Saturday , October 20 2018
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पीएम फसल बीमा में हुआ दो करोड़ का घोटाला

पीएम फसल बीमा में बड़े स्तर पर घोटाला सामने आया है. डेटा बेस में छेड़छाड़ तथा गलत विवरण अपलोड करके दो करोड़ रुपये से अधिक राशि का दूसरों को भुगतान कर दिया गया है. जबकि, एक हजार पात्र किसान इससे वंचित रह गए. मामला सामने आने के बाद बैंक से वसूली के साथ एफआईआर भी लिखाई गई है.

मामला पंजाब नेशनल बैंक की मांडा  हाटा तथा यूनियन बैंक की कोरांव शाखा का है. पंजाब नेशनल बैंक की दोनों शाखाओं में करीब एक हजार किसानों के डाटा में हेरफेर किया गया है. यहां टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के पास फसली बीमा की जिम्मेदारी है. पीएनबी की मांडा में 764 तथा हाटा शाखा में 1114 किसानों की फसल का बीमा किया गया है. इसके बदले में 25 लाख रुपये से अधिक प्रीमियम का भुगतान भी किया गया है.

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इसके उल्टा कंपनी ने हाटा के 411 तथा मांडा के मात्र 241 किसानों को नुकसान का भुगतान किया.इतना ही नहीं बीमा कराने वाले किसानों के बजाय दूसरों को भुगतान कर दिया गया. इसके विरोध में किसानों ने कलेक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन किया. इसके बाद डीएम ने जांच का आदेश दिया जिसमें घोटाले की बात सामने आई.

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जांच में पता चला कि बैंक शाखा में ही लाभार्थी किसानों का विवरण गलत भरा गया है. उनके डेटा बेस में भी छेड़छाड़ किया गया है. इस पर उप निदेशक कृषि विनोद शर्मा ने दोनों शाखा के तत्कालीन प्रबंधकों रवि रंजन पटेल एवं रुपेश कुमार झा तथा इंश्योरेंस कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधक निलेश गर्ग के विरूद्ध एफआईआर लिखाई है.

उप निदेशक ने बताया कि पीएनबी के अतिरिक्त यूनियन बैंक की कोरांव शाखा में भी इस तरह के मामले सामने आए हैं. जांच की जा रही है. उन्होंने बताया कि केंद्र गवर्नमेंट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है. बैंक के अफसरों को आदेश दिया गया है कि डाटा में सुधार करके पात्र किसानों को क्षतिपूर्ति के सापेक्ष भुगतान किया जाए. अपात्रों को हुए भुगतान की वसूली का भी आदेश दिया गया है.

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