Monday , August 20 2018
Loading...

रिम्स में नर्सों की हड़ताल पर मुख्यमंत्री सख्त, कहा…

राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स)में नर्सों की हड़ताल की वजह से मरीजों को भारी कठिनाई करनी पड़ रही है. तनाव की स्थिति को देखते यहां अलावा बल तैनात किया गया है. बाहर से आने वाले मरीजों को यहां से लौटा दिया जा रहा है, जबकि यहां पहले से दाखिल मरीज दूसरी स्थान जाने को मजबूर हैं. इस बीच, मुख्यमंत्रीरघुवर दास ने आज ट्वीट कर बोला है कि रिम्स में अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अपनी बात रखने का हक सबको है, लेकिन कायदे से. मैं हड़ताली कर्मियों से कार्य पर जल्द वापस लौट आने की अपील करता हूं. सेहत मंत्री  मुख्य सचिव को बातचीत कर मामले का जल्द निपटारा करने के आदेश दिए हैं.Related image

Loading...

रिम्स में नर्सों की हड़ताल, तड़पते मरीज की गेट पर मौत, हंगामा
राज्य के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एक मरीज की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों द्वारा जूनियर डाक्टरों और नर्सों के साथ मारपीट किए जाने के विरोध में जूनियर चिकित्सक एवं नर्स एक बार फिर शनिवार को आकस्मित हड़ताल पर चले गए. इस दौरान नर्सों द्वारा रिम्स के दोनों मुख्य गेट बंद कर देने से एक गंभीर मरीज की गेट पर ही तड़प-तड़पकर मौत हो गई. उसकी गंभीर स्थिति देखकर भी नर्सों का दिल नहीं पसीजा. नीरू वर्मा नामक यह 72 वर्षीय मरीज बिहार के लखीसराय का रहने वाला था.

loading...

इधर, रिम्स में शनिवार को ग्यारह मरीजों की मौत हो गई. इसे डॉक्टरों  नर्सों की हड़ताल से जोड़कर देखा जा रहा है. वहीं, ओपीडी समेत विभिन्न वार्डो से 1500 से अधिक मरीजों को वापस लौटना पड़ा. इसमें लगभग 150 मरीज रिम्स में भर्ती थे. जानकारी के अनुसार, रांची के कमड़े (रातू) निवासी गीता देवी एवं उनके पति मणिशंकर प्रसाद 29 मई को रिम्स में भर्ती हुए थे. जहर खाने के कारण उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई थी. मणिशंकर की मौत अगले ही दिन 30 मई को हो गई थी. परिजनों के अनुसार, दो जून को मेडिसिन के डॉ उमेश प्रसाद के वार्ड में भर्ती गीता देवी (48) की भी तबीयत बिगड़ने लगी. परिजनों द्वारा बुलाने पर जूनियर चिकित्सक ड्यूटी पर तैनात नर्सो को मरीज को दवा देने एवं इंजेक्शन लगाने का आदेश देकर वापस लौट गए. प्रातः काल तीन बजे दवा एवं इंजेक्शन देने के लगभग आधा घंटा बाद गीता की भी मौत हो गई. परिजनों ने उपचार से संबंधित कागज मांगा तो नर्सों ने देने से इंकार कर दिया. परिजनों का आरोप था कि गलत उपचार के कारण गीता की मौत हुई.

नर्सों ने आरोप लगाया कि इस पर महिला परिजनों ने उग्र होकर नर्स पर हमला बोल दिया. नर्सों के ड्रेस के पॉकेट फाड़ डाले तथा पिटाई कर दी. कुछ सामान भी छीन लिए. नर्सों ने यह भी आरोप लगाया है कि 20-25 की संख्या में परिजन पहुंचकर दो जूनियर डॉक्टरों की भी पिटाई कर दी. इसके बाद वे हड़ताल पर चले गए. जूनियर डॉक्टरों एवं नर्सो की हड़ताल के बाद रिम्स में सेहत सेवा चरमरा गई. वहीं, करीब तीन घंटे तक रिम्स परिसर की स्थिति तनावपूर्ण बनी रही. नर्स और मृत मरीज के परिजन दोनों गुट आक्रोशित  लड़ने पर उतारू थे. घंटों बाद पुलिस ने दोनों को काबू में किया. इस दौरान रिम्स परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गई. डॉक्टरों और नर्सों ने रिम्स निदेशक के ऑफिस के पास जमा होकर जमकर नारेबाजी भी की. वे राज्य के सेहत मंत्री को तत्काल बुलाकर बातचीत करने की मांग पर अड़े रहे. रिम्स निदेशक डा आरके श्रीवास्तव ने मंत्री के बाहर होने का हवाला देते हुए मोबाइल पर बात कराने की बात कही, जिससे नर्सो ने इंकार कर दिया.

हड़ताल का विरोध करने पर मरीजों से भिड़ीं नर्स
दिन के 11 बजे जोन्हा से एंबुलेंस से मरीज लेकर आए लोगों ने उपचार नहीं होने पर बवाल काटा. वे नर्सो की हड़ताल का विरोध करते हुए उपचार की मांग कर रहे थे. इसपर नर्से आक्रोशित हो गई  वहां उपस्थित लोगों पर लाठियां चटकाने लगीं. इससे वहां अफरा-तफरी की स्थिति हो गई. मेन गेट का शीशा भी टूट गया. लोग इधर-उधर भागने लगे.

ओपीडी में तालाबंदी, मरीज करते रहे उपचार का इंतजार
हड़ताल के कारण प्रातः काल में सीनियर चिकित्सक तो राउंड पर वार्डों में गए, लेकिन मरीजों को नर्सिग सुविधा नहीं मिल पाई. वहीं सभी ओपीडी में कार्य काज ठप रहा. इमरजेंसी में भी देखने वाला कोई नहीं था.

जानें, किसने क्या कहा
मैं अभी गढ़वा में हूं. फोन से नर्सों की हड़ताल की जानकारी मिली है. मैंने रिम्स निदेशक को बोला है कि नर्सो से बातचीत कर अविलंब उन्हें कार्य पर लौटाएं. मैं सोमवार को रांची लौटकर स्वयं उनके साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं के निवारण का कोशिश करूंगा. नर्सो को भी चाहिए कि वे हर बात पर हड़ताल पर न जाएं. उन्हें मरीजों की भी चिंता करनी चाहिए.

-रामचंद्र चंद्रवंशी, मंत्री, स्वास्थ्य, चिकित्सा एजुकेशन एवं परिवार कल्याण विभाग.

अस्पताल में सेहत व्यवस्था कायम रखने के लिए सभी विभागाध्यक्षों की मीटिंग बुलाई गई. उन्हें अपने-अपने वार्ड में मरीजों की देखभाल का जिम्मा दिया गया है.

Loading...
loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *