Tuesday , September 25 2018
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जस्टिस कर्णन ने सरकारी आवास खाली करने से किया इनकार, बोले…

आवासन विभाग ने उनका आवास खाली कराने के लिए बीते महीने न्यायिक विभाग के सचिव को एक लेटर भेजा था. उसके जवाब में न्यायमूर्ति कर्णन ने बोला है कि सुप्रीम न्यायालय के आठ जजों के विरूद्ध उनका निर्णय लागू नहीं होने तक उनसे सरकारी आवास खाली नहीं कराया जा सकता.उनके मुताबिक उक्त फ्लैट उनके आवास  अस्थायी न्यायालय के तौर पर कार्य करता है.

आवासन विभाग ने अपने लेटर में बोला था कि सेवानिवृत्त होने के बावजूद न्यायमूर्ति कर्णन ने अब तक अपना फ्लैट खाली नहीं किया है. सेवारत जजों के लिए तय उक्त फ्लैट को खाली करना महत्वपूर्ण है. इसके कुछ दिनों बाद न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के दफ्तर ने कर्णन को एक लेटरभेज कर उनका ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया था. अब न्यायमूर्ति कर्णन ने आवासन विभाग  रजिस्ट्रार जनरल को भेजे गए अपने जवाब में उक्त बातें कही हैं.

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कर्णन ने बोला है कि सेवानिवृत्ति से पहले आठ फरवरी, 2017 से उनको अदालती कामकाज करने की अनुमति नहीं दी गई थी. इससे नाराज होकर उन्होंने सुप्रीम न्यायालय के आठ जजों को सजा सुनाई थी. उनकी दलील है कि उक्त आदेश का अब तक पालन नहीं हो सका है. ऐसे में फिल्हालअस्थायी न्यायालय के तौर पर कार्य कर रहे उक्त फ्लैट को खाली करना उनके लिए संभव नहीं है.

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ध्यान रहे कि बीते वर्ष मई में न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर समेत आठ जजों को पांच वर्ष की सजा  एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी.

कर्णन ने बोला है कि वे कानून का पालन करने वाले जिम्मेदार नागरिक हैं  मकान मालिक के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे. उन्होंने बोला है कि वे उक्त फ्लैट का किराया देने को तैयार हैं अगर मकान मालिक उसे बेचना चाहे तो वे इसे खरीदने के लिए भी तैयार हैं.

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