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भारत में उम्दा रोजगार की कम संभावनाएं

डॉ. हनुमंत यादव

विकसित देशों की रोजगार नीति वहां के रोजगार के इच्छुक युवाओं को गुणवत्ता रोजगार उपलब्ध करवाने पर केन्द्रित होती है| गुणवत्ता रोजगार से आशय उच्च पारिश्रमिक, काम की सुरक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा से परिपूर्ण रोजगार से होती है|  विकसित देशों के आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के अनुसार गुणवत्ता रोजगार में तीन तत्व शामिल रहते हैं, पहला, रोजगार से कामगार की आमदनी उसके आरामदायक ढंग से भरण-पोषण के लिए पर्याप्त होना चाहिए| दूसरा, श्रम बाजार की सुरक्षा अर्थात रोजगार से वंचित होने पर जीवनयापन की सुरक्षा तथा तीसरा, काम करने का वातावरण, जिसके अंतर्गत कार्य की प्रकृति, कार्य अवधि तथा कार्यस्थल के मधुर संबंध शामिल होते हैं| हर एक रोजगार का इच्छुक व्यक्ति लाभप्रद रोजगार चाहता है| लाभप्रद रोजगार से आशय श्रम उत्पादकता वृद्धि वाले ऐसे कार्य से होती है जिसमें श्रमिक को अधिक आमदनी के साथ गुणवत्तापूर्ण कार्य करने की स्थितियों में काम करता है| गुणवत्तापूर्ण कार्य करने की स्थितियों के अंतर्गत कार्यस्थल पर सुरक्षा, सफाई, स्वस्थ वातावरण तथा काम करने की उत्प्रेरणाएं शामिल होती हैं| जिनेवा स्थित अंतरराष्ट्र्रीय श्रम संगठन आईएलओ का एक कार्य पुरुष और महिलाओं के लिए उम्दा रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है| उम्दा या डीसेंट कार्य से आशय समानता, स्वतंत्रता, सुरक्षा तथा मानव गरिमा कायम रखते हुए उत्पादक कार्य से होता है| यही कारण है कि यह उम्दा कार्य की  अवधारणा विकसित करके 1999 से इस एजेंडे पर निरन्तर कार्य कर रहा है| उम्दा रोजगार श्रमिक की अपेक्षाओं को पूरा करने वाले रोजगार से होता है| उम्दा रोजगार में 7 बातें शामिल की गई हैं| एक, अच्छे जीवनयापन के लिए रोजगार से व्यक्ति की पर्याप्त आमदनी| दो, रोजगार कार्य में प्रत्येक व्यक्ति को विकास के बराबर अवसर| तीन, कार्य करने की सुरक्षित परिस्थितियां| चार, बाल श्रम व बंधुआ या जबरिया श्रम का कोई संभावना नहीं होनी चाहिए| पांच, श्रमिकों के साथ भेदभाव रहित व्यवहार| छः, कार्य से संबंधित विषयों पर श्रमिक संघों से सलाह| सात, सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था, खासकर बीमार, कमजोर, अधिक उम्रवाले श्रमिक एवं गर्भवती महिलाओं के लिए व्यवस्था|  इस प्रकार गुणवत्ता रोजगार, लाभप्रद रोजगार एवं उम्दा रोजगार की लगभग एक ही अवधारणा होने के कारण इन्हें पर्यायवाची शब्द माना जा सकता है| आईएलओ द्वारा किसी भी देश में उम्दा रोजगार की स्थिति के नियमित मूल्यंाकन हेतु सात संकेतांक तथा उद्यम में उम्दा रोजगार की स्थिति मूल्यंाकन के लिए 10 संकेतांक प्रयोग किए जाते हैं तथा उसके आधार पर वार्षिक प्रतिवेदन तैयार किए जाते हैं| इस प्रकार उम्दा रोजगार सूचकांक द्वारा विभिन्न देशों की उम्दा रोजगार की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है| संयुक्त राष्ट्र संघ की सामान्य संभा द्वारा 2015 में अनुमोदित 15 वर्षीय धारित विकास लक्ष्यों में उम्दा रोजगार को भी शामिल किया गया है| 2030 तक पूरे किए जाने वाले धारित विकास लक्ष्यों के अंतर्गत उम्दा रोजगार एजेंडा के चार स्तंभरू रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा, काम करने का अधिकार तथा सामाजिक संवाद हैं| धारित विकास लक्ष्य के 2030 एजेंडा में आठवां लक्ष्य पूर्ण एवं उत्पादक रोजगार और उम्दा कार्य के साथ धारित, समावेशी आर्थिक विकास लक्ष्य रखा गया है| भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही यहां की गरीबी और बेरोजगारी दूर करने के लिए रोजगार सृजन के साथ आर्थिक अभिवृद्धि के योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं| आजादी के 60 साल बाद भी गुणवत्ता या लाभप्रद रोजगार की बात तो अलग है रोजगार के इच्छुक युवाओं के लिए सामान्य रोजगार के अवसर भी सृजन नही किए जा सके| इस कारण भारत के 3|5 करोड़ अर्थात 3|52 प्रतिशत युवा बेरोजगार हैं| युवाओं को लाभप्रद रोजगार उपलब्ध करवाने हेतु कौशल विकास नीति बनाए जाने व  2015 में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय तथा  स्किल इंडिया मिशन की स्थापना के बाद बड़े पैमाने पर रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण अभियान चलाए जाने के बावजूद भारत के दो तिहाई श्रमिक को उम्दा या गुणवत्ता रोजगार से वंचित हैं| गुणवत्ता रोजगार का पहला तत्व जीवनयापन हेतु पर्याप्त आमदनी वाला रोजगार, भारत में न्यूनतम मजदूरी कानून के अंतर्गत समय-समय पर निर्धारित की जानेवाली मजदूरी इतनी कम है कि पति, पत्नि व दो बच्चों वाला छोटा परिवार पति की आमदनी से आरामदायक ढंग से जीवनयापन नहीं कर सकता| दूसरे शब्दों में भारत के ये परिवार बहुआयामी गरीबी में जीवनयापन करने को मजबूर हैं| कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को उच्च आय वाला रोजगार तो उपलब्ध हुआ है किंतु अनौपचारिक क्षेत्र के नियोक्ताओं के यहां कार्यरत लोग सामाजिक सुरक्षा एवं श्रम कल्याण सुविधाओं से वंचित हैं| केवल सरकारी संस्थानों एव कारपोरेट सेक्टर के श्रमिकों को ही रोजगार की सामाजिक सुरक्षा एवं श्रम कल्याण सुविधाएं उपलब्ध हैं| कारपोरेट एवं सरकारी उपक्रमों में बड़े ठेकेदारी एवं आउट सोर्सिेग द्वारा करवा रहे हैं| भारत के बड़े उद्योगों में उद्योग के स्वयं के नियमित श्रमिक और संविदा के श्रमिकों का अनुपात 10रू90 है | ये संविदा श्रमिक सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से वंचित रहते हैं|  अंतरराष्ट्रीय श्रमिक महासंघ आईटीयूसी ने श्रमिकों को उम्दा रोजगार से संबधित पांच अधिकारों की उपलब्धता को लेकर विश्व के 191 देशों का ग्लोबल राइट इंडेक्स अर्थात वैश्विक अधिकार सूचकांक तैयार करता है| इस सूचकांक के अनुसार श्रमिक अधिकार अपवंचना के  50 निकृष्ट देशों में जनवादी चीन एवं ब्राजील सहित भारत भी शामिल है|

इस प्रकार भारत के सरकारी कर्मचारियों एवं कारपोरेट उपक्रमों के श्रमिकों के अलावा अन्य संस्थानों में कार्यरत अधिकांश श्रमिक अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन आईएलओ के उम्दा रोजगार तथा आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ओईसीडी में उपलब्ध गुणवत्ता रोजगार से वंचित हैं| यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि उन्हीं संस्थानों के श्रमिकों को उम्दा रोजगार मिला हुआ है जहां पर उन्हें सौदेबाजी करके मेहनताना निर्धारण एवं सामाजिक सुरक्षा तथा श्रम कल्याण सुविधाएं मिली हुई हैं| जहां पर मजबूत श्रमिक संगठन नहीं हैं वहां के श्रमिक उम्दा रोजगार से वंचित हैं| भारत के सभी नियोक्ता संस्थानों के श्रमिक जब तक मजबूत श्रमिक संगठन गठित करके सौदेबाजी की क्षमता प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक असंगठित  क्षेत्र में उम्दा रोजगार संभावनाएं कमजोर होने के कारण यह श्रमिकों के लिए उम्दा, गुणवत्ता या लाभप्रद रोजगार एक सपना बना रहेगा|

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