ChildNutrition – बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खास दूध…
बढ़ती उम्र के बच्चों को संतुलित पोषण मिलना बेहद जरूरी है। यही वह समय होता है जब शरीर तेजी से विकसित होता है और दिमाग नई चीजें सीखने की क्षमता हासिल करता है। लेकिन बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण कई बच्चों को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इसका असर उनकी लंबाई, हड्डियों की मजबूती और याददाश्त पर दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि रोजमर्रा के आहार में कुछ पोषक तत्वों को सही तरीके से शामिल किया जाए तो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर सहारा मिल सकता है। पारंपरिक तरीकों में दूध को पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत माना गया है, और उसमें कुछ सूखे मेवे तथा आयुर्वेद में वर्णित जड़ी-बूटियां मिलाकर देने की सलाह दी जाती रही है।

दूध में पोषक तत्व मिलाने का तरीका
घर पर तैयार किया गया पौष्टिक दूध बच्चों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है। इसके लिए लगभग आधा लीटर उबला हुआ दूध लें और उसे हल्का गुनगुना रहने दें। बहुत अधिक गर्म दूध में अन्य सामग्री मिलाने से उनके गुण प्रभावित हो सकते हैं। इसमें रातभर भिगोए हुए बादाम और अखरोट मिलाए जा सकते हैं। साथ ही भुने हुए सफेद तिल भी डाले जा सकते हैं, जो कैल्शियम का अच्छा स्रोत माने जाते हैं। कुछ लोग सीमित मात्रा में अश्वगंधा और शतावरी पाउडर भी मिलाते हैं, जिनका उल्लेख आयुर्वेद में किया गया है। स्वाद के लिए थोड़ा शहद मिलाया जा सकता है। इन सभी को अच्छी तरह मिश्रित कर एक गाढ़ा पेय तैयार किया जाता है।
नियमित सेवन और सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बच्चा स्वस्थ है और किसी विशेष बीमारी से ग्रस्त नहीं है, तो यह पेय दिन में एक बार दिया जा सकता है। कुछ लोग इसे सुबह खाली पेट या रात में सोने से पहले देना पसंद करते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर बच्चे की जरूरत अलग होती है। किसी भी तरह की एलर्जी, हार्मोन से जुड़ी समस्या या डॉक्टर द्वारा बताए गए विशेष आहार नियम होने पर पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। बिना सलाह के किसी भी सप्लीमेंट या जड़ी-बूटी का अधिक मात्रा में सेवन ठीक नहीं माना जाता।
सूखे मेवों की भूमिका
बादाम और अखरोट को दिमागी विकास के लिए उपयोगी माना जाता है। इनमें मौजूद हेल्दी फैट और अन्य पोषक तत्व याददाश्त और एकाग्रता को समर्थन दे सकते हैं। तिल कैल्शियम और आयरन का स्रोत है, जो हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी हैं। बढ़ते बच्चों में हड्डियों का विकास तेजी से होता है, ऐसे में संतुलित मात्रा में इनका सेवन लाभकारी हो सकता है। हालांकि संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि अधिक मात्रा में मेवे पाचन पर असर डाल सकते हैं।
आयुर्वेदिक तत्वों पर विशेषज्ञों की राय
अश्वगंधा और शतावरी का उल्लेख आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है। कुछ आयुर्वेद विशेषज्ञ मानते हैं कि सीमित मात्रा में इनका सेवन शरीर की ऊर्जा और संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है। योग गुरु बाबा रामदेव ने भी कई बार बच्चों की वृद्धि के संदर्भ में इन जड़ी-बूटियों का जिक्र किया है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों को कोई भी हर्बल उत्पाद देने से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
संतुलित आहार का महत्व
केवल एक पेय से संपूर्ण विकास की उम्मीद नहीं की जा सकती। बच्चों को हरी सब्जियां, फल, दालें, अनाज और पर्याप्त पानी भी नियमित रूप से मिलना चाहिए। शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद भी विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे बच्चों की थाली में विविधता और संतुलन बनाए रखें, ताकि उनका विकास स्वस्थ और मजबूत आधार पर हो सके।



