VitaminD – सुबह की धूप से नहीं पूरी होती शरीर की जरूरत
VitaminD – भारत में लंबे समय से यह धारणा चली आ रही है कि सूर्योदय की हल्की धूप शरीर के लिए अमृत समान होती है और इससे Vitamin D की कमी दूर हो जाती है। सुबह-सुबह पार्कों में टहलते लोग हों या घर की बालकनी में बैठकर धूप सेंकते बुजुर्ग, अधिकांश को यही विश्वास रहता है कि दिन की शुरुआत में मिली धूप ही पर्याप्त है। हालांकि पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है और इसे समझना जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जो Vitamin D deficiency से जूझ रहे हैं।

सुबह की धूप को लेकर बनी गलतफहमी
पोषण विशेषज्ञ निकिता बारडिया के अनुसार, शरीर में Vitamin D का निर्माण किसी भी साधारण धूप से नहीं होता। इसके लिए खास तरह की UVB किरणों की आवश्यकता होती है। सुबह के समय जब सूरज क्षितिज के पास होता है, तब ये किरणें काफी कमजोर रहती हैं। ऐसे में भले ही व्यक्ति आधा घंटा या उससे अधिक समय तक हल्की धूप में बैठा रहे, Vitamin D synthesis की प्रक्रिया पर्याप्त स्तर पर सक्रिय नहीं हो पाती।
सुबह की धूप के अपने लाभ जरूर हैं। यह शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित करती है, नींद के चक्र को बेहतर बनाती है और मानसिक सुकून देती है। कई लोगों को इससे ऊर्जा का अनुभव भी होता है। लेकिन Vitamin D के संदर्भ में इसे पर्याप्त मान लेना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जाता।
Vitamin D के लिए सही समय क्या है
विशेषज्ञों का कहना है कि दिन में एक ऐसा समय होता है जब UVB किरणें अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी होती हैं। आम तौर पर यह समय देर सुबह से लेकर शुरुआती दोपहर तक का होता है, लगभग 10:30 बजे से 2 बजे के बीच। इसी दौरान त्वचा में Vitamin D synthesis अधिक सक्रिय रूप से होता है।
इसका मतलब यह नहीं कि धूप में अधिक देर तक बिना सावधानी के रहें, बल्कि सीमित समय के लिए सही समय चुनना अधिक उपयोगी है। केवल गर्माहट महसूस होना Vitamin D बनने की गारंटी नहीं है। जरूरी यह है कि त्वचा तक सही प्रकार की किरणें पहुंचें।
धूप लेने का सही तरीका
पोषण विशेषज्ञ कुछ व्यवहारिक सुझाव भी देती हैं ताकि शरीर को संतुलित लाभ मिल सके।
पहला, सप्ताह में एक दिन लंबी धूप लेने के बजाय रोजाना 15 से 25 मिनट तक धूप लेना बेहतर है।
दूसरा, केवल चेहरा ही नहीं, बल्कि हाथ और पैर भी धूप के संपर्क में आने चाहिए।
तीसरा, धूप लेने के साथ संतुलित आहार का भी महत्व है। शरीर में Vitamin D के बेहतर उपयोग के लिए स्वस्थ वसा जैसे घी, बीज और मेवे सहायक हो सकते हैं।
ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि कांच की खिड़की के पीछे बैठने से UVB किरणें प्रभावी रूप से त्वचा तक नहीं पहुंच पातीं। इसलिए खुली धूप में रहना जरूरी है। साथ ही, यह समझ लेना भी आवश्यक है कि कुछ मिनटों की हल्की धूप पर्याप्त नहीं होती।
सुबह और दोपहर की धूप में अंतर
सुबह की धूप और देर सुबह की धूप के फायदे अलग-अलग हैं। सुबह की किरणें मानसिक स्वास्थ्य, मूड और नींद के लिए उपयोगी मानी जाती हैं। वहीं Vitamin D के लिहाज से देर सुबह या शुरुआती दोपहर का समय अधिक उपयुक्त है।
दोनों समय का महत्व अलग है और व्यक्ति को अपनी जरूरत के अनुसार संतुलन बनाना चाहिए। यदि किसी में Vitamin D deficiency पाई गई है और वह केवल सूर्योदय की धूप पर निर्भर है, तो उसे अपनी दिनचर्या पर पुनर्विचार करना चाहिए।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि यदि लंबे समय से थकान, हड्डियों में दर्द या कमजोरी महसूस हो रही है, तो चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है। केवल धूप पर निर्भर रहने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है।
अंततः, सेहत से जुड़ी मान्यताओं को वैज्ञानिक तथ्यों की कसौटी पर परखना जरूरी है। सही समय, उचित धूप और संतुलित आहार—इन तीनों के मेल से ही शरीर को वास्तविक लाभ मिल सकता है।



