अंतर्राष्ट्रीय

Russia Ukraine War: यूक्रेन युद्ध में सैनिकों की कमी से जूझता रूस, कैदियों और प्रवासियों को दे रहा नागरिकता का लालच

Russia Ukraine War: बीते चार वर्षों से जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष अब दोनों ही मुल्कों के लिए न केवल आर्थिक बल्कि मानवीय स्तर पर भी बेहद थकाऊ और विनाशकारी साबित हो रहा है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह चौंकाने वाला दावा किया गया है कि इस भीषण जंग में अब तक करीब 20 लाख लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। युद्ध के मैदान में सैनिकों की घटती संख्या को पूरा करने के लिए अब दोनों देशों ने अलग-अलग रणनीतियां अपनाई हैं। जहां यूक्रेन मुख्य रूप से अपने आम नागरिकों की अनिवार्य भर्ती (मोबिलाइजेशन) पर टिका है, वहीं रूस ने एक नया रास्ता चुना है। क्रेमलिन अब सीधे तौर पर रूसी नागरिकों को युद्ध में झोंकने के बजाय कैदियों, प्रवासियों और विदेशी लड़ाकों के साथ सैन्य अनुबंध करने पर ज्यादा जोर दे रहा है।

Russia Ukraine War: यूक्रेन युद्ध में सैनिकों की कमी से जूझता रूस, कैदियों और प्रवासियों को दे रहा नागरिकता का लालच
Russia Ukraine War: यूक्रेन युद्ध में सैनिकों की कमी से जूझता रूस, कैदियों और प्रवासियों को दे रहा नागरिकता का लालच
WhatsApp Group Join Now

कैदियों के लिए आजादी और प्रवासियों के लिए पासपोर्ट का ऑफर

बीबीसी की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के मोर्चे पर लड़ाकों की संख्या बढ़ाने के लिए रूसी सरकार ने एक अनोखा ‘डिस्काउंट’ मॉडल तैयार किया है। जेलों में बंद कैदियों को प्रस्ताव दिया जा रहा है कि यदि वे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ने का अनुबंध साइन करते हैं, तो उनकी सजा माफ कर उन्हें आजाद कर दिया जाएगा। इसी तरह, बेहतर भविष्य की तलाश में रूस आए विदेशी प्रवासियों को लुभाने के लिए ‘फास्ट ट्रैक’ नागरिकता का चारा डाला जा रहा है। सैन्य सेवा के बदले उन्हें रूस का पासपोर्ट देने का वादा किया जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यह कोशिश इसलिए भी है ताकि आम रूसी परिवारों में युद्ध को लेकर पनप रहे असंतोष को कम किया जा सके। इसी रणनीति के तहत रूस ने उत्तर कोरिया के साथ भी रक्षा समझौता किया है, जिसके जरिए हजारों उत्तर कोरियाई सैनिक युद्ध में शामिल हुए हैं।

मोटा बोनस और आर्थिक सुविधाओं के जरिए भर्ती की होड़

रूस ने अपनी सैन्य शक्ति को बनाए रखने के लिए भारी-भरकम आर्थिक पैकेज का सहारा लिया है। क्रेमलिन का दावा है कि अब तक 4 लाख से ज्यादा लोग स्वेच्छा से सैन्य अनुबंधों से जुड़ चुके हैं। भर्ती को आकर्षक बनाने के लिए क्षेत्रीय सरकारें और युद्ध क्षेत्र का प्रशासन नए सैनिकों को हजारों डॉलर का जॉइनिंग बोनस दे रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, रूस के खांटी मांसी जैसे क्षेत्रों में सेना में शामिल होने पर 50,000 डॉलर तक का बोनस दिया जा रहा है, जो वहां की औसत वार्षिक आय से कहीं ज्यादा है। इसके अलावा, सैनिकों को टैक्स में भारी छूट, पुराने कर्जों से राहत और परिवार के लिए विशेष बीमा जैसे लाभ भी दिए जा रहे हैं।

अनिवार्य सैन्य सेवा और युवाओं पर बढ़ता दबाव

भले ही क्रेमलिन इन भर्तियों को पूरी तरह ‘स्वैच्छिक’ बताता है, लेकिन मानवाधिकार संगठनों और स्वतंत्र मीडिया का कुछ और ही कहना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 से 30 साल के उन युवकों पर, जो अनिवार्य सैन्य सेवा के दायरे में आते हैं, अधिकारियों द्वारा भारी दबाव बनाया जा रहा है। उन्हें डरा-धमका कर सैन्य अनुबंधों पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं ताकि उन्हें सीधे अग्रिम मोर्चे पर भेजा जा सके। जेलों से सैनिकों की भर्ती की शुरुआत पहले प्राइवेट आर्मी वैगनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन ने की थी, लेकिन अब इसे रूसी रक्षा मंत्रालय ने बाकायदा कानूनी जामा पहना दिया है। अब किसी भी आपराधिक मामले के संदिग्ध या दोषी को सेना में शामिल किया जाना कानूनन संभव है।

विदेशी नागरिकों को झांसा और मानव तस्करी का अंतरराष्ट्रीय जाल

रूस की इस भर्ती मुहिम का शिकार भारत, नेपाल और क्यूबा जैसे देशों के नागरिक भी हुए हैं। कई मामलों में प्रवासियों को कंस्ट्रक्शन या सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी का झांसा देकर रूस बुलाया गया और फिर धोखे से उनसे रूसी भाषा में लिखे सैन्य अनुबंधों पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। 2023 में क्यूबा ने एक ऐसे ही मानव तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। वहीं, नेपाल सरकार ने 2024 में अपने नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए रूस और यूक्रेन में काम के लिए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि बड़ी संख्या में नेपाली युवक वहां फंस गए थे। भारत सरकार ने भी कूटनीतिक प्रयासों के जरिए रूसी सेना में जबरन शामिल किए गए अपने कई नागरिकों को सुरक्षित वापस निकाला है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.