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शेयर बाजार की सर्वोच्च न्यायालय के प्रति तटस्थता

डॉ.हनुमंत यादव

2018 साल की शुरूआत मुंबई शेयर बाजार के 30 चोटी के शेयरों के संकेतांक सेंसेक्स के दो कीर्तिमानों से हुई| जनवरी 2018 में सेंसेक्स ने पहला कीर्तिमान सेंसेक्स ने 17 जनवरी को 35,000 बिन्दु पार करके स्थापित किया| दूसरा कीर्तिमान 23 जनवरी को 36,000 बिन्दु पार करके किया| कुछ बड़े व्यवसायियों द्वारा बैंकों से करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के मामले उजागर होने तथा कुछ विदेशी घटनाक्रमों के कारण सेंसेक्स दुबारा 36,000 का बिन्दु छू नहीं पाया किन्तु सेंसेक्स 35,000 बिन्दु के आस-पास जमा रहा| पिछले साल 4 मार्च को सेंसेक्स ने 30,000 का बिन्दु पार किया था तथा दो माह बाद उड़घन भरते-भरते 26 मई 2017 को 31,000 बिन्दु पार कर लिया| इस प्रकार सेंसेक्स ने एक साल में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, यह भी सेंसेक्स का 2018 में एक कीर्तिमान है| मुंबई शेयर बाजार के 30 चोटी की 30 कंपनियों के शेयरों की विदेशी एवं घरेलू निवेशकों द्वारा की गई भारी खरीदारी से शेयरों के भाव बढ़  रहे हैं तथा सेंसेक्स छलांगें लगा रहा है| कंपनियों के शेयरों के बाजार भाव बढ़ने के कारण कंपनियों का बाजार पूंजीकरण भी बढ़ रहा है| स्टैंडर्ड एण्ड पुवर द्वारा बीएसई सूचीकृत कम्पनियों का 11 मई 2018 को कुल  बाजार पूंजीकरण 15022 हजार करोड़ रुपए था| बाजार पूंजीकरण में चोटी पर  पिछले माह रिलायंस के स्थान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज पहुंच गई तथा इसका बाजार पूंजीकरण 662 हजार करोड़ रुपए हो गया है| दूसरे स्थान पर 626 हजार करोड़ रुपए के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज है| चोटी की दस कंपनियां सेंसेक्स में सूचीकृत कंपनियां हैं| टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद चोटी की 10 कंपनियों में क्रमशरू  एचएफडीसी बैंक 522 हजार करोड़ रुपए,  आई|टी|सी|  366 हजार करोड़ रुपए, हिन्दुस्तान यूनीलीवर 326 हजार करोड़ रुपए, हाउसिंग डेवलपमेंट  कारपोरेशन लिमिटेड 322 हजार करोड़ रुपए, मारुति सुझुकी 264 हजार करोड़ रुपए, इंफोसिस 257 हजार करोड़ रुपए, कोटक महिन्द्रा 241 हजार करोड़ रुपए तथा ओ.एन.जी.सी. 240 हजार करोड़ रुपए हो गया है| दिवाली के समय स्टेट बैंक आफ इंडिया का बाजार पूंजीकरण 268 हजार करोड़ रुपए था अब यह गिरकर 224 हजार करोड़ रुपए होने से चोटी की पूंजीकरण वाली 10 कंपनियों की बिरादरी से बाहर हो गई है| यह तो सर्वविदित है कि धीरूभाई अंबानी द्वारा स्थापित रिलायंस इंडस्ट्रीज शेयर बाजार की लीडर रही है तथा कुछ सप्ताह पूर्व बाजार पूंजीकरण में चोटी पर थी| लेकिन बहुत कम लोगों को सबसे महंगे शेयर के बारे में जानकारी है| आप सभी के सामान्य ज्ञान में वृद्धि के लिए सबसे महंगे शेयर व अन्य महंगे शेयरों की जानकारी साझा करने जा रहा हूँ | मुंबई शेयर बाजार में सबसे महंगा शेयर 1982 में पंजीकृत कंपनी आइशर मोटर्स का है जिसका 14 मई को बाजार मूल्य 30,865 रुपए था| आइशर मोटर्स भारत में रॉयल इंफील्ड की मोटर साइकल बनाती है, जो अंग्रेजी शासन काल में बुलेट के नाम से जानी जाती थी| टाटा मोटर्स की शेयर कीमत मात्र 325 रुपए है| दूसरे शब्दों में आइशर मोटर्स के शेयर की कीमत टाटा मोटर्स से लगभग 10 गुनी है| आइशर मोटर्स के बाद दूसरा महंगा शेयर मारुति सुझुकी का है जिसका प्रति शेयर भाव 8725 रुपए है| मारुति सुझुकी के शेयर की कीमत आइशर मोटर्स के शेयर की मात्र| 28 प्रतिशत है| अन्य महंगे शेयरों के भाव क्रमश: ये हैं नेस्ले 9500 रुपए, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज 5485 रुपए, बजाज फायनेंसियल सर्विसेज 5340 रुपए, हीरो मोटर्स 3650 रुपए तथा टीसीएस 3425रुपए| पिछले एक माह में सभी समाचार माध्यमों में सर्वोच्च न्यायालय के कालेजियम के सदस्यों का सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाघीश की कथित मनमानी के विरूद्ध  विद्रोह से निर्मित वैधानिक संकट का समाचार माध्यमों में छाया रहा| अगस्त के अंतिम सप्ताह में मुंबई यात्रा के दौरान मेरी कुछ कंपनियों  के मुख्य कार्यकारी से हुई जिनसे अनौपचारिक बातचीत में मैंने पूछा कि डोनाल्ड ट्रम्प और किम जोंग की सिंगापुर में 12 जून को मुलाकात तय होने पर उछलने वाला शेयर बाजार सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाघीश के  विरूद्ध संसद में महाभियोग प्रस्ताव से क्यों लगता है| मुझे बताया गया कि कारपोरेट सेक्टर, निवेशक व शेयर कारोबारी वह बेखबर नहीं है, बल्कि पूरे घटनाक्रम पर उनकी पैनी निगाह है तथा सभी को विश्वास था कि राज्यसभा के सभापति वैंकेया नायडू विधायिका बनाम न्यायपालिका का स्वरूप नहीं लेने देंगे| यदि वैंकेया नायडू इस महाभियोग प्रस्ताव को मानसून सत्र में विचार करने को स्वीकार कर लेते तो सचमुच वैधानिक संकट निर्मित हो जाता तथा उस समय शेयर बाजार की गिरावट के रूप में प्रतिक्रिया व्यक्त होती | मैं अपनी बातचाीत का सारांश यहां पर प्रस्तुत कर रहा हूं|

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वर्तमान स्थिति यह है कि मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर आरेाप लगाने वाले  उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का खलनायक निरूपित कर रहे हैं| दूसरी ओर, दीपक मिश्रा एक गूंगे, बहरे व अंधे के समान दुनिया से बेखबर अपना कार्य किए जा रहे हैं| कांग्रेस पार्टी इस भ्रम में है कि महाभियोग प्रस्ताव संसद में विचार किये जाने पर केवल दीपक मिश्रा पर वे लोग आरोप लगाते जाएंगे| कांग्रेस पार्टी ने जाने-अनजाने पूरे प्रकरण को कांग्रेस बनाम भाजपा बनाने का प्रयास किया है| संसद में बहस में कालेजियम के चार असंतुष्ट भी भाजपा के वाचाल सदस्यों के लपेटे में आ जाएंगे| सर्वोच्च न्यायालय के इन चार जजों पर ऐसे-ऐसे बेतुके आरोप लगेंगे कि उन्होंने सपने में भी कल्पना नहीं की होगी| संसद में लगाए जाने वाले आरोप न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में नहीं आते|

सर्वोच्च अदालत के सीनियर जज अपने ही खिलाफ लगाए जाने वाले अनर्गल आरोपों को सुनते एवं राज्यसभा टीवी एवं अन्य चैनलों पर उसका लाइव प्रसारण भारत के अन्य लोगों के साथ-साथ देखते| संसद में बहस देखने वाले आम व्यक्ति जो न्यायाधीशों को भगवान का दर्जी देते हैं उनका न्यायपालिका से विश्वास उठ जाता| भारतीय शेयर बाजार के देशी व विदेशी निवेशकों एवं व्यवसायियों को सर्वोच्च न्यायालय में होनेवाले घटनाक्रम की पूरी जानकारी है किन्तु यह उनके निवेश निर्णय को प्रभावित नहीं करते| नोट बंदी, जीएसटी, डीजल पेट्रोल की बढ़ती कीमतें, बढ़ती  हिंसक घटनाओं से सार्वजनिक सम्पत्ति की क्षति आदि का निवेशकों के निर्णय तात्कालिक प्रभाव तो पड़ा किंतु वे शेयरों की लिवाली करते रहे जिससे शेयरों के बाजार भाव बढ़ते रहे फलस्वरूप सेंसेक्स एवं निफ्टी मजबूती से आगे बढ़ते रहे| दरअसल निवेशकों की रुचि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में है, उनके राजनीतिक कौशल के नाम पर निवेश घट-बढ़ रहा है| यही मोदी फैक्टर  2018 में सेंसेक्स को 35,500 तथा निफ्टी को 10,800 तक लाने में सफल हुआ है| 2018 में प्रधानमंत्री मोदी के राजनैतिक कौशल का पहला परीक्षण कर्नाटक विधानसभा चुनाव नतीजों से होने जा रहा है| यदि 15 मई को भाजपा बहुमत में आती है तो बाजार में तेजी आ सकती है, भाजपा की हार पर बाजार में गिरावट आ सकती है|

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