स्वास्थ्य

ChronicCough – लगातार खांसी को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी…

ChronicCough – मौसम में बदलाव आते ही खांसी की शिकायत आम हो जाती है। ज्यादातर लोग इसे सर्दी, जुकाम या हल्की एलर्जी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब यही खांसी हफ्तों तक बनी रहे, दवा लेने के बाद भी पूरी तरह ठीक न हो या कुछ समय बाद फिर लौट आए, तो इसे सामान्य समस्या समझना भूल हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि आठ सप्ताह से अधिक समय तक रहने वाली खांसी को क्रॉनिक कफ माना जाता है और इसके पीछे कई गंभीर कारण छिपे हो सकते हैं।

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डॉ. हरीश वर्मा के अनुसार, हर खांसी संक्रमण की वजह से नहीं होती। कई बार यह शरीर का संकेत होता है कि अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है। यदि खांसी के साथ सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, बिना वजह वजन घटना, खून आना या लगातार थकान जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो तुरंत जांच कराना जरूरी है।

GERD से जुड़ी खांसी के संकेत

कुछ मामलों में खांसी का संबंध गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज यानी GERD से होता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब पेट का अम्ल ऊपर की ओर आकर भोजन नली और गले को प्रभावित करता है। खास बात यह है कि हर मरीज में सीने में जलन महसूस नहीं होती। रात के समय खांसी बढ़ना, गले में खराश, बार-बार गला साफ करने की जरूरत या मुंह में खट्टा स्वाद आना ऐसे संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। लगातार एसिड रिफ्लक्स श्वसन मार्ग को प्रभावित कर सकता है और खांसी को लंबा खींच सकता है।

बदलती जीवनशैली भी जिम्मेदार

विशेषज्ञ मानते हैं कि आज की दिनचर्या भी इस समस्या को बढ़ा रही है। देर रात भोजन करना, घंटों तक बैठे रहना, प्रदूषित वातावरण में रहना और धूम्रपान जैसी आदतें श्वसन तंत्र पर नकारात्मक असर डालती हैं। अत्यधिक कैफीन का सेवन, बढ़ता मोटापा और मानसिक तनाव भी स्थिति को जटिल बना सकते हैं। घर से काम करने की प्रवृत्ति के दौरान शारीरिक गतिविधि में कमी और बंद कमरों की खराब हवा भी सांस संबंधी दिक्कतों को बढ़ावा देती है।

साइलेंट रिफ्लक्स और अन्य कारण

कई बार युवा और देखने में स्वस्थ लोग भी लंबी खांसी से परेशान रहते हैं। इसका कारण एलर्जी, अस्थमा या साइलेंट रिफ्लक्स जैसी स्थितियां हो सकती हैं, जिनमें स्पष्ट लक्षण सामने नहीं आते। कुछ गंभीर बीमारियां जैसे टीबी या फेफड़ों का कैंसर भी लगातार खांसी का कारण बन सकते हैं, हालांकि ऐसे मामले कम होते हैं। फिर भी लक्षणों को हल्के में लेना उचित नहीं है। उम्र या फिटनेस के आधार पर जोखिम को नकारा नहीं जा सकता।

राहत के लिए अपनाएं सावधानियां

डॉक्टरों का सुझाव है कि जीवनशैली में छोटे बदलाव काफी मदद कर सकते हैं। समय पर भोजन करना, सोने से पहले भारी और तैलीय भोजन से बचना, धूम्रपान छोड़ना और प्रदूषण से बचाव करना जरूरी कदम हैं। नियमित व्यायाम और पर्याप्त पानी पीना भी श्वसन तंत्र को मजबूत रखता है। यदि GERD की आशंका हो, तो सोते समय सिर थोड़ा ऊंचा रखने और मसालेदार भोजन कम करने से लाभ मिल सकता है।

कब जरूरी है चिकित्सकीय परामर्श

यदि खांसी तीन से चार सप्ताह से अधिक बनी रहे या बार-बार लौट आए, तो स्वयं दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच से सही कारण का पता लगाया जा सकता है और उपचार जल्दी शुरू किया जा सकता है। लंबी चलने वाली खांसी को साधारण मानना जोखिम भरा हो सकता है। शरीर बार-बार संकेत देता है, जरूरत है उन्हें समझने और समय रहते कदम उठाने की।

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