Thursday , May 23 2019
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विदेशों से धन बरसाते भारतीय

डॉ. जयंतीलाल भंडारी

इसी हफ्ते जारी विश्व बैंक की माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ रिपोर्ट से यह सुखद तथ्य सामने आया कि विदेश से अपने देश में धन भेजने के मामले में भारतीय प्रवासी एक बार फिर सबसे आगे रहे हैं| वर्ष 2018 में प्रवासी भारतीयों ने 79 अरब डॉलर (करीब 5.5 लाख करोड़ रुपए) की राशि स्वदेश भेजी| भारत के बाद चीन का नंबर आता है, जहां के प्रवासियों द्वारा 67 अरब डॉलर भेजे गए| रिपोर्ट बताती है कि पिछले तीन वर्ष में विदेश से भारत को भेजे गए धन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है| यह दर्शाता है कि प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों और यहां रह रहे अपने परिजनों से कितना लगाव है| यहां पर यह बात भी महत्वपूर्ण है कि प्रवासियों द्वारा भारत भेजी गई 40 फीसदी धनराशि ग्रामीण क्षेत्रों में भेजी गई, जिसका एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य सेवा, बेहतर शिक्षा और जीवन-स्तर सुधारने में खर्च किया गया| यहां इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि पिछले वर्ष जब भारतीय अर्थव्यवस्था प्रतिकूल परिस्थितियों से गुजर रही थी तथा अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव और यूरोप में मंदी के कारण दुनिया के विभिन्न् देशों में विकास दर कम रही तथा कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भी विभिन्न् देशों की मुश्किलें बढ़ीं, ऐसी आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारतीय प्रवासियों ने विदेशी मुद्रा को बढ़-चढ़कर स्वदेश भेजना जारी रखा, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा कोष भी बढ़ा| इस तरह प्रवासी भारतीयों ने भारत की आर्थिक मुश्किलों को कुछ हद तक कम करने में भी अपनी भूमिका निभाई|

प्रवासी भारतीयों द्वारा अपनी कमाई को लगातार अधिक मात्रा में स्वदेश भेजने संबंधी विश्व बैंक की नई रिपोर्ट भारत के लिए इसलिए भी सुकूनदायक हैं, क्योंकि वर्ष 2018 में वैश्विक बाजार में लगातार बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों ने भारत के आयात बिल को तेजी से बढ़ा दिया और इसे कच्चे तेल के आयात पर अधिक विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ी| वर्ष 2018 में देश का राजकोषीय घाटा और वित्तीय घाटा भी बढ़ गया है| इस तरह देखा जाए तो प्रवासी भारतीय दुनियाभर में फैली भारत की एक अहम मानवीय पूंजी है| दुनिया के 200 देशों में रह रहे करीब तीन करोड़ से अधिक प्रवासी भारतीय इन देशों में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं| इसमें भी कोई दोमत नहीं कि एक ओर विदेशों में रह रहे भारतीय कारोबारियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और उद्योगपतियों की प्रभावी भूमिका विभिन्न् देशों की अर्थव्यवस्थाओं में सराही जा रही है, वहीं दूसरी ओर कम कुशल व कम शिक्षित प्रवासी कामगार भी खाड़ी देशों सहित कई देशों के विकास में सहभागी बन गए हैं| प्रवासी भारतीय ईमानदार और परिश्रमी हैं तथा प्रत्येक कार्य के प्रति समर्पण का भाव रखते हैं| आईटी, कंप्यूटर, मैनेजमेंट, बैंकिंग, वित्त और कारोबार आदि के क्षेत्र में दुनियाभर में प्रवासी भारतीय अपनी धाक जमा चुके हैं| यह भी कोई छोटी बात नहीं कि जहां अमेरिका, ब्रिटेन एवं ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में बसे प्रवासी भारतीय विभिन्न् चुनौतियों के बीच अधिक परिश्रम करके अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा भारत भेज रहे हैं, वहीं खाड़ी देशों में रह रहे अकुशल और मामूली शिक्षित प्रवासी भारतीय कामगार भी विपरीत परिस्थितियों में काम करते हुए अपने गाढ़े पसीने से कमाई गई विदेशी मुद्रा को भारत भेजकर भारतीय अर्थव्यवस्था को गतिशील करने में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं| उनकी इस भूमिका और भारतीय अर्थव्यवस्था में दिए जा रहे उनके इस परोक्ष योगदान के मद्देनजर यह लाजिमी है कि भारत सरकार भी विदेशों में बसे अपने इन लोगों की समस्याओं पर ध्यान देते हुए उनके निदान की दिशा में प्रयत्न करे| गौरतलब है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बसे तमाम प्रवासी भारतीय बहुत धनी नहीं हैं| अधिकांश देशों में इनकी आर्थिक हालत बहुत अच्छी नहीं है| खासकर खाड़ी देशों में बसे लाखों कुशल-अकुशल भारतीय श्रमिक इस बात से काफी त्रस्त हैं कि वहां पर उन्हें न्यूनतम वेतन और जीवन के लिए मूलभूत सुविधाएं भी सहज नहीं मिल पा रही हैं| विश्वविख्यात एनजीओ कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव ने खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीय कामगारों की मुश्किलों और उनके विपरीत परिस्थितियों में काम करने संबंधी जो रिपोर्ट प्रस्तुत की है, वह बेहद चिंताजनक है| रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 से 2018 के मध्य बहरीन, ओमान, कतर, कुवैत, सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों में औसतन प्रतिदिन 10 भारतीय कामगार प्रतिकूल और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में काम करने के कारण मौत के शिकार हुए| इसी तरह कई विकसित देशों में प्रवासी भारतीयों के लिए वीजा कानूनों में कठोरता के कारण मुश्किलें बढ़ गई हैं| यदि हम चाहते हैं कि प्रवासी भारतीय हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अपनी सहभागिता बढ़ाएं, तो हमें भी उनकी दिक्कतों को समझकर उनकी ओर स्नेह का हाथ बढ़ाना होगा| हमें प्रवासियों से अधिक विदेशी मुद्रा पाने की यदि अपेक्षा है, तो हमारा यह फर्ज भी है कि हम उनकी विभिन्न् समस्याओं के निराकरण की दिशा में गंभीरतापूर्वक प्रयास करें| जिस तरह चीन विदेशों में बसे अपने लोगों के हितों की रक्षा करता है, उसी तरह भारत को भी प्रवासी भारतीयों के हितों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए| हमें प्रवासियों की मुश्किलों से संबंधित आर्थिक-सामाजिक मुद्दे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और संबंधित देशों की सरकारों के समक्ष मजबूती से उठाना चाहिए| विकसित देशों में प्रवासियों की वीजा संबंधी मुश्किलों को कम करने में भी मदद करना होगी| खासतौर से भारत को खाड़ी देशों से बातचीत कर वहां रह रहे भारतीय कामगारों की बेहतरी के लिए तुरंत पहल करनी चाहिए| यहां पर एक और तथ्य गौरतलब है| विदेशों से आ रही कमाई का करीब आधा भाग केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से गए प्रवासी लोगों द्वारा भेजा जाता है| इन प्रदेशों में कामगारों की कुशलता और कौशल प्रशिक्षण पर खास ध्यान दिया जाता है| अब यदि देश के अन्य प्रदेश भी कौशल प्रशिक्षण पर इन्हीं की तरह ध्यान देंगे तो हमारे यहां और भी ज्यादा कुशल कामगार तैयार होंगे, जो विदेशों में जाकर भारतीय मेधा व श्रम का परचम लहराते हुए अधिक कमाई कर सकेंगे| इस दिशा में भी प्रयत्न किए जाएं कि विदेशों में प्रवासियों के लिए रोजगार की प्रक्रियाएं सरल व पारदर्शी बनें, ताकि भारतीय कामगारों को बेईमान बिचैलियों और शोषक रोजगारदाताओं से बचाया जा सके| हम आशा करें कि आने वाले समय में भारत को विकसित देश बनाने में प्रवासियों का योगदान और ज्यादा बढ़ेगा| जिस तरह प्रवासी चीनियों ने दुनिया के कोने-कोने से कमाई हुई अपनी विदेशी मुद्रा चीन में लगाकर उसकी तकदीर बदलने में अहम भूमिका निभाई, उसी प्रकार प्रवासी भारतीयों से भारत की तीव्र तरक्की की प्रक्रिया में और अधिक कारगर सहयोग अपेक्षित है| हमें पूरा भरोसा है कि दुनिया के कोने-कोने में बसे प्रवासी भारतीय अपनी कर्मठता और मेधा के दम पर विदेशों से बड़ी मात्रा में डॉलर, यूरो व अन्य बहुमूल्य विदेशी मुद्राएं अर्जित कर स्वदेश भेजते हुए भारत की बढ़ती विदेशी पूंजी की जरूरत में मदद करते रहेंगे और इसके साथ-साथ दुनिया में भारत का मान भी बढ़ाते रहेंगे|

(लेखक अर्थशास्त्री हैं)

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