चाय या बहुत ज्यादा पीना या फिर खाना खाने से भी हार्मोन बिगड़ता है. दरअसल प्लास्टिक में बिस्फिनॉल ए  पैथालेट्स जैसे केमिकल होते हैं, जो हार्मोन को बनाना बंद कर देते हैं. एंडोक्राइन डिसरप्टर कहते हैं. इस वजह से थायराइड, डायबिटीज  पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी भी प्रभावित होती है.

डॉ रमा वालिया ने बोला कि ऐसी बीमारी होने पर अगर पेरेंट्स बच्चों को 14 वर्ष की आयु के बाद लाते हैं, इस आयु में कुछ नहीं कर सकते. जबकि थोड़ी आयु में ही दवाइयों की मदद से इसे अच्छा किया जा सकता है. इसी तरह से किसी युवती में पीरियड देरी से आ रहे हैं या कुछ  समस्या जैसे कि चेहरे पर बाल का आना. इन्हें भी दवाओं की माध्यम से अच्छा किया जा सकता है.

डॉ रमा वालिया ने बताया कि पीसीओडी(पालीसिस्टिक ओवरी डिजीज), पीसीओडी बीमारी खासतौर पर यंग लड़कियों में आती है. इसमें पीरियड अनियंत्रित हो जाते हैं. चेहरे पर बाल आते हैं. ये बीमारी मोटापे से जुड़ी होती है. ओवेरी में फीमेल हार्मोन के बजाए मेल हार्मोन बनने लगते हैं. ऐसा हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें  उपचार कराएं, अन्यथा मुश्किलें झेलनी पड़ेंगी.

कुछ स्त्रियों का मानना होता है कि उनके पीरियड सही से नहीं आ रहे हैं, इसलिए उनका वजन बढ़ रहा है, जबकि होता है उल्टा. वजन होने के कारण उनके पीरियड नहीं आते. यदि इसे अच्छा नहीं किया गया तो भविष्य में डायबिटीज होने की आसार रहती है  मां बनना भी कठिन होता है. इसकी पहचान होते ही सीधे एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट में पहुंचे  उपचार करवाएं.

डीएसडी (डिस्आर्डर आफ सेक्स डेवलपमेंट), इस बीमारी में पता नहीं चल पाता कि बच्चे का सेक्स क्या है. मतलब जन्म लेने वाला बच्चा लड़का है या लड़की. कई लोग बच्चों की इस बीमारी को छिपा लेते हैं  उपचार नहीं करवाते, जबकि इसका उपचार उपलब्ध है. ऐसे मरीजों का पहले सेक्स पहचानते हैं  फिर देखते हैं कि किस हार्मोन की वजह से उन्हें ये समस्या आई है.

डॉ अनिल भंसाली ने बोला कि दस से 15 फीसदी बीमारियां इससे जुड़ी होती हैं. तीनों ही बीमारियों के बारे में लोगों को पता नहीं है. इससे बीमारी कम होने के बजाए बढ़ती हैं  आगे चलकर स्त्रियों  पुरुषों दोनों को बहुत ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ता है.

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