उत्तराखण्ड

Divyang Civil Service Coaching: सीएम धामी ने खोल दिए सिविल सेवा के द्वार, अब आय की सीमा नहीं बनेगी बाधा

Divyang Civil Service Coaching: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के मेधावी दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सिविल सेवा परीक्षा की ऑनलाइन कोचिंग योजना में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने इस योजना के तहत लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित सालाना पारिवारिक आय की सीमा को दो लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे आठ लाख रुपये कर दिया है। (Administrative Reforms) के इस कदम से अब उन मध्यमवर्गीय परिवारों के दिव्यांग छात्र भी देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा की तैयारी कर सकेंगे, जो पहले आय की कड़े नियमों के कारण इस लाभ से वंचित रह जाते थे।

Divyang Civil Service Coaching
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आय सीमा में विस्तार की मुख्य वजह: अवसरों का दायरा बढ़ाना

समाज कल्याण निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि पूर्व में निर्धारित दो लाख रुपये की आय सीमा दिव्यांग मेधावियों के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो रही थी। इस सीमित दायरे के कारण (Education Opportunities) का लाभ बहुत कम छात्र उठा पा रहे थे और अधिकांश योग्य आवेदक योजना की परिधि से बाहर हो रहे थे। अब आय सीमा को आठ लाख रुपये करने के बाद, राज्य के एक बड़े मेधावी दिव्यांग वर्ग को मुख्यधारा में शामिल होने और प्रशासनिक सेवाओं में अपना करियर बनाने का समान अवसर प्राप्त होगा।

मुख्यमंत्री की अनूठी पहल: घर बैठे होगा आईएएस बनने का सपना साकार

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नवंबर माह में इस अनूठी योजना की घोषणा की थी, जो राज्य के शैक्षणिक इतिहास में अपनी तरह का पहला प्रयास है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शारीरिक बाधाओं को दरकिनार कर (Online Learning Platforms) के माध्यम से दिव्यांगों को सशक्त बनाना है। चयनित मेधावी छात्र-छात्राओं को देश के प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा की बारीकियों और तैयारी के गुर सिखाए जाएंगे, ताकि वे भी राज्य और देश के विकास में अपना योगदान दे सकें।

पात्रता के मानक: कौन उठा सकता है इस योजना का लाभ

इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ लेने के लिए कुछ बुनियादी अहर्ताएं तय की गई हैं। आवेदक का उत्तराखंड का मूल निवासी होना अनिवार्य है और वह वर्तमान में स्नातक (Graduation Final Year) का छात्र होना चाहिए। इसके साथ ही, अभ्यर्थी की दिव्यांगता का स्तर 40 प्रतिशत या उससे अधिक होना आवश्यक है। सरकार ने इन मानकों को इसलिए सरल और स्पष्ट रखा है ताकि वास्तविक जरूरतमंद छात्र बिना किसी तकनीकी उलझन के अपनी मेधा को साबित कर सकें।

आवेदन की समय-सीमा और महत्वपूर्ण तिथियां

यदि आप या आपके परिचित में कोई इस योजना के लिए योग्य है, तो उन्हें समय रहते अपनी दावेदारी पेश करनी होगी। आवेदन करने की अंतिम तिथि 24 दिसंबर तय की गई है। सरकार ने (Application Deadlines) का विशेष ध्यान रखने की अपील की है ताकि दस्तावेजों की जांच और चयन प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके। समय पर आवेदन करने वाले छात्रों को ही जनवरी 2026 से प्रस्तावित विशेष कक्षाओं में शामिल होने का अवसर मिल सकेगा।

कैसे करें फ्री आवेदन: पोर्टल और गूगल फार्म की सुविधा

प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए समाज कल्याण विभाग ने कई विकल्प दिए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (Official Government Portal) से आवेदन पत्र निशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं। भरे हुए फॉर्म को हल्द्वानी स्थित समाज कल्याण निदेशालय में जमा कराया जा सकता है। इसके अलावा, तकनीकी रूप से सक्षम छात्रों के लिए गूगल फार्म लिंक की सुविधा भी प्रदान की गई है, जिससे वे घर बैठे ही अपना विवरण दर्ज कर सकते हैं।

नए साल में शुरू होगी पढ़ाई: जनवरी 2026 से प्रस्तावित कक्षाएं

विभाग की योजना के अनुसार, चयन प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद नए साल की शुरुआत के साथ ही कोचिंग सत्र का आगाज कर दिया जाएगा। जनवरी 2026 से प्रस्तावित इन (Virtual Classrooms) के जरिए छात्रों को न केवल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, बल्कि नियमित रूप से टेस्ट सीरीज और मेंटरशिप प्रोग्राम भी आयोजित किए जाएंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दिव्यांग छात्रों को वही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले जो बड़े शहरों के महंगे कोचिंग सेंटरों में उपलब्ध होती है।

निष्कर्ष: आत्मनिर्भर युवाओं के निर्माण की दिशा में ठोस कदम

पुष्कर सिंह धामी सरकार का यह कदम राज्य के दिव्यांग युवाओं को ‘नौकरी मांगने वाले’ के बजाय ‘नौकरी देने वाले’ और नीति-निर्माता बनाने की दिशा में एक बड़ा निवेश है। (Social Welfare Schemes) के माध्यम से जब आय की दीवारें गिरती हैं, तो प्रतिभा अपने आप चमकने लगती है। आय सीमा में यह वृद्धि और निशुल्क कोचिंग की सुविधा उत्तराखंड के दिव्यांग मेधावियों के लिए एक ऐसा रक्षा कवच और हथियार है, जो उन्हें संघ लोक सेवा आयोग की कठिन चुनौती को पार करने में मददगार साबित होगा।

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