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मुझे टीवी न्यूज वालो की इस खबर पर विश्वास नही है क्योंकि मोदी जी 5 साल से पीएम है

खालिद रहमान

अमीरी और गरीबी एक साइकिल के 2 पहियों की तरह है इस साइकिल से अगर एक भी पहिया निकाल दिया जाए तो साइकिल नही चल सकती| साइकिल चलाने के लिए दोनों पहिए मजबूत होना चाहिए ये एक उदाहरण है इसे ऐसे आसानी से समझा जा सकता है मसलन देश का अगर प्रत्येक व्यक्ति करोड़ पति हो जाए तो सारी व्यवस्था चरमरा जाएगी जब कोई गरीब नही होगा तो घर के निर्माण में मजदूरी कौन करेगा रिक्शा कौन चलाएगा सब्जी कौन बेचेगा भैस का दूध कौन निकालेगा घर मे जब गैस खत्म होगी तो सिलेंडर कौन लाएगा ट्रक पर सामान लाद कर कौन लाएगा कपड़े कौन सियेगा कपड़े कौन धोएगा सफाई कौन करेगा चाय कौन बनाएगा फल कौन बेचेगा अनाज कौन उगाएगा निर्माण के तमाम कामो में मजदूरी कौन करेगा मतलब ये की गरीबो के सहारे देश मे होने वाले तमाम छोटे काम कौन करेगा जब कोई गरीब ही नही होगा तो सब बराबर होंगे न किसी के घर कोई नौकर होगा न खाना पकाने के लिए कोई नौकरानी मिलेगी क्योंकि छोटा काम हर कोई सिर्फ पेट भरने के लिए नही करता है बल्कि हर गरीब का लक्ष्य होता है कि वो खूब पैसा कमा कर करोड़ पति बने और जैसे वो नौकरी कर रहा है उसी तरह से वो भी नौकर रक्खे मतलब ये की पूरी दुनिया का निजाम इसी तरह से चल रहा है हर व्यक्ति अमीर बनने के लिए मेहनत करता है जिसकी वजह से दुनिया का कोई भी काम रुकता नही है| अमीरी और गरीबी होना व्यवस्था के लिए अत्यंत जरूरी है लेकिन ऐसी गरीबी भी न हो जो गरीब की जिंदगी पर भारी पड़ जाए|  हमे टीवी न्यूज से पता चला कि भारत ऐसा देश है जहाँ सवा सौ करोड़ से ज्यादा लोग बस्ते है जिसमे से राष्ट्रीय स्तर के अमीरों के नाम की लिस्ट तो आसानी से मिल जाएगी मतलब देश मे अरब पतियों की संख्या एक करोड़ के करीब बताई गई करोड़ पति कई करोड़ है मध्यम दर्जे के अमीरों की संख्या भी इस देश मे ठीक ठाक है गरीबो की संख्या भी भारी है लेकिन अत्यंत गरीबो की संख्या करीब डेढ़ करोड़ बताई गई| ये डेढ़ करोड़ लोग ऐसे बताए गए है जिन्हें दिन मे सिर्फ एक वक्त का ही रूखा सूखा भोजन नसीब होता है| देश की व्यवस्था की साइकिल के अमीर गरीब पहिए तो ठीक है लेकिन ऐसी गरीबी जिसमे सिर्फ एक वक्त का ही रूखा सूखा भोजन मिले उसे गरीबी नही हमारे सिस्ट्म की विफलता कहेगे | गरीब अमीर बनने की चाह में मेहनत करना चाहता है लेकिन देश के ये डेढ़ करोड़ लोग कौन है जिनका पेट भी खाली रहता है | कहा जाता है कि इंसान भूख मिटाने के लिए कोई भी काम कर लेता है तो क्या देश मे डेढ़ करोड़ लोगों के पास कोई काम नही है| या तो ये टीवी न्यूज वालो का आंकड़ा गलत है या फिर हमारी सरकार विफल है क्योंकि डेढ़ करोड़ की आबादी बड़ी आबादी है विश्व मे कई ऐसे देश है जिनकी कुल आबादी डेढ़ करोड़ से भी कम है| अभी चुनाव का समय है ऐसे में मौका अच्छा है टीवी न्यूज वालो को चाहिए कि अत्यंत गरीबो का पता जनता की समस्याओं को हल करने का दम भरने वाले सभी राजनीतिक दलों के नेताओ को बता दे ताकि वोट की लालच में ही सही कम से कम उन्हें उन गरीबो के भूखे पेट के दर्शन तो हो जाए| हो सकता है कोई दल अपने चुनावी घोषणा पत्र में इन डेढ़ करोड़ गरीबो के पेट जिन्दगी भर भरने का वादा कर ले और चुनाव जीत कर इनका कुछ भला कर दे| वैसे मुझे अब टीवी न्यूज चैनल वालो पर विश्वास कम ही है हो सकता है भई ये खबर सही हो वैसे मुझे नही लगता कि ये खबर सही होगी वरना मोदी जी को पता हो जाता जब वो देश के कोने कोने में शौचालय बनवा सकते है करोड़ो महिलाओ को मुफ्त गैस कनेक्शन दे सकते है करोड़ो लोगो को मुद्रा योजना के तहत लोन दे सकते नदियों की सफाई के लिए हजारो करोड़ दे सकते है बुलेट ट्रेन मेट्रो ट्रेन पर हजारो करोड़ खर्च कर सकते है देश की सुरक्षा के लिए इतने महंगे राफेल जहाज खरीद सकते है दुनिया भर के देशों से रिश्ते मजबूत करने के लिए हजारो करोड़ रुपये अपनी विदेश यात्राओं पर खर्च कर सकते है अरे ये सब तो छोड़िए सम्पन्न लोगों से गैस सब्सिडी छोड़ने के संदेश के लिए हजारो करोड़ विज्ञापनों पर खर्च कर सकते है तो उनके लिए डेढ़ करोड़ भूखे गरीबो के पेट भरने की व्यवस्था करना कोई बड़ी बात नही है |

टीवी न्यूज वाले भय्या कहा है ये डेढ़ करोड़ गरीब जो एक वक्त रूखा सूखा खाते है जरा ब्रेकिंग व्रेकिंग कीजिए हम तो कह रहे है पूरे चुनाव भर इसी मुद्दे पर डिबेट करवाते रहिए आप लोग तो डिबेट करवाते रहते है इस मुद्दे को भी जरा उठा दीजिए वैसे मुझे लगता नही है कि चैकीदार मोदी जी के राज में देश मे इतने ज्यादा गरीब देशवासी होंगे| भई मुझे तो इस खबर पर तनिक भी भरोसा नही है क्योंकि पिछले पांच साल से हमारे मोदी साहब प्रधानमंत्री है|

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