Saturday , October 20 2018
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गठिया की समस्या से हैं परेशान तो करें इस चीज का सेवन

नोएडा: घुटने की आर्थराइटिस शारीरिक विकलांगता के प्रमुख कारण के रूप में उभर रही है  इसका आलथी-पालथी मारकर बैठने की इंडियन शैली है, जिस कारण घुटने ज्यादा घिसते हैं  घुटने बदलवाने की नौबत आ जाती है नोएडा स्थित फोर्टिस हॉस्पीटल के आर्थोपेडिक एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट विभाग के निदेशक डॉ अतुल मिश्रा बताते हैं कि हिंदुस्तान में 15 करोड़ से अधिक लोग घुटने की समस्याओं से पीड़ित हैं, जिनमें से 4 करोड़ लोगों को घुटना बदलवाने (टोटल नी रिप्लेसमेंट) की आवश्यकता है

एक रिपोर्ट के अनुसार, हमारे राष्ट्र में हर छह में से एक आदमी आर्थराइटिस से पीड़ित हैआर्थर्राइटिस की समस्या पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में अधिक सामान्य है डॉ मिश्रा ने कहा, “हमारे राष्ट्र में घुटने की आर्थराइटिस का प्रकोप चाइना की तुलना में दोगुना तथा पश्चिमी राष्ट्रों की तुलना में 15 गुना है  इसका कारण यह है कि इंडियन लोगों में जेनेटिक एवं अन्य कारणों से घुटने की आर्थराइटिस से पीड़ित होने का खतरा अधिक होता है ”

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उन्होंने बोला कि घुटने की आर्थराइटिस के लिए हमारी ज़िंदगी शैली भी जिम्मेदार है, जिसके तहत उठने-बैठने में घुटने की जोड़ का अधिक प्रयोग होता है इस कारण बॉडी के अन्य जोड़ों की तुलना में घुटने जल्दी बेकार होते हैं हमारे राष्ट्र में लोग पूजा करने, खाना खाने, खाना बनाने, बैठने आदि के दौरान पालथी मारकर बैठते हैं इसके अतिरिक्त परंपरागत शैली के शौचालयों में घुटने के बल बैठने की आवश्यकता होती है

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जोड़ में दर्द  जकड़न हैं शुरुआती लक्षण
डॉ मिश्रा ने बताया कि बॉडी के किसी भी जोड़ में दर्द  जकड़न  जोड़ों से आवाज आना आर्थराइटिस के शुरुआती लक्षण हैं बाद के चरणों मेंए चलने-फिरने में परेशानी होती है  जोड़ों में विकृतियां भी आ सकती हैं घुटने की आर्थराइटिस के शुरुआती चरण के उपचार के लिएए सुरक्षित एनाल्जेसिक जैसी दवाएं, इंट्रा-आर्टिकुलर इंजेक्शन  फिजियोथेरेपी का उपयोग किया जाता हैविकसित चरणों में, सबसे पास इलाज टोटल नी रिप्लेसमेंट है

घुटने ज्यादा बेकार होने पर चल नहीं पाता मरीज
उन्होंने बोला कि जब घुटने के जोड़ बहुत अधिक बेकार हो जाते हैं  मरीज का चलना-फिरना दुभर हो जाता है, तब घुटने को बदलने की आवश्यकता पड़ती है, जिसे टोटल नी रिप्लेसमेंट बोला जाता है यह एक बहुत ही पास प्रक्रिया है जो आधी सदी से भी अधिक पुरानी है इसकी सफलता दर 95 फीसदी है  इससे रोगियों के ज़िंदगी की गुणवत्ता में आश्चर्यजनक रूप से परिवर्तन आता है

पैर मोड़ कर बैठने से बचें
डॉ मिश्रा ने बोला कि आर्थराइटिस से बचाव के लिए पैर मोड़कर बैठने से बचें, आलथी-पालथी मार कर नहीं बैंठें, इंडियन शौचालयों का उपयोग जहां तक हो सके कम करें तथा लंबे समय तक खड़े होने से बचें घुटने की आर्थराइटिस की आरंभिक अवस्था में घुटने के व्यायाम, साइकल चलाना  तैराकी रोग को बढ़ने से रोकने का सबसे बेहतर उपाय है इसके अतिरिक्त हमें दूध एवं अन्य डेयरी उत्पादों मौसमी फलों  सब्जियों का सेवन करना चाहिए तथा विटामिन डी की कमी से बचने के लिए पर्याप्त समय तक धूप में रहना चाहिए

महिलाओं के घुटने जल्दी होते हैं खराब
उन्होंने बोला कि पुरुषों की तुलना में स्त्रियों के घुटने जल्दी बेकार होते हैं इंडियन स्त्रियों में घुटने की समस्याओं की आरंभ के लिए औसत आयु 50 वर्ष है, जबकि इंडियन पुरुषों में यह 60 वर्ष है स्त्रियों में घुटने की समस्याओं के जल्द प्रारम्भ होने का कारण मोटापा, व्यायाम नहीं करना, धूप में कम रहना बेकार पोषण है डॉ मिश्रा ने बोला कि करीब 90 फीसदी इंडियन स्त्रियों में विटामिन-डी की कमी है, जो बोन मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है बॉडी में विटामिन-डी की कमी सीधे या परोक्ष रूप से घुटने को प्रभावित करती है

हड्डियों को कैल्शियम
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में जंक फूड एवं फास्ट फूड के बढ़ते प्रयोग तथा खान-पान की गलत आदतों के कारण बॉडी की हड्डियों को कैल्शियम एवं महत्वपूर्ण खनिज नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे कम आयु में ही हड्डियों का घनत्व कम होने लगा है हड्डियां घिसने  निर्बल होने लगी हैं गलत खान-पान एवं ज़िंदगी शैली के कारण युवाओं में आर्थराइटिस एवं ओस्टियो आर्थराइटिस की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है आज राष्ट्र में घुटने की आर्थराइटिस से पीडित लगभग 30 फीसदी रोगी 45 से 50 वर्ष के हैं, जबकि 18 से 20 फीसदी रोगी 35 से 45 वर्ष के हैं

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