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आप भी बच्चों को पिलाती हैं पैकेट बंद दूध, तो…

नई दिल्ली : अभिनेता इमरान हाशमी की आगामी फिल्म ‘टाइगरस’ राष्ट्र  संसार में नवजातों या कम आयु के बच्चों को पिलाए जाने वाले पैकेटों में बंद दूध से होने वाली मौतों पर से पर्दा उठाती है, जिसने हमारे बाजारों में नवजातों या कम आयु के बच्चों के लिए पौष्टिकता का दावा करने वाली कंपनियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं चिकित्सकों का कहना है कि इस पैकेट में बंद दूध से नवजातों या बच्चों में बड़ी सरलता से ‘डेवलपमेंट डिसऑर्डर’ भी हो सकता है

नारायणा सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल के गैस्ट्रोएंड्रोलॉजिस्ट कंसल्टेंट डॉ लवकेश आनंद ने इस गंभीर मुद्दे पर आईएएनएस को बताया, “नवजात या कम आयु के बच्चों के लिए मिलावटी या पैकेट में बंद दूध बहुत नुकसानदायक है क्योंकि उनका बॉडी प्रीमैच्योर होता है  किसी भी तरह की मिश्रण का उनके हर अंग पर बुरा असर पड़ता है, खासतौर पर किडनी, लीवर  ब्रेन पर उन्हें सरलता से डेवेलपमेंट डिसऑर्डर भी हो सकता है ”

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भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के हालिया अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि हिंदुस्तान में बिकने वाला करीब 10 फीसदी दूध हमारे सेहत के लिए हानिकारक हैइस 10 फीसदी में 40 फीसदी मात्रा पैकेज्ड मिल्क की है जो हमारे हर दिन के भोजन में प्रयोग में आता है

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यह 10 फीसदी कॉन्टैमिनेटेड मिल्क यानी दूषित दूध वह है, जिसकी मात्रा में वृद्धि दिखाने के लिए इसमें यूरिया, वेजिटेबल ऑयल, ग्लूकोज या अमोनियम सल्फेट आदि मिला दिया जाता है जो हमारे सेहत के लिए बहुत ही नुकसानदायक हैं

भारत में बिकने वाले करीब 10 फीसदी मिलवाटी दूध में किन-किन चीजों को मिलाया जाता है?, जिसपर डॉ लवकेश आनंद ने कहा, “मिलावटी दूध में यूरिया, वेजिटेबल ऑयल, ग्लूकोज से लेकर अमोनियम सल्फेट, एंटीबायोटिक्स, कीटनाशक, एफ्लाटॉक्सिन एम 1 तक पाया जाता है ”

वहीं मिलावटी दूध से व्यस्कों  बच्चों को होने वाली परेशानियों पर श्री बालाजी ऐक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के गैस्ट्रोइंटेरोलॉजिस्ट चिकित्सक जी एस लांबा ने कहा, ” मिलावटी या कॉन्टैमिनेटेड दूध से होने वाला नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि कॉन्टैमिनेशन कैसा है अगर दूध में बैक्टीरियल कॉन्टैमिनेशन है तो आपको फूड प्वाइजनिंग, पेट दर्द, डायरिया, इंटेस्टाइन इंफेक्शन, टाइफाइड, उल्टी, लूज मोशन जैसे इंफेक्शन होने का भय होता है ”

दूध में मिलाई गई चीजें किस प्रकार से बॉडी के लिए नुकसानदेह है, क्या इससे किसी की मौत संभव है? जिसपर डॉ लवकेश आनंद ने आईएएनएस से कहा, “व्यस्क के बॉडी में मिलावटी दूध का सबसे अधिक प्रभाव किडनी पर पड़ता है हालांकि इसका असर दिमाग पर भी हो सकता है अगर इसका लम्बे समय तक यानी कुछ वर्षों तक सेवन किया जाए तो यह हमारे बॉडी के लिए ‘स्लो डेथ’ जैसा हो सकता है क्योंकि इसका धीरे-धीरे कर ही सही पर लगातार प्रभाव लीवर  किडनी पर होता रहता है, हालांकि इस नुकसान का पता तुरंत नहीं चलता ”

पुष्पावती सिंघानिया हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की कंसल्टेंट पीडियाट्रिक्स चिकित्सक अंजलि जैन ने इस बारे में कहा, “इस तरह के कॉन्टैमिनेटेड दूध में कुछ ऐसी केमिकल की मिश्रण भी होती है जिनसे कार्सियोजेनिक समस्याएं भी हो सकती हैं अगर आप करीब 10 वर्ष तक इस मिल्क प्रोडक्ट को ले रहे हैं तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होने की आसार हो सकती है ”

कौन सा दूध सही है या मिलावटी आम आदमी इसकी जांच कैसे करे?, जिसपर डॉ लवकेश आनंद ने बताया कि आम आदमी द्वारा इसकी जांच करना संभव नहीं है, वह ट्रेड मार्क देखकर ही यह मान सकता है कि इसमें किसी तरह की कोई मिश्रण की गई है या नहीं

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