लाइफ स्टाइल

Chanakya Success Mantras: चाणक्य नीति की ये 10 बातें बदल सकती हैं आपका जीवन, कठिन समय में मिलेगी सही राह

Chanakya Success Mantras: जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को छूना जितना सुखद है, उस मुकाम को बनाए रखना उतना ही चुनौतीपूर्ण। अक्सर इंसान के सफर में हार, हताशा और विरोध के स्वर गूंजते हैं। कई बार हम बिना सोचे-समझे ऐसे कदम उठा लेते हैं जो हमें गहरे संकट में डाल देते हैं। इन उलझनों से उबरने के लिए हमारे पूर्वजों और विद्वानों के अनुभव किसी रोशनी से कम नहीं होते। महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने कुछ ऐसी नीतियां साझा की हैं, जो न केवल कामयाबी का मंत्र देती हैं, बल्कि शत्रुओं से निपटने और सही-गलत के बीच के बारीक फर्क को समझने का हुनर भी सिखाती हैं।

Chanakya - Success - Mantras: चाणक्य - नीति - की - ये - बातें - बदल
Chanakya Success Mantras: चाणक्य नीति की ये बातें बदल सकती
WhatsApp Group Join Now

कर्ज, बीमारी और दुश्मनी का समय पर करें अंत

चाणक्य का मानना है कि जीवन में यदि शांति और प्रगति चाहिए, तो तीन चीजों को कभी अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए—ऋण, शत्रु और रोग। यदि आप कर्ज के नीचे दबे हैं, तो वह आपकी रातों की नींद छीन लेगा। इसी प्रकार, शरीर की व्याधि को यदि जड़ से समाप्त न किया जाए, तो वह दोबारा घातक रूप ले सकती है। शत्रु के साथ भी यही नियम लागू होता है। इन तीनों का समय रहते अंत करना ही बुद्धिमानी है, अन्यथा ये भविष्य में बड़े दुखों का कारण बनते हैं।

दुष्ट स्वभाव और कुसंगति का परिणाम है विनाशकारी

आचार्य एक बहुत ही सटीक उदाहरण देते हैं कि जंगल की आग कभी यह नहीं देखती कि सामने चंदन की पवित्र लकड़ी है या साधारण सूखी टहनी; वह सबको जलाकर खाक कर देती है। इसका अर्थ यह है कि एक नीच या गलत प्रवृत्ति का व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकता है। आप उसके साथ चाहे कितने भी उदार रहें, वह अपने स्वभाव के अनुसार नुकसान ही पहुंचाएगा। जैसे आग को सिर पर भी रख लिया जाए, तो उसका काम जलाना ही है, वैसे ही दुष्ट व्यक्ति का सम्मान करना भी जोखिम भरा होता है।

विपत्ति में ही होती है सच्चे मित्र की पहचान

जीवन में दोस्तों की कमी नहीं होती, लेकिन सच्चा मित्र वही है जो आपके सबसे बुरे वक्त में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहे। चाणक्य कहते हैं कि आपातकाल ही वह कसौटी है जिस पर किसी के स्नेह और वफादारी की जांच होती है। इसके अलावा, वह ‘धैर्य’ को सफलता की अनिवार्य शर्त मानते हैं। जिस व्यक्ति के पास धीरज रखने की शक्ति नहीं है, उसका न तो वर्तमान सुरक्षित है और न ही भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।

चापलूसी की भीड़ से बेहतर है कड़वा बोलने वाला हितैषी

समाज में अक्सर हम उन लोगों से घिरे रहना पसंद करते हैं जो हमारी तारीफ करते हैं। लेकिन चाणक्य के अनुसार, सौ चापलूसों के साथ रहने से बेहतर है एक ऐसी गाय का साथ, जो भले ही स्वभाव से थोड़ी कठिन हो लेकिन आपका भला चाहती हो। साथ ही, संतोष के महत्व को समझाते हुए वे कहते हैं कि कल मिलने वाले सुंदर मोर की उम्मीद में आज हाथ में आए कबूतर को नहीं छोड़ना चाहिए। यानी भविष्य के बड़े सुनहरे सपनों के पीछे भागते हुए आज की खुशियों और संतोष का त्याग करना समझदारी नहीं है।

ज्ञान की पूंजी और संकट में बुद्धि का विवेक

किसी भी अभावग्रस्त व्यक्ति के लिए उसकी शिक्षा और जानकारी ही सबसे बड़ा खजाना है। यदि आपके पास धन नहीं है, तो आपकी काबिलियत ही आपको दोबारा समृद्ध बना सकती है। अंत में, आचार्य सबसे महत्वपूर्ण सीख यह देते हैं कि जब चारों ओर से मुसीबतें घेर लें, तो केवल अपनी बुद्धि और विवेक पर ही भरोसा करें। संकट के समय सही निर्णय लेने की क्षमता ही वह एकमात्र जरिया है जो आपको दलदल से बाहर निकाल सकती है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.