बिहार

PappuYadavArrest – 1995 के पुराने मामले में बिहार पुलिस ने पूर्णिया सांसद को हिरासत में लिया

PappuYadavArrest – पटना में बुधवार देर रात उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब बिहार पुलिस ने पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को एक करीब तीन दशक पुराने मामले के सिलसिले में हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए पटना के सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि यह मामला वर्ष 1995 का है, जो उस समय की भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज किया गया था और अब नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत स्थानांतरित कर दिया गया है। पुलिस के अनुसार, यह मामला गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और अदालत में इसकी सुनवाई चल रही थी। तय तारीखों पर पेशी न होने के कारण अदालत ने समन जारी किया था, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई के लिए बाध्य हुई।

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पुराने मामले की कानूनी पृष्ठभूमि

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक इस मामले में धारा 419, 420, 468, 448, 506 और 120बी के तहत आरोप लगाए गए हैं। ये धाराएं धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित हैं। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में लंबित था और हाल के दिनों में अदालत ने इसे लेकर सख्त रुख अपनाया था। सिटी एसपी ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।

हिरासत के दौरान स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान

गिरफ्तारी के तुरंत बाद पप्पू यादव को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उनकी आवश्यक दवाइयों का इंतजाम पहले ही कर दिया गया था और उनके निजी केयरटेकर को भी साथ जाने की अनुमति दी गई। एसपी सिटी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद सांसद को औपचारिक रूप से थाने ले जाया जाएगा, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पुलिस ने यह भी बताया कि इस दौरान उनके अधिकारों का पूरा सम्मान किया जा रहा है।

सांसद ने जताई सुरक्षा को लेकर चिंता

पुलिस कार्रवाई के समय पप्पू यादव अपने पटना स्थित आवास पर मौजूद थे। हिरासत में लिए जाने से पहले उन्होंने मीडिया से बातचीत में अपनी आशंका जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई न्याय के लिए है और वह सीधे अदालत जाना चाहते थे, न कि थाने। उनका आरोप था कि पुलिस सादे कपड़ों में आई, जिससे उन्हें लगा कि कोई अनहोनी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 35 साल पुराने मामले के लिए इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है।

पुलिस का पक्ष और अदालत का आदेश

पुलिस अधिकारियों ने सांसद के दावों को खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई पूरी तरह अदालत के आदेश पर की गई है। सिटी एसपी ने बताया कि समन के बावजूद पेश न होने के कारण गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, जिसके अनुपालन में यह कदम उठाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या जनप्रतिनिधि।

राजनीतिक और कानूनी प्रभाव

इस घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पप्पू यादव लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी को लेकर समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। वहीं कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मामला अदालत में विचाराधीन है तो सांसद को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और तेज होने की संभावना है।

आगे क्या होगा

फिलहाल पप्पू यादव को मेडिकल जांच के बाद थाने में रखा जाएगा और अगले दिन उन्हें अदालत में पेश किया जा सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है और सांसद को जमानत मिलती है या नहीं। इस बीच पुलिस ने कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दशकों पुराने मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को कैसे तेज किया जाए, ताकि न तो अनावश्यक देरी हो और न ही किसी पर दबाव महसूस हो।

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