Zubin Garg Death Case: इंसाफ के लिए पीएम मोदी तक पहुँचा परिवार, मौत की गुत्थी सुलझाने की मांग
Zubin Garg Death Case: असम के गौरव और उत्तर-पूर्व की सांस्कृतिक पहचान कहे जाने वाले दिवंगत गायक जुबीन गर्ग के निधन को लेकर एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में हुए उनके अचानक और रहस्यमयी निधन ने न केवल उनके परिवार को बल्कि करोड़ों प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया था। अब न्याय की गुहार लगाते हुए उनके परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से (Judicial Intervention Request) करते हुए परिवार ने असम में एक विशेष अदालत के गठन और सिंगापुर में उचित राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि इस हाई-प्रोफाइल मामले की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित हो सके।

पत्नी गरिमा गर्ग ने सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द
जुबीन की पत्नी गरिमा गर्ग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस पत्र को साझा किया है, जिसने इंटरनेट पर हलचल पैदा कर दी है। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि जुबीन गर्ग महज एक गायक नहीं थे, बल्कि वे (Cultural Icon of Assam) के रूप में लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़े हुए थे। परिवार ने पीएम को लिखे ज्ञापन में विश्वास जताया है कि भारत सरकार न्याय और विधि के शासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाएगी। गरिमा का कहना है कि जुबीन के लाखों अनुयायी उनकी मृत्यु के कारणों पर पूर्ण स्पष्टता चाहते हैं, क्योंकि उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियां आज भी विवादित बनी हुई हैं।
एसआईटी की जांच और हत्या की धाराओं का जिक्र
जुबीन गर्ग की मृत्यु के बाद असम सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। परिवार द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद एसआईटी प्रमुख के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारी जांच के लिए सिंगापुर भी गए थे। पत्र में खुलासा किया गया है कि लगभग तीन महीने की कड़ी मशक्कत के बाद (Assam Police Chargesheet) दाखिल की गई, जो 2,500 से अधिक पृष्ठों की है। जुटाए गए सबूतों के आधार पर इस मामले में हत्या से संबंधित धाराओं को भी लागू किया गया है, जिसने इस पूरे प्रकरण को और भी ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।
सिंगापुर कोरोनर और मानवाधिकारों का सवाल
गायक के परिवार ने केवल भारत में ही नहीं, बल्कि सिंगापुर के माननीय कोरोनर के समक्ष भी अपनी बात रखी है। मृतक के चाचा ने ईमेल और कोरोनर न्यायालय के माध्यम से जुबीन की मृत्यु से जुड़े सुरक्षा उपायों, आपातकालीन प्रतिक्रियाओं और मानवीय निर्णयों पर तथ्यात्मक स्पष्टता मांगी है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि (Human Rights Compliance) के तहत एक परिवार को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके प्रियजन की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई। परिवार ने साफ किया है कि वे सच की खोज में किसी भी प्रकार की ढिलाई या संकोच नहीं बरत रहे हैं और हर कानूनी रास्ता अपना रहे हैं।
राजनयिक हस्तक्षेप और त्वरित न्याय की उम्मीद
प्रधानमंत्री को भेजे गए इस ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग और कानूनी निकायों के बीच समन्वय को और मजबूत करना है। परिवार ने आग्रह किया है कि (Fast Track Court Formation) के जरिए इस मामले की सुनवाई असम में ही की जाए ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी प्रक्रियाओं में देरी न्याय मिलने में बाधा बन रही है। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार के रुख पर टिकी हैं कि क्या इस सांस्कृतिक महानायक की मौत का रहस्य सुलझ पाएगा।
असमिया संस्कृति की आवाज के लिए इंसाफ की पुकार
जुबीन गर्ग ने अपने संगीत के जरिए न केवल असमिया लोक गीतों को विश्व स्तर पर पहुंचाया, बल्कि बॉलीवुड में भी अपनी गायकी का लोहा मनवाया। उनके अचानक चले जाने से (Assamese Diaspora Worldwide) के बीच जो शून्य पैदा हुआ है, उसे केवल निष्पक्ष जांच और न्याय के जरिए ही भरा जा सकता है। परिवार ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि जुबीन का जाना उत्तर-पूर्व की एक अपूरणीय क्षति है। अब यह पत्र केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि लाखों असमिया लोगों की भावनाओं का प्रतीक बन चुका है जो अपने प्रिय सितारे के लिए इंसाफ मांग रहे हैं।



