SeniorHealth – 50 के बाद सेहत के लिए तीन जरूरी मसाले
SeniorHealth – उम्र बढ़ने के साथ शरीर में बदलाव स्वाभाविक हैं। 50 वर्ष के बाद पाचन, जोड़ों की मजबूती और हृदय से जुड़ी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि समय रहते खानपान में छोटे लेकिन सही बदलाव कर इन दिक्कतों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसाले केवल स्वाद नहीं बढ़ाते, बल्कि इनमें कई प्राकृतिक गुण भी होते हैं। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डिंपल जांगड़ा के अनुसार, कुछ मसालों को नियमित आहार में शामिल करने से सीनियर सिटीजन को विशेष लाभ मिल सकता है।

मसालों को औषधि की तरह मानने की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक मसालों में एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। बढ़ती उम्र में भूख और स्वाद की क्षमता कम होने लगती है। ऐसे में अदरक, लहसुन और जीरा जैसे मसाले न केवल भोजन को स्वादिष्ट बनाते हैं, बल्कि पाचन और दिल की सेहत को भी सहारा देते हैं। सही मात्रा और संतुलित उपयोग इन मसालों को दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बना सकता है।
अदरक: पाचन और जोड़ों के लिए सहायक
अदरक को लंबे समय से घरेलू उपचार में उपयोग किया जाता रहा है। यह पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में मदद करता है और गैस या अपच की समस्या को कम कर सकता है। जोड़ों में जकड़न और हल्के दर्द की शिकायत वाले लोगों के लिए भी यह लाभकारी माना जाता है। इसे इस्तेमाल करने का सरल तरीका है—थोड़ी सी कद्दूकस की हुई अदरक को पानी में उबालकर पीना। इसे भोजन के बाद या सुबह खाली पेट लिया जा सकता है। हालांकि, जो लोग रक्त को पतला करने वाली दवाएं ले रहे हों या एसिडिटी की समस्या से जूझ रहे हों, उन्हें नियमित सेवन से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
लहसुन: हृदय स्वास्थ्य का साथी
लहसुन को हृदय के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह रक्त संचार को बेहतर बनाने और रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। दो कली लहसुन को हल्का सा घी या तेल में भूनकर सुबह सेवन किया जा सकता है। इसे दाल या सब्जी के तड़के में भी शामिल करना आसान है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में लहसुन खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। फिर भी, हृदय रोग से पीड़ित या नियमित दवा लेने वाले लोगों को पहले डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
जीरा: पाचन सुधारने में कारगर
जीरा भारतीय रसोई का सामान्य लेकिन प्रभावी मसाला है। यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है और गैस या पेट फूलने की समस्या में राहत दे सकता है। भोजन के बाद जीरे का हल्का काढ़ा या जीरे की चाय लेना उपयोगी माना जाता है। नियमित सेवन से पाचन संतुलित रहता है और शरीर हल्का महसूस करता है।
संतुलन और सावधानी जरूरी
विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि मसाले लाभकारी जरूर हैं, लेकिन इनका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या दवा के साथ इनके नियमित उपयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर रहता है। सही आहार, हल्का व्यायाम और सकारात्मक दिनचर्या के साथ ये मसाले उम्र के बाद के वर्षों को स्वस्थ और सक्रिय बनाने में सहायक हो सकते हैं।



