Uttarakhand Power Corporation: हल्द्वानी के सरकारी स्कूल में बिजली बिल का अनोखा मामला, 15 हजार के बदले जमा हुए 93 हजार रुपये
Uttarakhand Power Corporation: उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित एक सरकारी स्कूल में बिजली बिल के भुगतान को लेकर एक बेहद अजीबोगरीब मामला प्रकाश में आया है। देवलचौड़ स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय को ऊर्जा विभाग द्वारा जो बिल भेजा गया था, उसकी वास्तविक राशि काफी कम थी, लेकिन भुगतान के वक्त जो आंकड़ा सामने आया उसने सभी को हैरान कर दिया। बिजली बिल और जमा की गई रकम के बीच के इस भारी अंतर ने अब शिक्षा विभाग के गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है। मामला तब और तूल पकड़ गया जब सोशल मीडिया पर शिक्षकों ने इस वित्तीय विसंगति को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

बिल की राशि और भुगतान के बीच का भारी अंतर
पूरा मामला देवलचौड़ के प्राथमिक स्कूल से जुड़ा है, जिसे उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने हाल ही में करीब 15,296 रुपये का बकाया बिजली बिल भेजा था। नियमानुसार स्कूल को इसी राशि का भुगतान करना था, लेकिन जब ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (BRC) की ओर से बिल जमा किया गया, तो यह रकम बढ़कर 93,151 रुपये हो गई। यानी जितनी उधारी थी, उससे करीब छह गुना ज्यादा पैसा विभाग के खाते से कट गया। शिक्षकों का कहना है कि जहां एक ओर कई स्कूलों में फंड की कमी के कारण बिजली और पानी के बिल महीनों से लटके हुए हैं, वहीं एक ही स्कूल के नाम पर इतनी मोटी रकम का भुगतान कर देना समझ से परे है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की सफाई और तकनीकी तर्क
जैसे ही यह विवाद सोशल मीडिया और समाचारों की सुर्खियों में आया, शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने इस पर स्पष्टीकरण देना शुरू कर दिया। विभाग के कुछ अफसरों का तर्क है कि यह किसी एक स्कूल का व्यक्तिगत बिल नहीं था। उनके अनुसार, कई स्कूलों के लंबित बिजली बिलों का एकमुश्त (Bulk) भुगतान किया गया था, जिसे कुछ शिक्षकों ने गलतफहमी के चलते केवल एक स्कूल का बिल समझ लिया और इसे इंटरनेट पर वायरल कर दिया। हालांकि, शिक्षक इस दलील से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं और वे भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
मामले की जांच और जिले के शीर्ष अधिकारियों का रुख
इस वित्तीय गड़बड़ी या तकनीकी खामी की गूंज अब जिला शिक्षा विभाग के मुख्यालय तक पहुंच गई है। नैनीताल के जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक), एचबी चंद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर संज्ञान लिया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि विभाग इस पूरे ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच कर रहा है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या वाकई यह कई स्कूलों का संयुक्त बिल था या फिर सिस्टम की किसी चूक के कारण अतिरिक्त राशि का भुगतान हो गया। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी और यदि कोई गड़बड़ी पाई गई तो उसे दुरुस्त किया जाएगा।
अव्यवस्था और फंड प्रबंधन पर उठ रहे सवाल
इस घटना ने राज्य के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के बिल प्रबंधन पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक तरफ हल्द्वानी के इस स्कूल में ‘ओवर-पेमेंट’ का मामला सामने आया है, तो दूसरी तरफ पहाड़ी क्षेत्रों के कई दूरदराज के स्कूलों से यह शिकायतें आती रहती हैं कि बजट न मिलने के कारण उनके बिजली कनेक्शन कटने की नौबत आ गई है। स्थानीय लोगों और शिक्षाविदों का मानना है कि विभाग को बिल भुगतान की एक सुव्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था बनानी चाहिए ताकि सरकारी धन का सही उपयोग हो सके और अनावश्यक विवादों से बचा जा सके।



