ConstipationRelief – रोजमर्रा की आदतों से कब्ज पर पाएं काबू
ConstipationRelief – सुबह उठते ही पेट साफ न होना बहुत से लोगों के लिए रोज की परेशानी बन चुका है। शुरुआत में यह समस्या हल्की लगती है, लेकिन अनदेखी करने पर यही धीरे-धीरे पुरानी कब्ज का रूप ले सकती है। इसके साथ गैस, पेट फूलना और एसिडिटी जैसी दिक्कतें भी जुड़ जाती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते खानपान में सुधार कर लिया जाए तो इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। खासकर फाइबर से भरपूर फल पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

कब्ज क्यों बनती है गंभीर समस्या
कई लोग कब्ज को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक मल त्याग में कठिनाई रहने से शरीर में भारीपन और सुस्ती बनी रहती है। पेट पूरी तरह साफ न होने पर भूख कम लगती है और काम में मन नहीं लगता। चिकित्सकों के अनुसार, अनियमित खानपान, कम पानी पीना और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। ऐसे में संतुलित आहार और पर्याप्त तरल पदार्थ का सेवन जरूरी हो जाता है।
कीवी से मिल सकता है फायदा
पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि कीवी में घुलनशील फाइबर और एक्टिनिडिन नामक एंजाइम पाया जाता है, जो पाचन प्रक्रिया को तेज करने में मदद करता है। यह आंतों की गति को बेहतर बनाता है और मल त्याग को आसान करता है। नियमित रूप से एक से दो कीवी खाने से मल की मात्रा और उसकी बनावट दोनों में सुधार देखा जा सकता है। इसे नाश्ते के साथ शामिल करना बेहतर माना जाता है। कुछ लोग इसे छिलके सहित भी खाते हैं, जिससे अतिरिक्त फाइबर मिलता है, हालांकि सेवन से पहले अच्छी तरह धोना जरूरी है।
आलूबुखारा का प्राकृतिक असर
सूखा आलूबुखारा, जिसे प्रून्स भी कहा जाता है, लंबे समय से कब्ज में उपयोगी माना जाता रहा है। इसमें फाइबर के साथ प्राकृतिक सोर्बिटोल मौजूद होता है, जो आंतों में पानी खींचकर मल को मुलायम बनाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि तीन से चार आलूबुखारे रात में पानी में भिगोकर सुबह खाए जा सकते हैं। जिस पानी में इन्हें भिगोया गया हो, उसे भी पीना लाभकारी माना जाता है। कई अध्ययनों में इसे कब्ज में प्रभावी पाया गया है।
नाशपाती भी है कारगर विकल्प
मौसम में मिलने वाली नाशपाती भी पाचन के लिए उपयोगी फल है। इसमें फाइबर और सोर्बिटोल का संतुलित संयोजन पाया जाता है। यह आंतों में नमी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे मल त्याग सहज होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नाश्ते के बाद एक मध्यम आकार की नाशपाती रोजाना खाने से लाभ मिल सकता है। हालांकि जिन लोगों का पाचन तंत्र संवेदनशील है, उन्हें मात्रा पर ध्यान देना चाहिए।
नियमितता और पानी का महत्व
केवल फल खाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमितता भी जरूरी है। किसी एक दिन सेवन कर छोड़ देने से खास असर नहीं दिखता। रोजाना संतुलित मात्रा में इन फलों को शामिल करना चाहिए। साथ ही दिनभर पर्याप्त पानी पीना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पानी की कमी से मल सख्त हो सकता है, जिससे समस्या बढ़ती है।
कब लें विशेषज्ञ की सलाह
यदि आहार में बदलाव के बाद भी कब्ज लंबे समय तक बनी रहे या पेट दर्द, रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। सही समय पर कदम उठाने से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखा जा सकता है।



