स्वास्थ्य

StressHealthRisk – तनाव बना रहा है शरीर के लिए बड़ा खतरा

StressHealthRisk – तेजी से बदलती जीवनशैली में लोग अपने खान-पान पर पहले से ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। जिम, डाइट प्लान और हेल्दी फूड का चलन बढ़ा है, फिर भी कई लोग थकान, दर्द और बार-बार बीमार पड़ने की शिकायत करते हैं। आम तौर पर इसकी वजह शराब या धूम्रपान को माना जाता है, लेकिन मुंबई के वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. मनन वोरा का मानना है कि असली समस्या कुछ और है। उनके अनुसार रोजमर्रा का लगातार बना रहने वाला तनाव शरीर को भीतर ही भीतर नुकसान पहुंचा रहा है।

chronic stress impact on health

तनाव क्यों बन रहा है गंभीर चुनौती

डॉ. वोरा बताते हैं कि लगातार मानसिक दबाव शरीर पर उसी तरह असर डालता है, जैसे किसी मशीन पर लगातार भार डालना। कई लोग तनाव को केवल मानसिक स्वास्थ्य से जोड़कर देखते हैं, जबकि इसका असर शारीरिक सेहत पर भी साफ दिखता है। लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव शरीर की ऊर्जा को कम करता है और थकान को स्थायी बना सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा के तनाव से जूझ रहे हैं। काम का दबाव, निजी जिम्मेदारियां और डिजिटल जीवनशैली ने मानसिक शांति को प्रभावित किया है।

शरीर देता है संकेत

तनाव का असर केवल मन तक सीमित नहीं रहता। डॉक्टर के मुताबिक शरीर समय-समय पर संकेत देता है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगातार सिरदर्द, पीठ और कंधों में जकड़न, जोड़ों में दर्द, दांत पीसना या बिना कारण थकान महसूस होना इसके संकेत हो सकते हैं।

जब व्यक्ति लंबे समय तक दबाव में रहता है, तो मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ जाता है और नींद की गुणवत्ता घटती है। इससे शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। कई मामलों में पाचन तंत्र और हार्मोन संतुलन पर भी असर देखा जाता है।

नींद की कमी बढ़ा रही समस्या

विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नींद न लेना तनाव को और बढ़ा देता है। औसतन सात से आठ घंटे की नींद शरीर और दिमाग के लिए जरूरी मानी जाती है। लेकिन देर रात तक स्क्रीन पर समय बिताने और अनियमित दिनचर्या के कारण यह संतुलन बिगड़ रहा है।

डॉ. वोरा के अनुसार, नींद शरीर के लिए ऊर्जा पुनः प्राप्त करने का समय है। यदि नींद अधूरी रह जाती है तो पिछले दिन का मानसिक दबाव अगले दिन भी बना रहता है। इस तरह तनाव का चक्र लगातार चलता रहता है और शरीर को संभलने का अवसर नहीं मिलता।

क्या हो सकता है असर

लगातार तनाव से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। इससे छोटी-छोटी बीमारियां भी जल्दी घेर लेती हैं। लंबे समय तक बनी रहने वाली चिंता हृदय स्वास्थ्य, मांसपेशियों और मानसिक संतुलन पर भी असर डाल सकती है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया अलग होती है। इसलिए यदि लंबे समय तक थकान या दर्द बना रहे तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

राहत के लिए क्या करें

तनाव कम करने के लिए जीवनशैली में छोटे बदलाव मददगार हो सकते हैं। नियमित नींद, हल्का व्यायाम और परिवार या मित्रों के साथ खुलकर बातचीत मानसिक दबाव कम कर सकती है। समय-समय पर डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाना भी उपयोगी माना जाता है।

डॉ. वोरा का सुझाव है कि समस्याओं को दबाने के बजाय साझा करना बेहतर है। संतुलित दिनचर्या और पर्याप्त विश्राम से शरीर और मन दोनों को राहत मिल सकती है।

बदलती जीवनशैली में तनाव को हल्के में लेना ठीक नहीं है। समय रहते इसके संकेत पहचानना और सुधारात्मक कदम उठाना लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.