Wednesday , December 12 2018
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अनुप्रिया पटेल ने कहा, अपनी मनमानी के कारण समाप्त हुई मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया

‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देने वाली मोदी गवर्नमेंट आयुष्मान हिंदुस्तान योजना के तहत राष्ट्र के गरीबों को मुफ्त बेहतर सेहत सुविधाएं उपलब्ध करा रही है. अमर उजाला ने आयुष्मान भारत, मेडिकल सीटों और डॉक्टरों की कमी, व्यक्तिगत कॉलेजों की मनमानी  मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को खत्म करने जैसे मुद्दों पर केंद्रीय सेहत और परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल से वार्ता की

एमसीआई को क्यों खत्म किया गया?
एमसीआई की लगातार शिकायतें मिल रही थीं. एमसीआई की मनमर्जी के कारण गवर्नमेंट को इसे खत्म करना पड़ा. उन्होंने मनमानी की हद पार कर दी थी. गरीब का बच्चा ऊंची फीस देकर व्यक्तिगतकॉलेज में नहीं पढ़ सकता. सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें भी कम कर दीं. गरीब आदमी के हित से खिलवाड़ कर रहे थे, खामियाजा तो भुगतना ही था. जस्टिस लोढ़ा कमेटी की रिपोर्ट में भी पाया गया कि एमसीआई के पदाधिकारी मनमानी कर रहे हैं. राष्ट्र डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है  एमसीआई मेडिकल कॉलेजों को बंद करा रही थी. सेहत सेवाओं पर प्रभाव पड़ रहा था. मोदी गवर्नमेंट बड़े फैसलों के लिए जानी जाती है. हमने इस मामले में वही किया.

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अब क्या वैकल्पिक व्यवस्था है?
एनएमसी बिल आ गया है. बोर्ड ऑफ गवर्नर बनाया है. सात लोगों की समिति बनाई है. बोर्ड की पहली मीटिंग हो गई है. अभी एक वर्ष के लिए बोर्ड ही कार्य करेगा. तब तक नयी मेडिकल काउंसिल बनकर तैयार हो जाएगी.

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चार वर्ष बाद भी चिकित्सा एरिया में अच्छे दिन क्यों नहीं आए?
डॉक्टरों की कमी से निपटने के तरीका हो रहे हैं. हम हर तीन जिलों में एक जिला अस्पताल को अपग्रेड करके मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं. सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बना रहे हैं. सेहत सेवाओं का बजट बढ़ाया गया है. जल्द ही आयुष्मान हिंदुस्तान योजना के तहत गरीबों का समुचित उपचार हो सकेगा.

क्या खास है आयुष्मान हिंदुस्तान योजना में?
इसके तहत सभी तरह की बीमारियां कवर होंगी. लाभार्थियों को गोल्ड कार्ड मिलेगा, जिससे उनका इलाज होगा. यह पूरी तरह कैशलेस स्कीम है. अभी तक मंहगे इलाज की वजह से लोग इसका फायदानहीं ले पा रहे थे. अब ऐसा नहीं होगा.

इसमें बेईमानी को कैसे रोकेंगे?
इसके लिए राष्ट्रीय  राज्य स्तर पर सेहत संस्था बनाई गई है. फर्जीवाड़ा रोकने के लिए कई तरीकाकिए गए हैं. केंद्र की यह योजना गेम चेंजर साबित होगी.

कुछ  भी नया कर रहे हैं?
15 वर्ष के अंतराल के बाद राष्ट्रीय सेहत नीति लेकर आए हैं. हमने सेहत को प्राथमिकताओं में रखा है.क्लीनिकल स्टेबलिशमेंट एक्ट लाया गया है. जिस दिन राज्य इसे लागू कर देंगे अपने आप अनुशासन आ जाएगा.

नए एम्स बन रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी कैसे पूरी होगी?
छह नए एम्स में सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारियों को ले रहे हैं. सत्तर वर्ष की आयु वाले प्रोफेसर विशेषज्ञों को मौका देंगे. इसके अतिरिक्त विजिटिंग फैकेल्टी है.

क्या आपको नहीं लगता कि उत्तर प्रदेश के दशा बहुत बेकार हैं? 
हम लोकल अस्पतालों को अपग्रेड कर रहे हैं. रिसर्च का कार्य भी चल रहा है. हर तीन जिलों में एक जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में बदला जाएगा. कम से कम 100 बेड का अस्पताल बनाएंगे.पहले चरण में 58 अस्पताल हैं. दूसरे चरण में 24 नए मेडिकल कॉलेजों की सूची है. छह नए एम्स में 100 एमबीबीएस  60 पीजी सीटस रहेंगे. लगभग आठ हजार सीटें बढ़ गई हैं.

निजी कॉलेजों की मनमानी कैसे रोकी जाएगी?
नीट आ चुका है. फीस को काबू करने के लिए समति भी बना दी है. हमें लगता है कि कार्य को अच्छा से अंजाम तक पहुंचाने के लिए पांच वर्ष  चाहिए.

टीबी का लक्ष्य कैसे प्राप्त करेंगे?
टीबी मुक्त हिंदुस्तान का सपना पीएम नरेंद्र भाई मोदी ने देखा है. पूरी संसार ने अपना लक्ष्य 2030 रखा है. हमने लक्ष्य 2024 कर दिया है. पूरी संसार में टीबी घटने की दर 1.5 फीसदी है, जबकि हिंदुस्तान में 3.3 फीसदी है.

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