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IranNuclearDeal – समझौते पर नेतन्याहू की सख्त शर्तें, बढ़ा कूटनीतिक दबाव

IranNuclearDeal – इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते को लेकर स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि यदि वाशिंगटन और तेहरान के बीच कोई नई सहमति बनती है, तो उसमें ईरान के परमाणु ढांचे को पूरी तरह समाप्त करना अनिवार्य शर्त होनी चाहिए। नेतन्याहू के मुताबिक केवल यूरेनियम संवर्धन रोकना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उससे जुड़ी पूरी तकनीकी संरचना को खत्म किया जाना जरूरी है।

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सम्मेलन में रखी स्पष्ट शर्त

अमेरिका के प्रमुख यहूदी संगठनों के वार्षिक सम्मेलन में संबोधित करते हुए इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें प्रस्तावित समझौते की रूपरेखा को लेकर संदेह है। उनका कहना था कि ईरान को संवर्धित सामग्री देश से बाहर भेजनी चाहिए और भविष्य में किसी भी तरह की संवर्धन क्षमता नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि केवल अस्थायी रोक से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन सभी उपकरणों और सुविधाओं को निष्क्रिय किया जाना चाहिए जो परमाणु गतिविधियों को संभव बनाते हैं।

वार्ता का अगला दौर और बढ़ती गतिविधियां

इस सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा चरण प्रस्तावित है। एक ईरानी राजनयिक के अनुसार, तेहरान ऐसा समझौता चाहता है जिससे दोनों देशों को आर्थिक लाभ मिल सके। इस महीने की शुरुआत में दोनों पक्षों ने वर्षों से चले आ रहे परमाणु विवाद को सुलझाने के उद्देश्य से संवाद फिर शुरू किया था। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य टकराव की आशंकाओं के बीच यह वार्ता अहम मानी जा रही है।

सैन्य तैयारी के संकेत

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने क्षेत्र में दूसरा विमानवाहक पोत तैनात किया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि बातचीत अपेक्षित नतीजे नहीं देती, तो दीर्घकालिक सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है।

ईरान का आर्थिक प्रस्ताव

ईरान की फार्स समाचार एजेंसी के मुताबिक, विदेश मंत्रालय में आर्थिक कूटनीति से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी हामिद घनबरी ने कहा है कि किसी भी समझौते को टिकाऊ बनाने के लिए अमेरिका को भी आर्थिक लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि तेल और गैस क्षेत्रों में साझा निवेश, खनन परियोजनाएं और यहां तक कि विमान खरीद जैसे मुद्दे भी वार्ता का हिस्सा हो सकते हैं। ईरान का तर्क है कि पारस्परिक हितों पर आधारित समझौता ही लंबे समय तक स्थिर रह सकता है।

आंतरिक और बाहरी दबाव

हालांकि हालिया बयानों से तनाव में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं, लेकिन ईरान के भीतर राजनीतिक परिस्थितियां जटिल बनी हुई हैं। देश के निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन आयोजित करने की अपील की है। यह आह्वान हाल के आर्थिक संकट और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के संदर्भ में किया गया है। ऐसे में तेहरान को एक ओर बाहरी कूटनीतिक दबाव और दूसरी ओर आंतरिक असंतोष दोनों का सामना करना पड़ रहा है।

आगे की राह

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी घटनाक्रम से साफ है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। जहां इजरायल सख्त शर्तों पर जोर दे रहा है, वहीं ईरान आर्थिक सहयोग की संभावनाओं के साथ समझौते को पुनर्जीवित करने की कोशिश में है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगामी दौर की वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या क्षेत्र में स्थिरता की नई राह निकल पाती है।

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