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दुनिया में सबसे अधिक बहुआयामी गरीबी भारत में

डॉ. हनुमंत यादव

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यूएनडीपी तथा ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल द्वारा तैयार वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक, 2018 रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में विव के विकासशील 105 देशों में 134 करोड़ लोग गरीबी की स्थिति में जीवन बसर कर रहे हैं, जो विव की कुल आबादी का 23 प्रतिशत है| भारत के लिए चिन्ताजनक बात यह है कि भारत के 36 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी में जीवनयापन करने को मजबूर हैं, जो भारत की कुल जनसंख्या के 28 प्रतिशत है| रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में सबसे अधिक बहुआयामी गरीबी है, इस प्रकार भारत बहुआयामी निर्धनता में पहले स्थान पर है| भारत के बाद दूसरे स्थान पर नाइजीरिया 10 करोड़ लोग, तीसरे स्थान पर इथोपिया 8|6 करोड़ लोग, चैथे स्थान पर पाकिस्तान 8|5 करोड़ लोग तथा पांचवें स्थान पर बांग्लादेश 6|7 करोड़ लोग हैं|  इन पांच देशों के नाम से स्पष्ट है कि उप-सहारा अफ्रीका तथा दक्षिण एशिया के देशों में बहुआयामी गरीबी सर्वाधिक है| बहुआयामी गरीबी की अवधारणा 2010 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यूएनडीपी तथा ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल द्वारा  विकसित की गई थी|  यह माना गया कि सम्मानजनक जीवनयापन हेतु लोगों को रोटी, कपड़ा, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा रिहायशी मकान में सभी आधुनिक  सुविधाओं जरूरी हैं| इन आवश्यक सुविधाओं के अभाव को बहुआयामी गरीबी नाम दिया गया तथा बहुआयामी गरीबी के मापन के लिए वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक विकसित किया गया| यह बहुआयामी सूचकांक धारित सूचकांक है जो आमदनी आधारित सूचियों से परे 10 बहुआयामी कारकों का प्रयोग करता है| शिक्षा, स्वास्थ्य एवं लिविंग स्टेंडर्डस अर्थात रहन-सहन ये तीन  जीवन बहुआयामी गरीबी सूचकांक मापन के तीन घटकों के रू 1| स्वास्थ्य 2| कारक, शिक्षा दो कारक एवं लिविंग स्टेंडर्ड के 5 कारक इस प्रकारे कुल मिलाकर 10 संकेतक हैं| यदि कोई व्यक्ति इन दस संकेतकों में से एक तिहाई या उससे अधिक संकेतकों के आधार पर वंचित श्रेणी में आता है, तो वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक उन्हें बहुआयामी गरीब के रूप में प्रदर्शित करता है| 2018 में मानव विकास के सिंहावलोकन के अंतर्गत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा तैयार किए  गए मानव विकास सूचकांक 2018 एवं वैश्विक बहुआयामी सूचकांक 2018 दोनों प्रतिवेदन 19 दिसम्बर को मुझे प्रेषित किए गए| रिपोर्ट के दूसरे अध्याय में भारत में 2005-06 से 2015-16 के दस वर्षों की अवधि में भारत के सभी राज्यों और जिलों में गरीबी की प्रवृत्ति को दर्शाया गया है|  रिपोर्ट के अनुसार भारत में बहुआयामी गरीबी का प्रतिशत 2005-06 के 55 प्रतिशत से घटकर 2015-16 में 27 प्रतिशत रह गया है, फिर भी चिन्ताजनक स्थिति यह है कि संख्या की दृष्टि से भारत की 36 करोड़ आबादी बहुआयामी गरीबी में जीवनयापन कर रही है| बहुआयामी गरीबी में रहने वाले लोगों की जनसंख्या की दृष्टि से दक्षिण एशिया के तीन देशों भारत, पाकिस्तान और बाग्लादेश की होती है, किन्तु बहुआयामी गरीब लोगों का देश की कुल जनसंख्या के प्रतिशत की दृष्टि से दक्षिण एशियाई देशों में बहुआयामी गरीब जनसंख्या का प्रतिशत 50 से नीचे है| पाकिस्तान में बहुआयामी गरीबी का प्रतिशत 44, बांग्लादेश 41, भूटान 37, नेपाल 35 और भारत 28 प्रतिशत है| दूसरे शब्दों में बहुआयामी गरीबी अनुपात की दृष्टि भारत में गरीबी का प्रतिशत अन्य दक्षिण एशियाई देशों नीचा है|  दूसरी ओर अधिकांश  उप-सहारा देशों में वहां की 75 प्रतिशत जनसंख्या बहुआयामी गरीबी में जीवन बसर कर रही है| इन देशों में सबसे बुरी स्थिति दक्षिण सूडान की है जहां की 93 प्रतिशत जनसंख्या बहुआयामी गरीबी में रहने को मजबूर है| उप-सहारा अफ्रीकी देशों में बहुआयामी गरीबी का प्रतिशत इस प्रकार है- नाइजर 91, चाड 85, इथोपिया 83, सोमालिया 82, सेन्ट्रल अफ्रीका  81 प्रतिशत है| बहुआयामी गरीबी सूचकांक तथा मानव विकास सूचकांक में पूर्ण नकारात्मक संबंध है| जैसे-जैसे बहुआयामी गरीबी सूचकांक का मूल्य घटता जाता है, मानव विकास सूचकांक बढ़ता जाता है| उदाहरण के लिए 0|900 से अधिक अति उच्च मानव सूचकांक वाले 24 देशों जैसे कि नार्वे, स्विट्जरलैंड, आस्ट्रेलिया, आयरलैंड, और जर्मनी, आदि देशों में बहुआयामी गरीबी 1 प्रतिशत से भी कम है| दूसरी ओर  0450 से नीचे मानव विकास सूचकांक वाले देशों में  बहुआयामी गरीबी उच्चतम है| भारत में सबसे अधिक बहुआयामी गरीबी बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश तथा झारखंड में है, भारत के आधे से अधिक बहुआयामी गरीब 19|6 करोड़ लोग इन्हीं चार राज्यों में रहते हैं| इन चार गरीब राज्यों की सीमा आपस में मिली हुई है, इसलिए इस क्षेत्र का नामकरण भारत के गरीबी क्षेत्र किया जा सकता है| इन चार बहुआयामी गरीब राज्यों के बाद असम, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मेघालय, राजस्थान और पश्चिम बंगाल क्रमशरू पांचवें से 10वें क्रम पर हैं| भारत के 640 जिलों में बहुआयामी गरीबी का सबसे अधिक प्रतिशत 76|5  मध्यप्रदेश के अलीराजपुर का है| भारत में केरल, दिल्ली, सिक्किम और गोवा इन चार राज्यों में बहुआयामी गरीबी निम्नतम है| निम्न बहुआयामी गरीबी वाले राज्यों में पंजाब, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर क्रमशरू पांचवें से दसवें स्थान पर हैं| केरल, दिल्ली, सिक्किम और गोवा मानव विकास सूचकांक में उच्चतम स्थान पर हैं तथा बिहार, उत्तरप्रदेश, झारखंड और मध्यप्रदेश मानव विकास सूचकांक में निम्नतम स्थान पर है| संयुक्त राष्ट्र संघ के 10 धारित लक्ष्यों में पहला लक्ष्य 2030 तक दुनिया से सभी प्रकार एवं सभी स्वरूप की गरीबी को समाप्त करना है तथा दूसरा, भुखमरी को समाप्त करना है| सभी देश धारित विकास लक्ष्य कार्यक्रम के हस्ताक्षरकर्ता हैं, इसलिए वे इस ओर प्रयासरत रहेंगे, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के तहत इन देशों को जरूरत के अनुसार सहायता भी दी जायेगी| सभी देशों को अपनी सम्पूर्ण जनसंख्या सम्मानपूर्वक जीवनयापन हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आयास में रिहायशी सुविधाएं उपलब्ध करवाना है, जिससे एक भी नागरिक वंचित नहीं रहे| अब यदि भारत से हर प्रकार की गरीबी समाप्त होती है अपेक्षा की जाती है कि अलीराजपुर सरीखे बहुआयामी गरीब जिलों से भी गरीबी समाप्त हो जायेगी|

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