US Travel Ban 2025: ट्रंप के एक दस्तखत ने दुनिया के कई देशों के लिए बंद किए अमेरिका के दरवाजे, अब सपना बनकर रह जाएगा ‘अमेरिकन ड्रीम’…
US Travel Ban 2025: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस की कमान संभालते ही अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए यात्रा प्रतिबंधों की सूची में भारी विस्तार कर दिया है। पिछले महीने दो नेशनल गार्ड जवानों पर हुई हिंसक गोलीबारी की घटना ने आग में घी डालने का काम किया है। राष्ट्रपति के इस नए आदेश के बाद अब (Immigration Policy) को लेकर दुनिया भर में चर्चा छिड़ गई है, क्योंकि कई नए देशों के नागरिकों के लिए अमेरिका में प्रवेश अब लगभग नामुमकिन हो गया है।

इन देशों पर लगा पूर्ण प्रतिबंधों का कड़ा पहरा
व्हाइट हाउस द्वारा जारी आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, सुरक्षा मानकों पर खरे न उतरने वाले कई देशों को ‘नो-एंट्री’ जोन में डाल दिया गया है। बुर्किना फासो, माली, नाइजर, दक्षिण सूडान और सीरिया जैसे देशों पर अब पूर्ण यात्रा प्रतिबंध लागू रहेंगे। ट्रंप सरकार ने साफ कर दिया है कि (National Security) से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, फिलिस्तीनी अथॉरिटी द्वारा जारी किए गए यात्रा दस्तावेजों पर सफर करने वाले व्यक्तियों को भी अब अमेरिकी सरजमीं पर कदम रखने से पहले कड़े कानूनी फिल्टर से गुजरना होगा।
पुरानी पाबंदियां और बढ़ता हुआ दायरा
ट्रंप प्रशासन ने न केवल नई पाबंदियां लगाई हैं, बल्कि पहले से मौजूद प्रतिबंधों को भी और ज्यादा सख्त कर दिया है। 12 देशों को “उच्च जोखिम” की श्रेणी में रखते हुए उन पर पूर्ण प्रतिबंध बरकरार रखे गए हैं, जिनमें अफगानिस्तान, ईरान, सोमालिया और यमन जैसे नाम शामिल हैं। विशेष रूप से, लाओस और सिएरा लियोन जैसे देशों को, जिन पर पहले केवल आंशिक रोक थी, अब (Travel Restrictions) के सख्त दायरे में लाते हुए पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रशासन का तर्क है कि इन देशों से आने वाले यात्रियों का डेटा साझा करने की प्रक्रिया संतोषजनक नहीं है।
आंशिक प्रतिबंधों की सूची में शामिल हुए 15 नए राष्ट्र
पूर्ण प्रतिबंधों के अलावा, 15 अन्य देशों के नागरिकों पर आंशिक रूप से लगाम कसी गई है। नाइजीरिया, तंजानिया, जिम्बाब्वे और जाम्बिया जैसे देशों को इस सूची में जगह दी गई है। वाइट हाउस का मानना है कि इन (Border Control) उपायों के माध्यम से उन विदेशी नागरिकों को रोका जा सकता है जिनके बारे में अमेरिका के पास पर्याप्त खुफिया जानकारी उपलब्ध नहीं है। बुरुंडी, क्यूबा और वेनेजुएला जैसे देश पहले से ही इस श्रेणी का हिस्सा रहे हैं, जिनकी स्थिति में फिलहाल कोई सुधार नहीं देखा गया है।
तुर्कमेनिस्तान को मिली बड़ी और राहत भरी खबर
इतने कड़े फैसलों के बीच तुर्कमेनिस्तान के लिए एक सुखद संदेश भी सामने आया है। अमेरिका ने इस मध्य एशियाई देश के लिए गैर-आप्रवासी वीज़ा प्रतिबंधों को हटाने का निर्णय लिया है। व्हाइट हाउस ने स्वीकार किया कि (Diplomatic Cooperation) के मामले में तुर्कमेनिस्तान ने पिछली घोषणाओं के बाद से उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है। हालांकि, वहां के नागरिकों के लिए आप्रवासी (Immigrant Visa) के तौर पर स्थायी रूप से बसने की पाबंदी अभी भी लागू रहेगी, लेकिन अस्थायी यात्राओं के लिए यह एक बड़ी राहत मानी जा रही है।
नेशनल गार्ड जवान पर हमले ने बदली पूरी तस्वीर
इस सख्त आव्रजन नीति के पीछे नवंबर में हुई वह दुखद घटना है, जिसने पूरे अमेरिका को हिला दिया था। एक अफगान नागरिक द्वारा की गई गोलीबारी में एक नेशनल गार्ड जवान की मौत हो गई थी। जांच में पता चला कि हमलावर 2021 में अमेरिका आया था, जिसके बाद (Vetting Process) की खामियों पर तीखे सवाल खड़े हुए। डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना को आधार बनाते हुए पूर्ववर्ती जो बाइडेन प्रशासन पर जांच में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया और सत्ता में आते ही इन सुरक्षा खामियों को भरने का काम शुरू कर दिया।
आतंकवाद विरोधी प्रयासों को मिलेगी नई मजबूती
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि इन कठोर कदमों का एकमात्र उद्देश्य आतंकवाद विरोधी प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाना है। जब तक किसी देश की सरकार अपने नागरिकों का पूर्ण और विश्वसनीय रिकॉर्ड साझा नहीं करती, तब तक उन्हें (Visa Processing) की अनुमति देना अमेरिका के लिए एक बड़ा जोखिम बना रहेगा। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इन प्रतिबंधों से उन देशों पर भी दबाव बनेगा जो सुरक्षा प्रोटोकॉल और सूचना साझा करने के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने में कोताही बरत रहे हैं।
फुटबॉल विश्व कप और खेल प्रेमियों की बढ़ती चिंता
ट्रंप की इन विवादास्पद नीतियों का असर आगामी खेल आयोजनों पर भी पड़ता दिख रहा है। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में होने वाले आगामी फुटबॉल विश्व कप को लेकर खेल जगत में चिंता है कि सख्त वीज़ा नियमों के कारण प्रशंसकों को (International Travel) में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस चिंता को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा है कि टिकटधारकों के लिए एक विशेष प्राथमिकता प्रणाली विकसित की जाएगी, ताकि खेल प्रेमियों को बिना किसी परेशानी के स्टेडियम तक पहुंचने का मौका मिल सके।
भविष्य की चुनौतियां और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का रुख
इतिहास गवाह है कि डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी यात्रा प्रतिबंध सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक रहे थे। उस समय भी इन आदेशों को अदालतों में चुनौती दी गई थी, लेकिन अंततः सुप्रीम कोर्ट ने इसे (Executive Order) की शक्तियों के तहत वैध माना था। अब एक बार फिर, मानवाधिकार संगठन इन नए प्रतिबंधों के खिलाफ लामबंद हो सकते हैं। लेकिन ट्रंप की कार्यशैली को देखते हुए यह साफ है कि वे “अमेरिका फर्स्ट” की अपनी नीति पर अडिग रहेंगे, भले ही इसके लिए उन्हें दुनिया के बड़े हिस्से से कूटनीतिक दूरी क्यों न बनानी पड़े।



