झारखण्ड

Jharkhand Liquor Scam Investigation: शराब घोटाले की परतें खुलीं, IAS अमित कुमार ने खोले राज, विनय चौबे घिरे…

Jharkhand Liquor Scam Investigation: झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच अब एक बेहद अहम चरण में पहुंच चुकी है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सोमवार को पूर्व उत्पाद आयुक्त और आईएएस अधिकारी अमित कुमार का बयान अदालत में दर्ज कराया, जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। विशेष अदालत के आदेश पर न्यायिक दंडाधिकारी ने उनका बयान बंद कमरे में रिकॉर्ड किया, जिससे इस (high profile investigation) की गंभीरता साफ झलकती है।

Jharkhand Liquor Scam Investigation
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बंद कमरे में दर्ज हुआ अहम बयान

अमित कुमार का बयान पूरी गोपनीयता के साथ रिकॉर्ड किया गया और इसकी प्रति सीलबंद कर एसीबी कोर्ट में सुरक्षित रखी गई है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बयान पर किसी भी तरह का दबाव या प्रभाव न पड़े। सूत्रों का कहना है कि इस बयान ने (sealed statement) के जरिए कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं।


प्रधान सचिव की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

सूत्रों के अनुसार, अमित कुमार ने अपने बयान में तत्कालीन उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने साफ कहा कि विभाग में वही हुआ, जो चौबे चाहते थे। किसी अधिकारी या कर्मचारी में उनके निर्देशों को चुनौती देने की हिम्मत नहीं थी। यह खुलासा (bureaucratic control) को लेकर कई सवाल पैदा करता है।


नीति से लेकर क्रियान्वयन तक एक ही नाम

अमित कुमार के बयान के मुताबिक शराब नीति बनाने से लेकर उसे लागू करने तक हर स्तर पर फैसले विनय कुमार चौबे के निर्देशों पर ही लिए गए। विभागीय प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई थी। इस बयान ने प्रशासनिक कामकाज में (policy manipulation) के आरोपों को और मजबूत कर दिया है।


JSBCL के जरिए हुआ शराब कारोबार

जानकारी के अनुसार, उस समय लागू उत्पाद नीति के तहत झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से राज्य में शराब की खुदरा दुकानों का संचालन किया जा रहा था। सरकार के इस मॉडल को पारदर्शिता के नाम पर लागू किया गया था, लेकिन बाद में यही व्यवस्था (JSBCL operations) सवालों के घेरे में आ गई।


मैनपावर सप्लाई में टेंडर का खेल

शराब दुकानों के संचालन के लिए निजी प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए मैनपावर की आपूर्ति कराई गई। औपचारिक रूप से टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन अमित कुमार ने आरोप लगाया कि ये टेंडर चौबे की पसंदीदा एजेंसियों को दिए गए। इस पूरे घटनाक्रम ने (tender irregularities) की आशंका को और गहरा कर दिया।


छत्तीसगढ़ कनेक्शन का भी दावा

सूत्रों के मुताबिक, अमित कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि विनय कुमार चौबे ने छत्तीसगढ़ नगर निगम के एक अधिकारी के साथ मिलकर मनपसंद एजेंसियों को ठेका दिलवाया। अगर यह आरोप साबित होते हैं तो यह मामला सिर्फ राज्य तक सीमित न रहकर (interstate nexus) की ओर भी इशारा करता है।


एसीबी की जांच में तेजी

शराब घोटाले में एसीबी की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। नए-नए तथ्य सामने आने के बाद जांच एजेंसी ने अपनी रणनीति और सख्त कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में (ACB probe) के तहत और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।


विनय सिंह से जेल में होगी पूछताछ

इस घोटाले में जेल में बंद आईएएस अधिकारी विनय चौबे के करीबी और नेक्सजेन कंपनी के संचालक विनय सिंह से मंगलवार को पूछताछ की जाएगी। एसीबी के अधिकारी दो दिनों तक जेल में ही उनसे सवाल-जवाब करेंगे। यह पूछताछ (custodial questioning) के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।


पांच करोड़ की उगाही पर फोकस

एसीबी सूत्रों के अनुसार, विनय सिंह से विशेष रूप से उस पांच करोड़ रुपये के फंड को लेकर सवाल किए जाएंगे, जो कथित तौर पर विनय चौबे के लिए उगाही के जरिए जुटाया गया था। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और कहां इस्तेमाल हुआ। यह पहल (illegal funding) की परतें खोल सकती है।


जेल से बाहर आ सकते हैं नए सुराग

अधिकारियों का मानना है कि जेल में की जाने वाली पूछताछ से कई नए सुराग हाथ लग सकते हैं। विनय सिंह की गवाही से यह स्पष्ट हो सकता है कि शराब नीति के पीछे कौन-कौन से लोग सक्रिय थे और किस स्तर तक मिलीभगत थी। यह स्थिति (evidence trail) को मजबूत कर सकती है।


राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल

अमित कुमार के बयान के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष सरकार पर हमलावर है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष पूरे मामले को जांच एजेंसियों पर छोड़ने की बात कर रहा है। यह विवाद (political fallout) का रूप लेता जा रहा है।


आगे और बड़े खुलासों की उम्मीद

जिस तरह से एसीबी जांच को आगे बढ़ा रही है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में शराब घोटाले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। अमित कुमार का बयान इस मामले में एक मजबूत कड़ी बनकर उभरा है, जो पूरी जांच की दिशा तय कर सकता है। यह पूरा प्रकरण (liquor scam revelations) के तौर पर इतिहास में दर्ज हो सकता है।

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