T20 Form Crisis: 2025 में क्यों तेज गेंदबाजों के सामने बेबस दिख रहे हैं ‘मिस्टर 360’ सूर्यकुमार यादव…
T20 Form Crisis: एक दौर था जब सूर्यकुमार यादव का नाम सुनते ही तेज गेंदबाजों के माथे पर शिकन आ जाती थी। उनकी खासियत थी—एक ही गेंद को किसी भी दिशा में बाउंड्री के पार पहुंचा देना। ऑफ साइड हो या लेग साइड, फाइन लेग से लॉन्ग ऑन तक, हर एरिया उनके लिए खुला रहता था। लेकिन 2025 में तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है। वही बल्लेबाज, जो कभी गेंदबाजों पर हावी रहता था, अब रन बनाने के लिए संघर्ष करता दिख रहा है, और यही बदलाव (Suryakumar Yadav) को लेकर बहस की वजह बन गया है।

आंकड़े जो खुद कहानी कह रहे हैं
अगर भावनाओं को एक तरफ रखकर सिर्फ आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्थिति और भी गंभीर दिखती है। 2025 में टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट के दौरान सूर्यकुमार यादव ने तेज गेंदबाजों के खिलाफ 18 पारियों में बल्लेबाजी की है। इन 18 पारियों में वे सिर्फ 122 रन ही बना सके हैं। 106 गेंदों का सामना करते हुए उनका औसत मात्र 8.71 रहा है। ये आंकड़े साफ तौर पर (T20I Stats) में गिरावट की ओर इशारा करते हैं।
आउट होने का पैटर्न बढ़ा चिंता
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन 18 पारियों में सूर्यकुमार यादव 14 बार तेज गेंदबाजों के खिलाफ ही आउट हुए हैं। यानी लगभग हर मुकाबले में पेसर्स ने उन्हें परेशान किया। पहले जिन गेंदों पर वे आक्रामक शॉट्स खेलते थे, उन्हीं गेंदों पर अब विकेट गंवा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि (Pace Bowling) के सामने आत्मविश्वास की भी कहानी बयां करता है।
स्ट्राइक रेट और डॉट बॉल का सच
टी20 क्रिकेट में स्ट्राइक रेट बल्लेबाज की असली पहचान होता है, लेकिन 2025 में सूर्यकुमार का स्ट्राइक रेट 115.09 का ही रहा है। इससे भी ज्यादा चिंता की बात है उनका डॉट बॉल प्रतिशत—50.9। इसका मतलब यह हुआ कि तेज गेंदबाजों के खिलाफ वे हर दो में से एक गेंद पर रन नहीं बना पा रहे हैं। जो खिलाड़ी कभी गेंदबाजों की लाइन-लेंथ बिगाड़ देता था, वही अब (Strike Rate) के मामले में औसत से नीचे दिख रहा है।
डर का रिश्ता अब बदल चुका है
एक समय तेज गेंदबाज सूर्यकुमार यादव से खौफ खाते थे। वे जिस गेंद पर ऑफ साइड में छक्का जड़ते थे, उसी गेंद को अगली बार फाइन लेग या मिडविकेट के ऊपर से भेज देते थे। यही अनिश्चितता गेंदबाजों को दबाव में डालती थी। लेकिन 2025 में यह डर गायब सा हो गया है। गेंदबाज अब ज्यादा आत्मविश्वास के साथ उन्हें गेंदबाजी कर रहे हैं, जो (Batting Dominance) के टूटने का संकेत है।
‘आउट ऑफ फॉर्म’ या ‘आउट ऑफ रन्स’?
सूर्यकुमार यादव खुद को आउट ऑफ फॉर्म मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि वे आउट ऑफ फॉर्म नहीं, बल्कि आउट ऑफ रन्स हैं। हालांकि क्रिकेट की दुनिया में यह फर्क बहुत पतला होता है। जब रन नहीं आते, तो उसे फॉर्म की कमी ही कहा जाता है। सूर्या का इस सच्चाई को स्वीकार न करना कहीं न कहीं टीम मैनेजमेंट के लिए (Player Form) को लेकर चिंता बढ़ा देता है।
कप्तानी और जिम्मेदारी का दबाव
सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर ही नहीं, बल्कि कप्तान के रूप में भी सूर्यकुमार यादव पर बड़ी जिम्मेदारी है। टी20 टीम की अगुवाई करते हुए उनसे न सिर्फ रन, बल्कि उदाहरण पेश करने की उम्मीद की जाती है। अगर कप्तान ही तेज गेंदबाजों के खिलाफ जूझता दिखे, तो टीम का मनोबल भी प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि यह मुद्दा (Team Leadership) से भी जुड़ जाता है।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 की आहट
टी20 वर्ल्ड कप 2026 ज्यादा दूर नहीं है और उससे पहले टीम इंडिया को अपने सबसे विस्फोटक बल्लेबाज से बड़ी पारियों की जरूरत होगी। अगर सूर्यकुमार यादव की यह फॉर्म बरकरार रहती है, तो चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट के सामने मुश्किल फैसले खड़े हो सकते हैं। यह सिर्फ एक खिलाड़ी का फॉर्म नहीं, बल्कि पूरे टूर्नामेंट की रणनीति से जुड़ा (T20 World Cup) सवाल बन चुका है।
वापसी की उम्मीद अब भी बाकी
क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है और सूर्यकुमार यादव जैसे खिलाड़ी को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक-दो अच्छी पारियां उनका आत्मविश्वास लौटा सकती हैं। तकनीकी सुधार, शॉट चयन और मानसिक मजबूती के साथ वे फिर से तेज गेंदबाजों पर हावी हो सकते हैं। लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक 2025 में उनका प्रदर्शन (Comeback Chance) के बजाय चिंता की घंटी ही बजाता रहेगा।
टीम इंडिया के लिए अलर्ट सिग्नल
आखिर में, यह कहना गलत नहीं होगा कि सूर्यकुमार यादव की यह गिरावट सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि टीम इंडिया के लिए भी चेतावनी है। मिस्टर 360 का बल्ला फिर से गरजता है या नहीं, यह आने वाले महीनों में तय होगा। फिलहाल, आंकड़े और प्रदर्शन दोनों ही यह कह रहे हैं कि बदलाव जरूरी है, वरना यह (Indian Cricket) के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।



