Tuesday , September 25 2018
Loading...
Breaking News

क्या भाजपा को 2019 के लिए अलादीन का चिराग मिल गया

प्रेम शर्मा

जी हाॅ यह विचार इसलिए आया कि अभी चंद दिनों पहले उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी की 75 लोकसभा सीटें जीतने का बयान दिया था| इसके उपरान्त मेरठ में भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में भाजपा प्रमुख अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा| महेन्द्र नाथ पाण्डेय का  बयान कि राम मंदिर कभी चुनावी मुद्दा नही रहा इस कायस को जन्म दे गया कि भाजपा को 2019 के लिए कही से अलादीन का चिराग मिल गया तभी तो उसके नेता आम आदमी से सरोकार से हटकर बयान देते हुए हर हार में जीत का दावा कर रहे है| ऐसे में इस बाॅत की शंका होना लाजमी है कि क्या देश में विपक्ष रह ही नही गया है फिर विपक्ष का वोट बैंक अलादीन के माध्यम से भाजपा के खाते में चुनाव से पहले पहुच गया|  अब प्रश्न उठता है कि देश का केन्द्र और राज्य का कर्मचारी पेंशन मुद्दे पर सरकार के खिलाफ है| राज्य स्तर पर कर्मचारियों की तमाम समस्याएं है जिन्हे लेकर वह आए दिन प्रदर्शन कर रहा है| नोट बंदी के बाद बेरोजगार हुए हजारों लोग आज भी परेशान है| जनता के बीच मोदी सरकार के बीते कार्यकाल को लेकर कोई उत्साह नही है| भाजपा के कई सांसद भाजपा से नाराज है| अभी संवर्ण समाज के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को दरकिनार करके एससी एसटी एक्ट में संशोधन करने के बावजूद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बयान और प्रधानमंत्री के फूल पेज साक्षात्कार के बोल अहंकारी से महसूस हो रहे है|  यह अलादीन का चिराग मिलने वाली के नेता के बूते की बाॅत है कि वह साधारण कार्यकर्ता को अगले जन्म में संतुष्ट करने का भरोसा दिला कर बोले कि कार्यकर्ता भी अपनी सारी शिकायतें भूल कर न केवल इसे मान ले बल्कि चुनाव के लिए कमर भी कस ले| कार्यकर्ताओं से यह कहना सरल नहीं कि वे केवल कर्म करते रहें और फल की चिंता न करें| उत्तर प्रदेश के  मेरठ में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की दो दिनी बैठक आमंत्रितों की संख्या, आकार, भव्यता और उद्देश्य सभी प्रकार से मेरठ की यह बैठक उत्तर प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी थी| प्रदेश में सरकार बनने के कुछ ही दिन बाद से भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष पनपने की शिकायतें  इतनी फैली की उनका रूकने के नाम नही है| उनका अधिक रोष इस बात पर था कि भाजपा का मूल कार्यकर्ता थाने चैकी से लेकर जिलाधिकारी और मंत्रियों के दफ्तर तक उपेक्षित है जबकि बाहर से आकर मंत्री, विधायक बने लोग खुद भी पुष्पित पल्लवित हो रहे हैं और उनके लोग भी भरपूर पोषित हैं| यहाॅ तक कि सांसद और विधायक तक इसकी शिकायत कर चुके कि उनकी कोई सुनता नही| अधिकारियों की तैनाती में जातिवाद के आरोप, कानून व्यवस्था की स्थिति और खेतों में घुसे मवेशियों की समस्या से लोग परेशान थे| मेरठ कार्यसमिति में यूं तो कई मुद्दे आए लेकिन  दो दिनों का प्रधान स्वर एक ही था-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिर सत्ता में लाना है और कार्यकर्ता सब भूल कर इसके लिए जुट जाएं| मेरठ कार्यसमिति ऐन वैसी थी जैसी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले झांसी में हुई थी| लेकिन अन्तर इतना था कि तब  भाजपा तत्कालीन राज्य सरकार की विफलताओं पर आक्रामक थी जबकि इस बार उसने विकास का मंत्र जपा है| दौर में प्रदेश अध्यक्ष कुर्सी पर लक्ष्मीकांत वाजपेयी सरीके नेता पानी पी कर प्रदेश के अधिकारियों को खुले मंच से धमकी देते दिखते थे| वही अधिकारी आज योगी सरकार में भाजपा के करीब हो गए और लक्ष्मीकांत वाजपेयी लगभग हाशिये पर नजर आ रहे है| डेढ़ साल चल चुकी अपनी राज्य सरकार के बाद कोई भी पार्टी अपने ही काम गिनाने के लिए बाध्य होती है जबकि अब हमलावर होने की बारी विपक्ष की है| इसीलिए बैठक के दोनों दिन लोकसभा की 74 सीटें जितवाने का वादा कार्यकर्ताओं से लिया गया| भाजपा अपनी चुनावी रणनीति में बूथों पर बहुत जोर देती है, लिहाजा कार्यकर्ताओं को अगले लोकसभा चुनाव में हर बूथ पर 51 प्रतिशत से अधिक वोट पाने का संकल्प दिलाया गया| सपा-बसपा और कांग्रेस के संभावित गठबंधन को भाजपा चाहे कितनी ही गंभीरता से लेती हो, कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रखने के लिए उनसे यही कहा गया कि दूसरे दलों की ऐसी दोस्ती से उन्हें चिंतित नहीं होना चाहिए क्योंकि इन सभी को भाजपा कई बार हरा चुकी है|अब प्रश्न उठता है कि क्या वाकई? क्या भाजपा इतनी ही निश्चिंत है जितना कि वह दिखने का प्रयास कर रही है| ऐसा लगता तो नहीं क्योंकि दोनों ही दिन पार्टी अपने पुराने और कई बार आजमाये हुए एजेंडे को भी धार देती रही| गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कश्मीर में रोज ही आतंकियों के मारे जाने की याद दिलाकर जोश भरा तो यह बताना भी नहीं भूले कि सेना को पाकिस्तान के भीतर तक घुसने की छूट दे दी गई है| इसके बाद रही सही कसर पूरी करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अंतिम दिन तुष्टीकरण के मुद्दे को धार दे दी| उनका ऐलानिया यह कहना पार्टी की भावी लाइन स्पष्ट कर गया कि अगली बार मोदी प्रधानमंत्री बने तो तुष्टीकरण को समाप्त कर दिया जाएगा| वह यह भी कह गए कि दूसरे देशों से आने वाले हिंदू, सिख और जैन शरणार्थियों का भारत में स्वागत है जबकि घुसपैठियों को निकाल बाहर किया जाएगा| ऐसे में अगले लोकसभा चुनाव की इससे साफ तस्वीर भला और क्या होगी ! भाजपा लोकसभा चुनावों के साथ 10 से 11 राज्यों के चुनाव भी कराने की योजना तैयार कर रही है| इसके लिए जहां कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों को कुछ समय के लिए टालना पड़ेगा, वहीं कुछ राज्यों के चुनाव समय से पूर्व कराने पड़ेंगे| जिन राज्यों में यह कवायद हो रही है, उनमें से अधिकांश पार्टी शासित हैं| पार्टी के एक बड़े नेता ने बताया कि अगले साल आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ ही होने हैं|वहीं पार्टी शासित मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की विधानसभा का कार्यकाल अगले साल जनवरी में खत्म हो रहा है| इसके बाद कुछ दिनों के लिए यहां राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया जाएगा, जिससे इनके चुनाव आम चुनावों के साथ कराए जा सकें| भाजपा शासित हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में भी अगले साल चुनाव होने हैं| इन राज्यों में लोकसभा के साथ चुनाव कराना है तो पहले विधानसभा भंग करनी पड़ेगी| भाजपा को इस बाॅत का पूरा अन्दाजा हो रहा है कि भाजपा की स्थिति 2019 में 2014 वाली तो कतई नही है| जहाॅ तक यूपी में ताबड़ तोड निवेश और प्रधानमंत्री के दौरे की बाॅत करे तो पूर्व अन्य दलों की सरकारों में निवेश का लालीपाॅप खुब चलाया गया और परिणाम सामने है| ऐसे में भाजपा का फिलहाल यूपी को लेकर मंथन करना कुछ और संकेत दे रहा है|सोमवार को आए एबीपी-सी वोटर के सर्वे में भाजपा के लिए अच्छी खबर नहीं है| इस ओपिनियन पोल के मुताबिक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथ से सत्ता निकल सकती है| यह भी अनुमान है कि अगले साल लोकसभा चुनाव में तीनों राज्यों में भाजपा वोटरों की पहली पसंद बन जाएगी क्योंकि मोदी की लोकप्रियता बरकरार है| मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में इस साल अंत तक होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आए ओपिनियन पोल में बीजेपी के लिए बुरी खबर आती दिख रही है| एबीपी-सी वोटर सर्वे के अनुसार तीनों राज्यों में बीजेपी के हाथ से सत्ता निकल सकती है| यह अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार के लिए चिंता की बात हो सकती है| सर्वे का साफ संकेत है कि शिवराज सिंह चैहान और रमन सिंह की व्यक्तिगत लोकप्रियता के बावजूद उनकी पार्टी से अब लोगों का मोहभंग हो रहा है| एक और दिलचस्प बात यह सामने आई कि मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और राजस्थान में अशोक गहलोत कांग्रेस सीएम की पहली पसंद हैं| यानि सर्वे के आधार पर कहा जा रहा है कि मध्यप्रदेश की कुल 230 विधानसभ में कांग्रेस के खाते में 117 भाजपा को 106 और अन्य को 7, राजस्थान की 200 सीटों में से कांग्रेस को 130 यानि पूर्ण बहुमत, भाजपा 57 और अन्य 13, छत्तीसगढ़ की 90 में से 54 कांग्रेस,33 भाजपा और 03 अन्य के खाते का संकेत दिया गया है| अब ऐसे में केवल हम मोदी और योगी की ईमानदारी के सामने कार्यकर्ताओं, केन्द्र और राज्य कर्मचारियों की नाराजगी, एससीएसटी एक्ट के संशोधन से नाराज 78 प्रतिशत देश की जनता और बढ़ती बेरोगारी और मंहगाई को तौले तो परिणाम ठीक नही लगते| इसके बावजूद अगर मोदी जी अपने इन्टरव्यू में जीत का डंका पीटे, उनके मंत्री अहंकारी दावे करें तो मजबूरन यही सोचना पड़ेगा कि भाजपा को 2019 के लिए अलादीन का चिराग मिल गया है|

Loading...
loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *