DiabetesDiet – डायबिटीज मरीजों के लिए रागी डोसा कितना सुरक्षित, डॉक्टर ने दी चेतावनी…
DiabetesDiet – डायबिटीज से जुड़ी डाइट को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की सलाहें आम हैं। इन्हीं में से एक है रागी को “सेफ फूड” मानकर नियमित रूप से खाने की सलाह। खासतौर पर रागी डोसा को डायबिटीज मरीजों के लिए बेहतर विकल्प बताया जाता है। हालांकि, डायबिटीज रिवर्सल से जुड़े विशेषज्ञ डॉक्टर प्रमोद ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में इस धारणा पर सवाल उठाते हुए रागी के कुछ संभावित नुकसान बताए हैं।

रागी को लेकर क्यों बन गई सेफ फूड की छवि
रागी को फाइबर और मिनरल्स से भरपूर माना जाता है, इसी वजह से इसे हेल्दी अनाज की श्रेणी में रखा जाता है। कई लोग मानते हैं कि यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसी सोच के चलते डायबिटीज मरीज रागी से बने डोसा, इडली या मुड्डे को रोज़मर्रा की डाइट में शामिल करने लगे हैं। लेकिन डॉक्टर प्रमोद के अनुसार, रागी का असर उसके सेवन के तरीके पर निर्भर करता है।
रागी डोसा क्यों बन सकता है नुकसानदायक
डॉक्टर प्रमोद ने बताया कि रागी डोसा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 75 के आसपास होता है, जो काफ़ी अधिक माना जाता है। इसी तरह, पारंपरिक रागी मुड्डे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी 65 से 70 के बीच रहता है। यह स्तर कई मामलों में सफेद चावल के बराबर या उससे भी ज्यादा हो सकता है। उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकते हैं, जो डायबिटीज मरीजों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
किस स्थिति में रागी से बचना जरूरी
विशेषज्ञ के अनुसार, डायबिटीज के शुरुआती चरण में जब ब्लड शुगर स्थिर नहीं रहती और बार-बार ऊपर-नीचे होती है, उस समय रागी का सेवन नुकसान पहुंचा सकता है। इस स्टेज पर शरीर का इंसुलिन रिस्पॉन्स पहले से ही कमजोर होता है। ऐसे में रागी जैसे हाई जीआई फूड्स शुगर लेवल को और बिगाड़ सकते हैं।
कब सीमित मात्रा में रागी लिया जा सकता है
डॉक्टर प्रमोद का कहना है कि जब किसी डायबिटीज मरीज का ब्लड शुगर लंबे समय तक नियंत्रित रहे और शरीर को मसल्स बिल्डिंग की जरूरत हो, तब रागी को सीमित मात्रा में शामिल किया जा सकता है। यह स्थिति आमतौर पर उन लोगों में होती है जिनका मेटाबॉलिक कंट्रोल बेहतर हो और जो नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करते हों।
शुरुआती डायबिटीज में दिख सकते हैं साइड इफेक्ट
पॉडकास्ट में डॉक्टर प्रमोद ने यह भी बताया कि डायबिटीज के अनस्टेबल फेज में रागी खाने से कुछ मरीजों में न्यूरोपैथी से जुड़ी शिकायतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, किडनी से संबंधित समस्याओं का जोखिम भी देखा गया है। हालांकि, हर मरीज में इसके लक्षण समान नहीं होते।
हर शरीर पर एक जैसा असर नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ लोगों में रागी खाने के बाद ब्लड शुगर तुरंत नहीं बढ़ती, क्योंकि उस समय शरीर अधिक इंसुलिन स्राव कर पाता है। लेकिन जिन मरीजों में पैंक्रियाज की इंसुलिन बनाने की क्षमता कम हो चुकी होती है, उनमें रागी का असर तेजी से दिखता है और ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है।
डाइट अपनाने से पहले जरूरी है मॉनिटरिंग
डॉक्टर प्रमोद ने सलाह दी कि डायबिटीज मरीज किसी भी अनाज या फूड आइटम को डाइट में शामिल करते समय उसके बाद शरीर की प्रतिक्रिया को जरूर जांचें। नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग के बिना किसी भी ट्रेंड या सोशल मीडिया सलाह पर आंख मूंदकर भरोसा करना नुकसानदेह हो सकता है।
विशेषज्ञ की सलाह क्यों है जरूरी
डायबिटीज एक जटिल मेटाबॉलिक स्थिति है, जिसमें हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। इसलिए किसी एक फूड को “सबके लिए सुरक्षित” मानना सही नहीं है। डाइट से जुड़े फैसले हमेशा व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह के आधार पर लेने चाहिए।



