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CricketControversy – वर्ल्ड कप बहिष्कार पर क्यों बदल गए बांग्लादेश के सुर…

CricketControversy – भारत में आयोजित टी20 वर्ल्ड कप से दूरी बनाने के बांग्लादेश के फैसले पर अब नई बहस शुरू हो गई है। पहले जहां इसे सरकारी निर्णय बताया जा रहा था, वहीं अब तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने ताजा बयान में कहा है कि टूर्नामेंट से हटने का फैसला सरकार ने नहीं, बल्कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों ने मिलकर लिया था। उनके मुताबिक यह कदम “राष्ट्रीय सम्मान” और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया।

bangladesh world cup boycott row

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फैसले के पीछे सुरक्षा और सम्मान का तर्क

आसिफ नजरुल ने स्पष्ट किया कि टीम ने अपने खेल सपने से ऊपर देशहित को रखा। उनका कहना है कि खिलाड़ियों और बोर्ड ने यह महसूस किया कि मौजूदा परिस्थितियों में भाग लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने इसे एक “कुर्बानी” बताया, जो देश की प्रतिष्ठा और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दी गई। इस बयान ने उस धारणा को चुनौती दी है जिसमें कहा गया था कि यह निर्णय पूरी तरह से सरकार के स्तर पर लिया गया था।

पहले दिए गए बयान से उलट रुख

जनवरी में नजरुल का रुख कुछ और था। तब उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था कि वर्ल्ड कप में खेलने या न खेलने का फैसला पूरी तरह सरकार का अधिकार क्षेत्र है। उन्होंने यह भी बताया था कि खिलाड़ियों के साथ हुई बैठक का उद्देश्य सरकार के निर्णय के पीछे का कारण समझाना था। उस समय उनके बयान से यह संकेत मिला था कि सरकार ही अंतिम निर्णयकर्ता है। अब उनके नए बयान से यह साफ है कि कहानी में बदलाव आया है।

आईसीसी से असंतोष की बात

जनवरी की प्रेस बातचीत में नजरुल ने यह भी कहा था कि बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद से अपेक्षित न्याय नहीं मिला। उनका मानना था कि परिस्थितियों को लेकर पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। हालांकि, अब उन्होंने कहा है कि आईसीसी ने आश्वासन दिया है कि बांग्लादेश के खिलाफ कोई प्रतिबंधात्मक रुख नहीं अपनाया जाएगा और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी पर भी कोई रोक नहीं होगी। इसे उन्होंने एक सकारात्मक उपलब्धि करार दिया।

स्कॉटलैंड को मिली जगह

बांग्लादेश के हटने के बाद टूर्नामेंट में उनकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया था। उस समय यह बदलाव अचानक हुआ, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने इसे प्रतियोगिता के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक कदम बताया था। क्रिकेट जगत में यह फैसला काफी चर्चा में रहा, क्योंकि बांग्लादेश एक स्थापित टीम है और उसका हटना टूर्नामेंट के संतुलन पर असर डाल सकता था।

खेल जगत में उठ रहे सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वास्तविक निर्णय प्रक्रिया क्या थी। क्या यह पूरी तरह क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों का सामूहिक फैसला था, या इसमें सरकारी स्तर पर भी परोक्ष भूमिका रही? विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से हटने जैसा बड़ा कदम आमतौर पर कई स्तरों पर विचार-विमर्श के बाद लिया जाता है। ऐसे में अलग-अलग समय पर दिए गए बयानों से भ्रम की स्थिति बनना स्वाभाविक है।

आगे की राह क्या होगी

नजरुल ने अपने हालिया बयान में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने देशहित में साहसिक निर्णय लिया। साथ ही उन्होंने आईसीसी के साथ भविष्य के संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। फिलहाल यह देखना अहम होगा कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में बांग्लादेश की भागीदारी किस तरह होती है और क्या यह विवाद पूरी तरह थमता है या आगे भी चर्चा का विषय बना रहता है। क्रिकेट प्रेमियों की नजर अब बोर्ड और आईसीसी के अगले कदमों पर टिकी है।

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