Federal Reserve Rate Cut: खुली डॉलर की तिजोरी, भारत पर धनवर्षा होगी या आएगी तबाही, अमेरिकी फेड ने तीसरी बार घटाई दरें
Federal Reserve Rate Cut: अमेरिका के फेडरल रिजर्व (फेड) ने 10 दिसंबर 2025 को बेंचमार्क ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती की (Federal Reserve Rate Cut)। यह इस साल लगातार तीसरी कटौती है और कुल मिलाकर 0.75 प्रतिशत की कमी हुई है। अब फेड की ब्याज दर 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है, जो 2022 के बाद से सबसे कम स्तर माना जा रहा है।

फेड नीति निर्माताओं में मतभेद
इस फैसले पर फेड के नीति निर्माताओं में एकमत नहीं थी। 12 में से 9 सदस्यों ने कटौती के पक्ष में वोट दिया, जबकि एक सदस्य 0.50 प्रतिशत की बड़ी कटौती चाहता था (monetarypolicy)। आगे की राह को लेकर भी अस्पष्टता है। कुछ नीति निर्माता अगले साल केवल एक बार कटौती की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि कुछ दो या उससे अधिक बार कटौती की संभावना देखते हैं।
आगे की राह डेटा पर निर्भर करेगी
फेड ने स्पष्ट किया कि आने वाली मौद्रिक नीति पूरी तरह आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में विकास दर धीमी होने और मुद्रास्फीति ऊंची बनी रहने के मिले-जुले संकेत दिख रहे हैं (economyupdate)। रोजगार सृजन की गति धीमी हुई है और बेरोजगारी दर बढ़ी है, जबकि मुद्रास्फीति का स्तर अभी भी उच्च है।
क्या यह आखिरी कटौती होगी?
कई आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अमेरिका में ब्याज दर कटौती के चक्र का अंत हो सकता है (interestrates)। उनका कहना है कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की प्रतिबद्धता के चलते फेड अब ठहराव के मोड में आ सकता है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगली दर कटौती केवल अगले साल की दूसरी तिमाही में ही संभव है।
भारतीय शेयर बाजार पर संभावित असर
विश्लेषकों का मानना है कि फेड के इस फैसले का भारतीय शेयर बाजार पर कोई बड़ा या सीधा असर नहीं पड़ेगा (stockmarketindia)। दरअसल, यह कदम पहले से ही बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था। भारतीय निवेशक और व्यापारी मुख्य रूप से घरेलू कारकों पर ध्यान दे रहे हैं, जैसे कि आईपीओ की बाढ़, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कॉर्पोरेट आय के मामूली परिणाम।
घरेलू आर्थिक संकेतक अहम रहेंगे
भारतीय बाजार अब घरेलू आर्थिक विकास, कंपनियों के तिमाही नतीजों और अमेरिका-भारत व्यापार समझौते जैसे मुद्दों पर अधिक केंद्रित होगा (economicgrowth)। फेड की दर कटौती से अमेरिकी आर्थिक माहौल पर असर पड़ेगा, लेकिन भारतीय बाजार को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक स्थानीय और क्षेत्रीय होंगे।
विशेषज्ञों की राय – निवेशकों को क्या देखना चाहिए
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को अमेरिकी दरों की बजाय भारतीय बाजार की मौजूदा परिस्थितियों और कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर अधिक ध्यान देना चाहिए (marketanalysis)। फेड की नीति अमेरिकी डॉलर और वैश्विक पूंजी प्रवाह को प्रभावित कर सकती है, लेकिन घरेलू शेयर बाजार की दिशा पर इसका सीमित प्रभाव होगा।
निष्कर्ष: अमेरिकी दर कटौती और भारतीय बाजार
फेड की यह तीसरी कटौती अमेरिकी आर्थिक संकेतों के अनुरूप है और यह संकेत देती है कि फेड मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है (Federal Reserve Rate Cut)। भारतीय निवेशकों को फिलहाल घरेलू कारकों पर नजर बनाए रखना चाहिए और अमेरिकी दरों के छोटे बदलाव से प्रभावित नहीं होना चाहिए।



