RajyaSabhaElections – मार्च में 37 सीटों पर सियासी समीकरण तय करेंगे नतीजे
RajyaSabhaElections – देश के विभिन्न राज्यों में इस वर्ष राज्यसभा की 72 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिनमें से 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए मतदान 16 मार्च 2026 को कराया जाएगा। निर्वाचन आयोग द्वारा कार्यक्रम घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। राज्यसभा के चुनाव में संबंधित राज्यों के विधायक मतदान करते हैं, इसलिए विधानसभा की मौजूदा संख्या बल इन चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाती है। मौजूदा गणित के अनुसार भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल कई राज्यों में बढ़त की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं, जबकि विपक्षी दलों के लिए चुनौतीपूर्ण हालात बन सकते हैं।

प्रमुख नेताओं का कार्यकाल हो रहा समाप्त
इन चुनावों में जिन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें कई चर्चित नाम शामिल हैं। शरद पवार, हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा, रामदास अठावले, एम थंबीदुरई, प्रियंका चतुर्वेदी, प्रेमचंद गुप्ता और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे नेता आगामी महीनों में सदन से विदा लेंगे। ऐसे में कई राज्यों में नए चेहरे राज्यसभा पहुंच सकते हैं। दलों के भीतर भी उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन जारी है।
बिहार में समीकरण भाजपा-नीत गठबंधन के पक्ष में
बिहार में पांच सीटें रिक्त हो रही हैं। इनमें जनता दल (यू) की दो, राष्ट्रीय जनता दल की दो और एक सीट अन्य दल के पास है। मौजूदा विधानसभा संख्या बल को देखें तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास 200 से अधिक विधायक हैं। एक सीट के लिए 42 मतों की आवश्यकता है। इस आधार पर गठबंधन चार सीटों पर मजबूत स्थिति में है। विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या नहीं है, जिससे मुकाबला कठिन माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अतिरिक्त समर्थन जुटा लिया गया तो पांचवीं सीट पर भी सत्तारूढ़ गठबंधन दावा कर सकता है।
असम, छत्तीसगढ़ और हरियाणा की तस्वीर
असम में तीन सीटें खाली हो रही हैं। यहां दो सीटें भाजपा और एक निर्दलीय सदस्य की हैं। मौजूदा गणित के अनुसार भाजपा को दो सीटें मिलने की संभावना है, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है। छत्तीसगढ़ में दो सीटें रिक्त हैं, जो अभी कांग्रेस के पास हैं। चुनाव के बाद दोनों प्रमुख दलों को एक-एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।
हरियाणा में दो सीटें भाजपा की खाली हो रही हैं। हालांकि संख्या बल को देखते हुए एक सीट कांग्रेस को मिलने की संभावना बन रही है। हिमाचल प्रदेश में भी एक सीट रिक्त हो रही है और वहां कांग्रेस को बढ़त मिल सकती है।
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा हलचल
महाराष्ट्र की सात सीटों पर चुनाव दिलचस्प माना जा रहा है। इनमें भाजपा, शिवसेना (उद्धव गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद गुट), कांग्रेस और रिपब्लिकन पार्टी की सीटें शामिल हैं। वर्तमान राजनीतिक समीकरणों के आधार पर भाजपा तीन सीटें हासिल कर सकती है। शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित गुट) को भी लाभ मिल सकता है। कांग्रेस के हिस्से एक सीट जाने की संभावना है। शरद पवार खेमे के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति बताई जा रही है, क्योंकि समर्थन जुटाना आसान नहीं माना जा रहा।
दक्षिण और पूर्वी राज्यों का परिदृश्य
ओडिशा की चार सीटों पर चुनाव होना है, जहां भाजपा और बीजद के बीच बराबरी की संभावना जताई जा रही है। तमिलनाडु की छह सीटों में द्रमुक की स्थिति मजबूत है और वह चार सीटें बरकरार रख सकती है। एक सीट अन्नाद्रमुक को मिलना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि शेष सीट स्थानीय समीकरणों पर निर्भर करेगी।
तेलंगाना में दो सीटें रिक्त हो रही हैं, जिनमें से दोनों पर कांग्रेस बढ़त में दिखाई दे रही है। पश्चिम बंगाल में पांच सीटों पर चुनाव होगा। यहां तृणमूल कांग्रेस की स्थिति मजबूत है और वह चार सीटें बरकरार रख सकती है, जबकि एक सीट भाजपा को मिलने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक प्रभाव और आगे की दिशा
इन चुनावों के नतीजे राज्यसभा में दलों की ताकत तय करेंगे। सत्तारूढ़ गठबंधन को संभावित बढ़त मिलने की चर्चा है, जबकि विपक्ष को कुछ राज्यों में नुकसान उठाना पड़ सकता है। अंतिम तस्वीर मतदान और संभावित रणनीतिक समर्थन के बाद ही साफ होगी।



