Tuesday , April 23 2019
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Shiwangi Singh

राष्ट्रवाद बनाम लोक-लुभावनवाद

कमलेंद्र कंवर कुछ साल पहले तक जब पार्टियों के घोषणा-पत्र जारी होते थे, तो उन पर खास ध्यान नहीं दिया जाता था और उन्हें महज रिकॉर्ड में रखने लायक दस्तावेज समझा जाता था| तब घोषणा-पत्र जारी करना महज एक जरूरी रस्मअदायगी होता था, जिसका कोई खास वजन या अहमियत नहीं ...

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विश्व के अनमोल रत्न हैं दलाई लामा

गोपालकृष्ण गांधी यह लेख मैं प्रार्थनामय भाव से लिख रहा हूं, और चिंतामय भाव से भी| उनकी उम्र (83 साल) में थोड़ी सी भी बीमारी चिंता का कारण बन जाती है| इसलिए प्रार्थना कर रहा हूं- ईश्वर उनको रोग-मुक्त करे, शक्ति-युक्त करे| और उनको, सीधे उन ही को कह रहा ...

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चुनावी चंदे का सवाल

चुनावी बॉण्ड के जरिए चंदे का कानून बनने से हम एक अपारदर्शी व्यवस्था छोड़कर दूसरी अपारदर्शी व्यवस्था के दायरे में आ गए हैं| चुनावी चंदे का सवाल एक बार फिर सतह पर है| सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉण्ड की व्यवस्था खत्म करने को लेकर दी गई याचिका पर सुनवाई करते ...

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विदेशों से धन बरसाते भारतीय

डॉ. जयंतीलाल भंडारी इसी हफ्ते जारी विश्व बैंक की माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ रिपोर्ट से यह सुखद तथ्य सामने आया कि विदेश से अपने देश में धन भेजने के मामले में भारतीय प्रवासी एक बार फिर सबसे आगे रहे हैं| वर्ष 2018 में प्रवासी भारतीयों ने 79 अरब डॉलर (करीब ...

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पहले चरण का मतदान

2019 आम चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान गुरुवार को संपन्न हुआ| पहले चरण में 20 राज्यों की 91 लोकसभा सीटों और चार राज्यों ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, सिक्किम की विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ| पहले चरण में कई दिग्गजों समेत कुल 1279 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे| ...

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नेहरू ने कितना परेशान किया मोदीजी को

राम पुनियानी भाजपा ने हाल में लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया| सरसरी निगाह से देखने पर ही इस दस्तावेज के बारे में दो बातें बहुत स्पष्ट तौर पर उभर कर आतीं हैं| पहली, इसमें इस बात का कोई विवरण नहीं दिया गया है कि पिछले घोषणापत्र में ...

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न्याय का व्यवहारिक पक्ष

प्रो भालचंद्र मुणगेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने 2019 लोक सभा चुनाव के घोषणा पत्र में यह वायदा किया है कि यदि वह चुन कर सत्ता में आती है तो  न्यूनतम आय गारंटीट लागू करेगी, जो 5 करोड़ सबसे गरीब परिवारों के लगभग 25 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचाएगी और ...

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युद्ध और शांति में देश का जीवन

कश्मीर उप्पल हमारे अपने देश के अच्छे समय में किसी दूसरे देश के बुरे समय के बारे में पढ़ी हुई किताब अन्ततः अपने देश के बुरे समय में ही समझ आती है| ऐसे समय में किसी दूसरे देश के लोगों का भोगा हुआ यथार्थ हमारा अपना यथार्थ बन जाता है| ...

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असहमति का हक ही लोकतंत्र की जान है

जीवेश चैबे नागरिक अधिकार व अभिव्यक्ति की आजादी ही एक सभ्य व परिपक्व लोकतंत्र की पहचान होती है| सहमति का विवेक और असहमति का अधिकार ही लोकतंत्र की असली ताकत है| आज कांग्रेस अपने घोषणा पत्र में यदि धारा 124 ए को समाप्त करने व सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (आफस्पा) ...

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जाति के विनाश के बाद ही सामाजिक- आर्थिक आजादी मिलेगी

शेष नारायण सिंह अप्रैल का महीना डॉ. बीआर अंबेडकर के जन्म का महीना है, 14 अप्रैल 1891 के दिन उनका जन्म  हुआ था| इस अवसर पर उनकी राजनीति की बुनियादी समझ को एक बाद फिर से समझने की जरूरत है| जाति की संस्था का विनाश उनकी सोच और दर्शन का ...

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