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लेख विचार

नये साल में विकास की चुनौतियां

मनींद्र नाथ ठाकुर (एसोसिएट प्रोफेसर, जेएनयू) बिहार और झारखंड जैसे राज्यों के सामने आनेवाले साल में क्या चुनौतियां हैं? विडंबना यह है कि प्राकृतिक संपदा और उपजाऊ जमीन के बावजूद ये राज्य भारत के सबसे गरीब राज्यों में आते हैं| कमाल की बात यह है कि यहां के मानव संसाधन ...

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समाधान नहीं, संकट की आशंका

प्रसेनजीत बोस (अर्थशास्त्री) मार्च 2014 यानी वर्तमान केंद्रीय सरकार के सत्ता में आने से पूर्व देश के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की गैर उत्पादक परिसंपत्तियों (एनपीए) का कुल योग 2.6 हजार करोड़ रुपये था| इसमें से 2.4 हजार करोड़ रुपयों के डूबत ऋणों को उदारतापूर्वक माफ किये जाने के बाद भी, ...

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राहुल की वापसी

डॉ. रामकुमार बेहार राहुल की वापसी स्वागतेय है क्योंकि यह भारतीय राजनीति में शुभंकर है, तानाशाही की ओर बढ़ते भाजपा व नरेन्द्र मोदी के लिए खतरे की घंटी है| इस खतरे को 2018 के आमचुनाव वाले राज्य छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, मिजोरम आदि राज्यों के चुनाव परिणाम सिद्ध करेंगे| ऊंट किस ...

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भारत में मौद्रिक नीति से अपेक्षाएं

डॉ. हनुमंत यादव विकासशील देशों की मौद्रिक नीति वहां की राजकोषीय नीति के समान ही उत्पादन को  बढ़ावा देने वाली तथा अर्थव्यवस्था में मजबूती लाने वाली होनी चाहिए जिससे कि प्रति व्यक्ति जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ प्रति व्यक्ति उपभोग में भी वृद्धि हो सके| राजकोषीय नीतिे वित्त मंत्रालय ...

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गर्व करने वाला वर्ग- और दूसरा|||

प्रभाकर चैबे जनता मेट्रो यात्रा पर गर्व करे- और मंत्रीगण, अधिकारी और बड़े लोग क्या करें| वे अपने-अपने  महंगे वाहनों पर गर्व करें| अगर मेट्रो की यात्रा पर गर्व करने की बात है तो प्रधानमंत्री मेट्रो में बैठकर रोज दफ्तर जाएं| उनका पूरा मंत्रिमंडल मेट्रो में सफर करे- अधिकारी मेट्रो ...

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2018 की बंद मुठ्ठी का लेख

राजेंद्र शर्मा जिस कृषि संकट, जिस रोजगार के संकट, जिस चैतरफा आर्थिक संकट और राजनीतिक मोहभंग ने गुजरात में नरेंद्र मोदी के पसीने छुड़ा दिए, 2018 में होने जा रहे त्रिपुरा से लेकर, कर्नाटक से होकर, राजस्थान, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ तक के चुनावों में, उनके लिए कैसी चुनौती पेश ...

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नये साल के पहले दिन में

रविभूषण (वरिष्ठ साहित्यकार) सबसे पहले सभी पाठकों को नये वर्ष की मंगलकामनाएं! आज सुबह-सवेरे से नये वर्ष की शुभकामनाओं और श्हैप्पी न्यू ईयर का जो सिलसिला चल रहा है, वह शायद शाम और रात तक चलेगा| नये साल का पहला दिन अन्य दिनों से इस अर्थ में भिन्न है कि ...

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इतिहास रचने की जल्दबाजी

पुष्परंजन लोकसभा में इतने बड़े मसले पर बहस के वास्ते सिर्फ  तीन घंटे का समय क्यों तय किया? सिर्फ  तीन घंटे में इतिहास रच डाला? तीन घंटे के इस कालखंड में आपने मात्र 22 सांसदों को बोलने दिया| निचले सदन में दो मुस्लिम महिला संसद बंगाल से आती हैं| मालदह ...

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2017: इस वर्ष जो हमसे जुदा हो गये

वर्ष 2017 का आज आखिरी दिन है| कल हम नये वर्ष में प्रवेश कर जायेंगे| लेकिन, इस दौरान अनेक लोग हमारे बीच नहीं रहे| कला, विज्ञान, फिल्म, राजनीति और प्रशासन समेत कई क्षेत्रों के दिग्गज इस वर्ष हमें अलविदा कह गये| उन सभी लोगों के योगदान ने हमारी जिंदगी के ...

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नये साल में बढ़ते प्रदूषण की चुनौती

आशीष वशिष्ठ नये साल की खुशियों के बीच कुछ चिंताएं भी हमारे सामने है| चिंताओं की पोटली में जो चिंता सबसे भारी और भयानक है, वो है बढ़ते प्रदूषण की चिंता| जल, जमीन और हवा में बढ़ता प्रदूषण वर्तमान आबादी और आने वाली नस्लों के सिर पर एक भयानक खतरे ...

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