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Pakistan Economy: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बड़ा कबूलनामा, कर्ज के लिए दूसरे देशों के सामने झुकने पर जताया दुख

Pakistan Economy: पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और कर्ज के बोझ तले दबे होने की कड़वी सच्चाई अब खुद वहां के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बयां की है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान शरीफ ने बेहद भावुक और बेबाक अंदाज में स्वीकार किया कि देश को दिवालिया होने से बचाने के लिए उन्हें और सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर को विदेशी ताकतों के सामने हाथ फैलाने पड़े। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे एक वीडियो में प्रधानमंत्री ने अपनी उस बेबसी का जिक्र किया, जब उन्हें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से राहत पैकेज हासिल करने के लिए अपनी साख तक दांव पर लगानी पड़ी थी। उनका यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब पाकिस्तान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई नीतियों और भारी-भरकम फीस वाले वैश्विक मंचों पर जगह बनाने की जद्दोजहद कर रहा है।

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Pakistan Economy: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बड़ा कबूलनामा,
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विदेशी दौरों और कर्ज मांगने की शर्मिंदगी का खुलासा

इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने अपनी अंतरात्मा का दर्द जनता के सामने रखा। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति या राष्ट्र कर्ज लेने जाता है, उसे स्वाभिमान के साथ समझौता करना पड़ता है। शरीफ के मुताबिक, उन्होंने और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने कई मित्र देशों के गोपनीय दौरे किए और वहां के नेतृत्व को पाकिस्तान की गंभीर आर्थिक स्थिति से अवगत कराया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जब आप किसी से पैसे मांगते हैं, तो आपका सिर हमेशा झुका रहता है। मैं और सेना प्रमुख चुपचाप कई देशों में गए ताकि किसी तरह कुछ अरब डॉलर का इंतजाम हो सके और आईएमएफ का प्रोग्राम पटरी पर आ सके।”

आईएमएफ प्रमुख के सामने इज्जत की कसम और समझौता

शहबाज शरीफ ने आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीएवा के साथ हुई अपनी अहम मुलाकात का ब्यौरा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि पिछली गलतियों के कारण आईएमएफ पाकिस्तान को नया राहत पैकेज देने के मूड में बिल्कुल नहीं था। प्रधानमंत्री के अनुसार, उन्होंने जॉर्जीएवा से व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया और यहां तक कह दिया कि ‘मैं आपको इज्जत की कसम देता हूं कि हम समझौते की हर शर्त का अक्षरशः पालन करेंगे।’ इस भावनात्मक अपील और शर्तों को पूरी तरह मानने के वादे के बाद ही आईएमएफ की टीम बातचीत के लिए तैयार हुई, जिससे पाकिस्तान को डिफॉल्ट होने की कगार से वापस लाया जा सका।

चीन और खाड़ी देशों से मिली संजीवनी

संकट के समय पाकिस्तान का साथ देने वाले देशों का जिक्र करते हुए शरीफ ने चीन के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चीन ने सबसे कठिन दौर में पाकिस्तान का हाथ थामे रखा। इसके अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर ने भी वित्तीय मदद देकर देश को ढहने से बचाया। हालांकि, शरीफ ने यह भी आगाह किया कि यह मदद मुफ्त नहीं आती; कर्ज देने वाले देशों की अपनी कुछ मांगें और शर्तें होती हैं, जिन्हें न चाहते हुए भी मानना पड़ता है। इससे राष्ट्र की संप्रभुता और मान-सम्मान पर भी असर पड़ता है।

आर्थिक बदहाली और सेना की भूमिका पर सवाल

पाकिस्तान में सरकार और सेना का एक साथ मिलकर विदेशी दौरों पर जाना और कर्ज की गुहार लगाना वहां की बदलती राजनीतिक व्यवस्था की ओर इशारा करता है। फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का प्रधानमंत्री के साथ साए की तरह रहना यह दिखाता है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अब पूरी तरह सैन्य-नागरिक हाइब्रिड मॉडल पर निर्भर हो चुकी है। शहबाज शरीफ ने यह भी माना कि जब तक देश अपने पैरों पर खड़ा नहीं होता, तब तक उसे इसी तरह की अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ेगा। वर्तमान में पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति में मामूली सुधार के दावे जरूर किए जा रहे हैं, लेकिन कर्ज का चक्र अभी भी टूटा नहीं है।

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