अंतर्राष्ट्रीय

KashmirIssue – पाकिस्तान के दावे और कजाकिस्तान के दस्तावेजों में दिखा साफ विरोधाभास

KashmirIssue – पाकिस्तान और कजाकिस्तान के बीच हाल ही में जारी एक संयुक्त घोषणा को लेकर कूटनीतिक हलकों में सवाल खड़े हो गए हैं। पाकिस्तान की ओर से दावा किया गया कि दोनों देशों ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के आधार पर सुलझाने के समर्थन पर सहमति जताई है। हालांकि, कजाकिस्तान की आधिकारिक वेबसाइट और सरकारी समाचार एजेंसी के दस्तावेजों में कश्मीर से जुड़ा कोई भी उल्लेख नहीं मिलता, जिससे इस दावे की प्रामाणिकता पर संदेह गहराता है।

pakistan kazakhstan kashmir claim contradiction

WhatsApp Group Join Now

संयुक्त घोषणा को लेकर अलग-अलग दावे

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जिस संयुक्त घोषणा को सार्वजनिक किया, उसके एक पैराग्राफ में कश्मीर मुद्दे का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इस बयान के अनुसार, दोनों देश संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्तावों के अनुरूप समाधान का समर्थन करते हैं। इसके उलट, कजाकिस्तान सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयानों और प्रेस रिलीज़ में इस विषय का कोई संकेत नहीं दिया गया है। वहां जारी दस्तावेज़ों का फोकस पूरी तरह आर्थिक और तकनीकी सहयोग तक सीमित नजर आता है।

कजाकिस्तान के आधिकारिक रुख में कश्मीर का अभाव

कजाकिस्तान की सरकारी वेबसाइट और उसकी राष्ट्रीय समाचार एजेंसी द्वारा प्रकाशित जानकारी में द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कश्मीर पर किसी चर्चा का जिक्र नहीं है। आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि कजाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई रुख अपनाने से परहेज किया है।

समझौतों का दायरा और सहयोग के क्षेत्र

इस राजनयिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 37 से 60 के बीच विभिन्न समझौतों और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें खनिज उद्योग, भूवैज्ञानिक अनुसंधान, परिवहन नेटवर्क और व्यापारिक संपर्क बढ़ाने जैसे क्षेत्र शामिल रहे। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में संयुक्त तैनाती, कराची और ग्वादर बंदरगाहों तक कजाकिस्तान की पहुंच और ट्रांस-कैस्पियन परिवहन कॉरिडोर पर भी चर्चा हुई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग को लेकर भी बातचीत का उल्लेख किया गया है।

भारत-कजाकिस्तान संबंधों की पृष्ठभूमि

कजाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर संतुलित और तटस्थ रुख अपनाता आया है। भारत के साथ उसके सामरिक, आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत संबंध रहे हैं। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्तावों का कोई औचित्य नहीं है। इसी कारण कजाकिस्तान द्वारा कश्मीर पर किसी प्रकार का समर्थन भारत के साथ उसके संबंधों को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों की राय और कूटनीतिक संकेत

कूटनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि कजाकिस्तान ने वास्तव में पाकिस्तान के दावे के अनुरूप किसी दस्तावेज़ पर सहमति जताई होती, तो इसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य की जाती। कजाकिस्तान की चुप्पी और आधिकारिक रिकॉर्ड में इस मुद्दे की अनुपस्थिति यह संकेत देती है कि यह पाकिस्तान की ओर से किया गया एक कूटनीतिक प्रयास हो सकता है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने पक्ष को मजबूत दिखाना है।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल कजाकिस्तान की सरकार की ओर से इस कथित समर्थन को लेकर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरा मामला पाकिस्तान के दावे और कजाकिस्तान के दस्तावेजों के बीच विरोधाभास तक सीमित नजर आता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस पर टिकी है कि क्या कजाकिस्तान इस विषय पर कोई स्पष्टीकरण जारी करता है या नहीं।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.