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आखिर अरुण जेटली ने जांच एजेसियों से क्‍यों कहा…

नई दिल्ली : के दो शीर्ष अधिकारियों के बीच टकराव सार्वजनिक तौर पर सामने आने के कुछ हफ्तेबाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को जांच एजेंसियों को अपने पेशेवर रुख को कायम रखते हुए चुपचाप अपना कार्य करने के मूलभूत सिद्धांत अपनाने की सलाह दी है उन्होंने यह भी बोला कि कोई भी जांच प्रारम्भ होने पर एजेंसियों को मीडिया के समक्ष अपनी बात रखने के आकर्षण से बचना चाहिए

उन्होंने बोला कि राजस्व आसचूना निदेशालय (डीआरआई) को उच्चस्तर की अखंडता तथा पेशेवर मानकों को बनाये रखना चाहिए  उसे एक पूरी तरह से ‘दक्ष’ संगठन बनने के लिए कार्य करना चाहिए डीआरआई सीमा शुल्क उल्लंघन  तस्करी से जुड़े मामलों में शीर्ष खुफिया  जांच एजेंसी है

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जेटली ने बोला कि यदि आप पुलिस सहित विभिन्न जांच एजेंसियों को देखें, तो डीआरआई को यह श्रेय जाता है कि वह बहुत ज्यादा हद तक विवादों से मुक्त रहा है डीआरआई के 61वें स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कुछ आधारभूत सिद्धान्त तय किए, जिन्हें प्रत्येक एजेंसी को अपनाना चाहिए ताकि उत्कृष्टता के उच्चस्तर को हासिल किया जा सके

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उन्होंने बोला कि डीआरआई ने अपनी दक्षता के मुख्य एरिया पर ध्यान केंद्रित किया है  वह ऐसे एरिया में विशेषज्ञता का विकास कर रही है, जिसमें उसे मुख्य रूप से राष्ट्र को आर्थिक नुकसान राष्ट्रीय सुरक्षा को चोट पहुंचाने पर अंकुश लगाना है

जेटली ने बोला कि इन सिद्धान्तों में जांच एजेंसियों द्वारा बेहद ऊंचा पेशेवर रुख कायम रखना होगा सिर्फ एक उद्देश्य रखना होगा कि क्राइम को पकड़ने के लिए कार्य करना है

उन्होंने बोला कि शुरुआती जांच प्रारम्भ होने पर जांच एजेंसियों को मीडिया के पास भागने के आकर्षण से बचना चाहिए उन्होंने पेशेवर तरीके से सिर्फ जांच प्रक्रिया  प्रमाणों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए

जेटली ने बोला कि किसी भी जांच एजेंसी की वास्तविक इम्तिहान यह होती है कि जांच के बाद जुर्माना या सजा दिलाई जा सके जांच एजेंसी के ऑफिसर को बिना सामने आए चुपचाप अपनी जांच पूरी करनी चाहिए

मंत्री ने बोला कि जितना कम मीडिया टकराव होगा जितनी कम खबरें आएंगी, उतना ही उनके लिए अच्छा होगा जहां तक जांच एजेंसी का सवाल है उनके लिए कोई भी समाचार अच्छी बुरी नहीं होती हैऐसे में शुरुआती जांच की सफलता पर हल्ला करना  बाद में मामला स्थापित नहीं होने पर उनकी प्रतिष्ठा को चोट पहुंचती है

जेटली ने बोला कि जो भी ऑफिसर या निरीक्षक जांच के मामले को हाथ में लेता है उसकी पास छठी इन्द्रीय  पेशेवराना रवैया होना बेहद महत्वपूर्ण है, जिससे वह शुरुआती स्तर पर ही यह तय कर सके कि संबंधित मामले में जांच होनी चाहिए या इसमें जुर्माना अथवा सजा हो सकती है

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