Piyush Mishra’s statement: पीयूष मिश्रा ने रणबीर कपूर के लिए दिया विवादित बयान, वजह जानकर होगी हैरानी…
Piyush Mishra’s statement: मंच और सिनेमा के बहुमुखी कलाकार पीयूष मिश्रा ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान बॉलीवुड के दो दिग्गज अभिनेताओं – रणबीर कपूर और दिवंगत इरफान खान – के बारे में खुलकर बात की। इन दोनों कलाकारों के साथ काम करने के बाद, पीयूष मिश्रा ने उनके अभिनय शैलियों (Acting Styles) में मौजूद गहरे अंतर को उजागर किया। उन्होंने बताया कि कैसे रणबीर कपूर, एक ओर, अपने शॉट को पूरी संजीदगी से देते हैं और तुरंत ही उससे बाहर आ जाते हैं, वहीं दूसरी ओर, इरफान खान सीन के खत्म होने के बाद भी उसकी भावनाओं में डूबे रहते थे। मिश्रा की यह टिप्पणी अभिनय के दो अलग-अलग स्कूलों को दर्शाती है, जहाँ एक कलाकार पूरी तरह से स्वतंत्र है और दूसरा गहन रूप से जुड़ा हुआ।

Piyush Mishra statement: विरासत का बोझ न लेने वाला ‘नंगा, बेशर्म’ कलाकार
Piyush Mishra ने रणबीर कपूर के व्यक्तित्व पर जो टिप्पणी की है, वह अप्रत्याशित रूप से चमत्कारिक है। लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में, पीयूष मिश्रा ने रणबीर की बात शुरू करते ही हंसते हुए कहा, “अरे पूछिए भी मत – वो बंदा तो कुछ और ही है।” उन्होंने मज़ाकिया लहजे में रणबीर को “इतना नंगा, बेशर्म आदमी मैंने आज तक नहीं देखा” कहकर संबोधित किया। यह विशेषण उनके मुक्त, सहज और दिखावे से रहित स्वभाव को दर्शाता है। पीयूष, जिन्होंने रणबीर के साथ फिल्म ‘तमाशा’ में काम किया है, इस बात से सबसे अधिक प्रभावित हुए कि रणबीर कपूर खानदान की इतनी बड़ी विरासत (Star Legacy) से जरा भी प्रभावित नहीं होते। पीयूष ने कहा, “वह इतनी बड़ी लेगेसी से आते हैं – उनके पिता, दादा, परदादा, पृथ्वी कपूर तक। लेकिन वह 1% भी किसी का लोड लेकर नहीं चलते।”
‘नंगापन’ ही रणबीर के अभिनय की सबसे बड़ी ताकत (Effortless Performance)
पीयूष मिश्रा की ‘नंगा, बेशर्म’ वाली टिप्पणी वास्तव में रणबीर कपूर की अभिनय की सबसे बड़ी ताकत (Strength) को रेखांकित करती है। यह दिखाता है कि रणबीर किसी भी दबाव या वंशवादी अपेक्षा के बिना काम करते हैं। यही सहजता उनकी प्रदर्शन शैली (Effortless Performance) में परिलक्षित होती है। पीयूष ने बताया कि रणबीर कितनी संजीदगी से अपना शॉट देते हैं और कैमरा बंद होते ही एकदम सामान्य हो जाते हैं। उन्हें इस बात का जरा भी बोझ नहीं रहता कि वह किसी के पोते हैं या उनकी क्या महान विरासत है। यही मुक्त स्वभाव उन्हें हर किरदार में पूरी तरह से ढलने और फिर उससे आसानी से बाहर आने की अनुमति देता है। यह उनकी पेशेवर कार्यप्रणाली (Professional Work Ethic) का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
इरफान खान: शॉट के बाद भी किरदार में डूबे रहने वाला जादूगर (Method Acting)
रणबीर कपूर की फ्री-फ्लोइंग शैली के विपरीत, Piyush Mishra ने इरफान खान के अभिनय दृष्टिकोण का वर्णन किया। पीयूष ने बताया कि इरफान खान का तरीका पूरी तरह से अलग था; वह शॉट पूरा होने के बाद भी सीन और किरदार से गहराई से जुड़े (Deeply Connected) रहते थे। जहाँ रणबीर कैमरा बंद होते ही पूरी तरह से फ्री हो जाते थे, वहीं इरफान खान को अपने किरदार से बाहर आने में समय लगता था। यह शैली अक्सर मेथड एक्टिंग (Method Acting) या गहन आत्मसात (Deep Assimilation) से जुड़ी होती है। इरफान खान का यह जुड़ाव ही उन्हें पर्दे पर गंभीरता (Intensity) और वास्तविकता (Realism) प्रदान करता था। पीयूष के शब्दों में, दोनों महान थे, लेकिन उनके अभिनय के तरीके (Approach to Acting) पूरी तरह से विपरीत थे।
इरफान का जाना: एक कलाकार का दर्द भरा भावनात्मक स्मरण (Emotional Tribute)
इरफान खान के साथ काम करने के अनुभव को याद करते हुए Piyush Mishra थोड़े भावुक (Emotional) हो गए। उन्होंने गहरे दुख के साथ कहा, “वह बहुत जल्द चले गए यार। बहुत दर्द होता है। वह बहुत महान एक्टर थे।” यह सरल लेकिन मर्मस्पर्शी बयान भारतीय सिनेमा द्वारा खोए गए एक असाधारण कलाकार के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है। हालांकि, पीयूष ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि वह इरफान के क्लोज फ्रेंड (Close Friend) नहीं थे – उतने नहीं जितने तिग्मांशु धूलिया या विशाल भारद्वाज के थे। उनका बंधन मुख्य रूप से एक-दूसरे के काम की तारीफ से बना था।
शानदार इंसान और महान विरासत की कामना (Great Human Being)
Piyush Mishra ने इरफान खान के लिए अपने सम्मान (Respect) को और बढ़ाया जब उन्होंने कहा कि भले ही वे व्यक्तिगत रूप से क्लोज नहीं हो पाए, लेकिन उन्होंने सुना है कि इरफान एक शानदार इंसान (Great Human Being) थे। उन्होंने इरफान की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके बेटों को बढ़िया एक्टर बनने की कामना की। यह शुभकामना (Blessing) पीयूष मिश्रा के दिल की सच्ची भावना को दर्शाती है और बताती है कि कैसे सिनेमा जगत के कलाकार आपस में प्रतिस्पर्धा के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सद्भाव रखते हैं। इस तरह, पीयूष मिश्रा ने दो पीढ़ियों के दो महान अभिनेताओं की तुलना करते हुए भारतीय सिनेमा के अभिनय इतिहास की एक महत्वपूर्ण झलक पेश की।



